कम कर दर चाहते हैं तो मत कीजिए कर चोरी : अरुण जेटली

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Aug 2016 5:25 PM

विज्ञापन

मुंबई : वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) की दर को लेकर लगायी जा रही तमाम अटकलों के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि कर की कम दर और ज्यादा कर चोरी एक साथ नहीं चल सकती. जेटली ने यहां भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा, ‘‘यदि सभी करदाता अपने कर का भुगतान करें, […]

विज्ञापन

मुंबई : वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) की दर को लेकर लगायी जा रही तमाम अटकलों के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि कर की कम दर और ज्यादा कर चोरी एक साथ नहीं चल सकती. जेटली ने यहां भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा, ‘‘यदि सभी करदाता अपने कर का भुगतान करें, तो इससे कर की दरों को और कम करने में मदद मिलेगी. जितनी ज्यादा कर चोरी और कर में छूट होगी उतनी ही ऊंची कर दरें होंगी. कर की दर भी कम हो और कर चोरी भी ज्यादा हो यह एक साथ नहीं चल सकता.’ भाजपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष आशीष शेलर ने जीएसटी के तहत प्रस्तावित दर 17 प्रतिशत रखने जाने की मांग की जिसके जवाब में जेटली ने यह बात कही. उन्होंने आगे कहा कि जितने ज्यादा लोग कर चोरी करेंगे उतना ही कर ढांचे में विसंगतियां होंगी.

जीएसटी की प्रस्तावित एकीकृत कर प्रणाली में देश एकल बाजार में तब्दील हो जाएगा क्योंकि इससे देशभर में वस्तु और सेवाओं की आवाजाही बेरोकटोक हो सकेगी. जेटली ने कहा कि इसके लिए देशभर में एक समान कर की दर होनी चाहिए. जीएसटी के तहत कर की दरों को कम रखा जा सकेगा जिससे कारोबार करने की लागत कम होगी और अतत: उपभोक्ता केलिए भी दाम कम होगा. जेटली ने कहा, ‘‘आपको चाहिए कि एक व्यक्ति का कर मामले में एक बार ही आकलन होना चाहिए, उस पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कर प्राधिकरणों द्वारा आकलन नहीं किया जाना चाहिए. ऐसा होने पर ही कारोबार करना आसान होगा.’ उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोगों की संख्या है जो कि कर रिटर्न तो दाखिल करते हैं लेकिन वास्तव में वह कोई कर नहीं देते हैं.

जेटली ने कहा कि दुबई और सिंगापुर को छोड़कर हमारी कर की दरें अब अधिक तर्कसंगत हो रही है. अप्रत्यक्ष कर की दरें और कम होंगी इसकेलिए इनका आधार बढाने की जरूरत है और इसे हासिल करने केलिए हर किसी को अपने करों का भुगतान करना चाहिए. वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी को अमल में लाना उनकी त्वरित चुनौती है. इसके बाद अगली चुनौती बैंकों को मजबूत बनाने की है. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत बनाने केलिए काम कर रही है और हम इसकेलिए प्रतिबद्ध हैं.’ इस माह की शुरुआत में संसद ने जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया है और असम, बिहार की विधानसभाओं ने इस पर अपनी सहमति भी जता दी है. इस विधेयक को आधे से अधिक राज्यों में मंजूरी मिलना जरूरी है. उसके बाद ही इसे संवैधानिक वैधता प्राप्त होगी.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola