कारोबार में आसानी के लिहाज से भारत को विश्वबैंक से मिल सकता है ऊंचा नंबर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Sep 2015 4:01 PM
नयी दिल्ली : वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कहा कि सरकार की नयी-नयी पहलों से भारत को ‘कारोबार में आसानी’ की दृष्टि से विश्वबैंक की रैंकिंग में इस बार ऊंचा स्थान मिल सकता है. विश्वबैंक की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनस-2015′ रपट में 189 देशों की विश्व सूची में भारत को 142वें स्थान […]
नयी दिल्ली : वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कहा कि सरकार की नयी-नयी पहलों से भारत को ‘कारोबार में आसानी’ की दृष्टि से विश्वबैंक की रैंकिंग में इस बार ऊंचा स्थान मिल सकता है. विश्वबैंक की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनस-2015′ रपट में 189 देशों की विश्व सूची में भारत को 142वें स्थान पर रखा गया था. इस रपट में कारोबार की आसानी के लिहाज से केवल दो मानकों को छोड कर किसी भी मानक के आधार पर भारत पहले 100 देशों में स्थान नहीं पा सका था. इन दो मानकों में ऋण की सुविधा और अल्पांशधारी निवेशकों के हितों की रक्षा के उपाय शामिल है.
निर्मला ने यहां सीआइआइ के एक कार्यक्रम में कहा, ‘पिछले साल बहस छिडी थी कि भारत इस रैंकिंग में इतने नीचे क्यों है. विभिन्न कदमों के बाद अब इस बार हमें उम्मीद है कि इस साल भारत को बेहतर रैंकिंग मिलेगी.’ उन्होंने कहा कि विश्वबैंक भारत के राज्यों में ‘कारोबार की सुगमता’ पर आधारित एक रपट इस सप्ताह जारी कर सकता है. यह रपट एक पेशेवर एजेंसी की मदद से तैयार की जा रही है. इसमें राज्यों को क्रमागत स्थान दिया जाएगा.
वाणिज्य मंत्री ने कहा कि ज्यादातर राज्यों ने लाल फीताशाही को खत्म कर कारोबार का वातावरण सुधारने के लिए अनेको कदम उठाए हैं. कोई राज्य अब ‘लाल फीताशाही’ की उलझनों वाला राज्य बना नहीं रह सकता. सीतारमण ने यह भी कहा कि सरकार विदेशों के साथ व्यापार समझौतों की बात में यह सुनिश्चत करना चाहती है कि भारतीय इकाइयों के लिए विदेशी बाजारों में प्रवेश में आसानी हो.
उन्होंने कहा, ‘एक निर्यातक के रूप में हमें विदेशी बाजारों में प्रवेश की सबसे अच्छी सुविधा मिलनी ही चाहिए.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद निर्मला ने भी आज दोहराया कि भारतीय उद्यमी निवेश का जोखिम उठाएं. उन्होंने कहा, ‘आप को जोखिम लेना है, आप को निवेश करना है. आप को अपना भविष्य खुद तय करना है. आप को देश के अपने बाजार और यहां की जनसंख्या का फायदा उठाना है.’ उन्होंने कहा कि उत्तरी राज्यों में हेल्थकेयर, ऊर्जा, आटोमोबाइल और रक्षा क्षेत्र में निवेश की अच्छी संभावना है. इन राज्यों ने 2004-14 के दौरान 7.7 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की.
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