ePaper

टाटा स्टील: 70 हजार करोड़ रुपये गंवाने के बाद लिया बेचने का फैसला

Updated at : 01 Apr 2016 8:12 AM (IST)
विज्ञापन
टाटा स्टील: 70 हजार करोड़ रुपये गंवाने के बाद लिया बेचने का फैसला

जमशेदपुर: टाटा स्टील ने जब वर्ष 2007 में जब इंगलिश-डच स्टील मेकर कंपनी कोरस को खरीदा तो पूरी दुनिया में टाटा स्टील का डंका बजने लगा था. लेकिन यह सौदा घाटे का साबित हुआ. टाटा स्टील ने भारत में भरपूर मुनाफा कमाया और उसे कोरस में निवेश करती गयी. लेकिन नौ साल में कंपनी ने […]

विज्ञापन
जमशेदपुर: टाटा स्टील ने जब वर्ष 2007 में जब इंगलिश-डच स्टील मेकर कंपनी कोरस को खरीदा तो पूरी दुनिया में टाटा स्टील का डंका बजने लगा था. लेकिन यह सौदा घाटे का साबित हुआ. टाटा स्टील ने भारत में भरपूर मुनाफा कमाया और उसे कोरस में निवेश करती गयी. लेकिन नौ साल में कंपनी ने कुल 69 हजार 300 करोड़ रुपये का घाटा दिया. इसमें से टाटा स्टील द्वारा यूरोप के बाजार से लिये गये 21,820 करोड़ रुपये भी शामिल हैं. इसके बाद देश की सर्वाधिक मुनाफा कमाने वाली टाटा स्टील कंपनी की छवि एक कर्जदार कंपनी के रूप में बन गयी. करीब 70 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने के बाद टाटा स्टील की आंखें खुली और अब कोरस को बेचने का निर्णय लिया गया.
जमशेदपुर के लोगों से कमाया, यूरोप में गंवाया : 1907 से टाटा स्टील जमशेदपुर में लगातार मुनाफा कमाती रही है. क्योंकि तब तक टाटा स्टील का भारत में कोई दूसरा प्लांट नहीं था. 2007 में कोरस का अधिग्रहण और 2016 में कलिंगानगर (ओड़िशा) के प्रोडक्शन को छोड दिया जाये तो टाटा स्टील जमशेदपुर से ही मुनाफा कमाती रही. और जमशेदपुर से कमाये गये पैसों को कोरस लेने के बाद से यूरोप में गंवाती रही.
कोरस को बेचना भी होगा काफी मुश्किल : स्टील इंडस्ट्री की हालत देखते हुए टाटा के लिए कोरस का खरीदार तलाशना बेहद मुश्किल होगा. वर्ष 1990 के दशक में ब्रिटेन की जीडीपी में स्टील का कॉन्ट्रिब्यूशन 0.5% था, जो अब 0.1% रह गया है. बीते 25 साल में जीडीपी का साइज 62% बढ़ा, लेकिन स्टील इंडस्ट्री 24% घट गई.
किसी भी भारतीय कंपनी की सबसे बड़ी डील थी कोरस : कोरस को खरीदना किसी भारतीय कंपनी की विदेश में सबसे बड़ी डील थी. इससे टाटा स्टील की कैपेसिटी 87 लाख टन से बढ़कर 2.5 करोड़ टन हो गई थी. डील के बाद टाटा स्टील दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी स्टील कंपनी बन गई थी. फॉर्च्यून 500 में शामिल होने वाली यह पहली भारतीय कंपनी बनी.
शेयरधारकों के हंगामे व दबाव के बाद टाटा स्टील ने लिया फैसला : कोरस को बेचने के फैसले को टाटा स्टील के अहम से लेकर उसकी पहचान से भी जोड़कर देखा जा रहा है. शेयरधारकों ने टाटा स्टील पर लगातार दबाव बनाये रखा. कई बार एजीएम में भी इसे लेकर हंगामा हुआ. जिसके बाद बोर्ड ने कोरस को बेचने का फैसला लिया.
पहले ही स्थिति भांपकर पिछले माह ही सीइओ ने दिया था इस्तीफा : टाटा स्‍टील यूरोप के सीइओ कार्ल कोहलर ने पिछले माह अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया था. कंपनी ने उनकी जगह चीफ टेक्निकल ऑफिसर हैंस फिशर को अपना नया सीइओ नियुक्‍त किया था. बताया जाता है कि कार्ल कोहलर ने कोरस को बेचने की स्थिति को पहले ही भांप लिया था.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola