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कोरोना का खौफ: PDS से अब छह महीने का अनाज एक साथ उठा सकेंगे 75 करोड़ परिवार

केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने बुधवार को कहा कि देश के 75 करोड़ हकदारों को जल्द ही छह महीने का राशन एक ही साथ उठाने की छूट दी जा सकती है.

नयी दिल्ली : जनवितरण प्रणाली की दुकानों से राशन का अनाज उठाने वाले देश के करीब 75 करोड़ बीपीएल परिवारों के लिए एक खुशखबरी है और वह यह कि अब वे एक साथ छह महीने के राशन का अनाज उठा सकेंगे. केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने बुधवार को कहा कि राशन की दुकानों से सस्ता अनाज पाने के हकदार 75 करोड़ लोगों को छह महीने का राशन एक साथ उठाने की छूट दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि अभी उन्हें ज्यादा से ज्यादा दो महीने का अनाज समय से पहले उठाने की छूट है. केवल पंजाब सरकार है, जिसने लागों को छह महीने का कोटा एक साथ उठाने की अनुमति दे रखी है. पासवान ने कहा कि हमारे गोदामों में अनाज का पर्याप्त भंडार है. हमने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे गरीब लोगों को छह महीने के अनाज का कोटा एक साथ उठाने की छूट दें.

कोरोना वायरस संक्रमण के बीच यह निर्णय इसलिए लिया गया है, ताकि आगे किसी प्रकार की पाबंदी के लागू होने पर गरीब लोगों को अनाज पाने में दिक्कत न हो. मंत्री ने यह भी कहा कि सरकारी दुकानों से अनाज का उठाव बढ़ने पर सरकारी गोदामों में जगह का दबाव कम होगा. जगह की कमी के कारण सरकारी खरीद का कुछ गेहूं खुले भंडार केंद्रों पर जमा किया गया है.

उन्होंने कहा कि इस समय सरकारी गोदामों में 4.35 करोड़ टन अधिक अनाज पड़ा हुआ है, जो सुरक्षित बफर स्टॉक की जरूरत से अधिक है. इसमें से 272.19 लाख टन चावल और 162.79 लाख अन गेहूं है. पीडीएस के लिए अप्रैल में बफर में 135 लाख टन चावल और 74.2 लाख टन गेहूं का भंडार सुरक्षित माना जाता है.

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KumarVishwat Sen
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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