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अप्रैल में लगातार चौथे महीने बढ़त में रही विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर, मगर उत्पादन की रफ्तार में आयी कमी

Updated at : 02 May 2017 3:06 PM (IST)
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अप्रैल में लगातार चौथे महीने बढ़त में रही विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर, मगर उत्पादन की रफ्तार में आयी कमी

नयी दिल्ली : देश के विनिर्माण क्षेत्र में अप्रैल में लगातार चौथे महीने वृद्धि दर्ज की गयी. हालांकि, वृद्धि रफ्तार में इससे पिछले महीने के मुकाबले ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया. इस दौरान नये ऑर्डर में तो वृद्धि रही, लेकिन उत्पादन वृद्धि कुछ हल्की रही. निक्केई का मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अप्रैल […]

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नयी दिल्ली : देश के विनिर्माण क्षेत्र में अप्रैल में लगातार चौथे महीने वृद्धि दर्ज की गयी. हालांकि, वृद्धि रफ्तार में इससे पिछले महीने के मुकाबले ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया. इस दौरान नये ऑर्डर में तो वृद्धि रही, लेकिन उत्पादन वृद्धि कुछ हल्की रही. निक्केई का मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अप्रैल में भी मार्च के ही समान 52.5 अंक पर रहा. यह सूचकांक देश में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों के बारे में संकेत देता है.

इसे भी पढ़िये : नये ऑर्डर और उत्पादन बढ़ने से मार्च में पांच महीने के उच्चतर स्तर पर पहुंचा पीएमआई

हालांकि, अप्रैल माह के दौरान माल के नये ऑर्डर में अच्छी तेजी रही है और निर्यात ऑर्डर में लगातार तीसरे माह वृद्धि रही. जहां तक विस्तार कार्य की बात है, मार्च के मुकाबले इसमें कुछ सुस्ती रही है. पिछले साल नोटबंदी के बाद आर्थिक गतिविधियों में आयी गिरावट के बाद अप्रैल चौथा महीना रहा है, जिसमें विनिर्माण गतिविधियों में वृद्धि दर्ज की गयी. पीएमआई सूचकांक में 50 से अधिक अंक से तात्पर्य विस्तार यानी वृद्धि दर्शाता है, जबकि इससे कम अंक मिलने पर उस क्षेत्र की गतिविधियों में गिरावट का संकेत मिलता है.

आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री और रिपोर्ट की लेखिका पॉलियाना डे लिमा ने कहा कि घरेलू स्तर पर अच्छी मांग के साथ साथ विदेशी बाजारों से नये ऑर्डर में वृद्धि से कुल मिलाकर भारतीय विनिर्माताओं के नये व्यावसाय में अप्रैल माह के दौरान तेजी का रुख रहा. मुद्रास्फीति के मामले में रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल में लगातार 19वें महीने खरीद लागत बढ़ी है. इसके बावजूद, पांच फीसदी से भी कम विनिर्माताओं ने अप्रैल माह में अपने उत्पादों के दाम बढ़ाये, जबकि 93 फीसदी ने कोई बदलाव नहीं होने का संकेत दिया. रिजर्व बैंक ने अप्रैल में जारी मौद्रिक नीति में रेपो दर को 6.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा, जबकि रिवर्स रेपो दर को 5.75 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी कर दिया था.

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