जानें! आखिर क्यों एक दिन में 80 प्रतिशत तक गिर गया अडानी इंटरप्राइज का शेयर?
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jun 2015 12:26 PM
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बिजनेस डेस्क पूंजी बाजार का खेल बहुत रोचक और हैरतअंगेज होता है. जबसे देश में नरेंद्र मोदी की लहर चल रही है, तब से लगातार अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर बाजार में तेजी से उपर जा रहे थे. भारतीय उद्योग जगत, आर्थिक पत्रकारिता करने वाले लोग व निवेशक अडानी ग्रुप की तुलना सीधे रिलायंस ग्रुप से […]
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बिजनेस डेस्क
पूंजी बाजार का खेल बहुत रोचक और हैरतअंगेज होता है. जबसे देश में नरेंद्र मोदी की लहर चल रही है, तब से लगातार अडानी इंटरप्राइजेज के शेयर बाजार में तेजी से उपर जा रहे थे. भारतीय उद्योग जगत, आर्थिक पत्रकारिता करने वाले लोग व निवेशक अडानी ग्रुप की तुलना सीधे रिलायंस ग्रुप से करने लगे. अभी हफ्ता भर पहले यह रिपोर्ट आयी थी कि मोदी शासन के एक साल में अडानी की संपत्ति अंबानी से अधिक बढी, फिर ऐसे जबरदस्त सेंटीमेंट के बावजूद अचानक एक दिन में तीन जून को अडानी के शेयर 80 प्रतिशत तक क्यों गिर गये? पूरा बाजार व निवेशक इससे आवाक है.
नि:संदेह जिन निवेशकों ने उंची कीमत में इस उदीयमान मानी जाने वाली कंपनी के शेयर खरीदे होंगे और उसमें उनके पैसे फंसे रह गये होंगे, उनकी पेशानी पर बल तो आयेंगे ही. हालांकि इसका एक दूसरा पक्ष यह भी है कि जो निवेशक इस कंपनी के शेयर के बहुत उंचे चले जाने के कारण इसमें निवेश से दूर बैठे थे, उन्हें इस डाउनफॉल के बाद निवेश का मौका मिल गया है.
डी-मर्जर का खेल
अडानी के शेयर बुधवार को अचानक धराशायी नहीं हुए. इसके संकेत दो-तीन दिन पूर्व ही मिल गये थे. सोमवार यानी एक जून को इसके शेयर एक पांच प्रतिशत गिरे. सोमवार तक के दो सत्रों में हुए कारोबार में इस कंपनी के शेयर में 10 प्रतिशत तक की गिरावट आ गयी थी. यह गिरावट पिछले कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन में शुरू हुई, जब कहीं से यह खबर आयी कि अडानी इंटरप्राइज अपने पोर्ट बिजनेस व पॉवर बिजनेस को अलग-अलग करेगा. हालांकि कंपनी के बोर्ड ने इस साल के जनवरी में इस संबंध में निर्णय ले लिया था और इसके लिए कंपनी ने आधिकारिक बयान भी जारी किया था.
कंपनी ने डिमर्जर की राह पकडते हुए अडानी पोर्ट एंड इकोनॉमिक जोन एवं अडानी पॉवर एंड अडानी ट्रांसमिशन नाम से पुन: शेयर बाजार में उतारने का फैसला लिया. इसका आधिकारिक निर्णय कंपनी चार जून को लेने वाली है. कंपनी ने तय किया है कि अडानी इंटरप्राइज के प्रति 10, 000 शेयर पर पर अडानी पोर्ट के 14, 123 शेयर मिलेंगे, जबकि अडानी पॉवर के 18596 शेयर मिलेंगे.
कंपनी की इस पहल के बाद निवेशकों में हडकंप मच गया व उन्हें यह फायदेमंद सौदा नहीं लगा और आज बुधवार को बाजार खुलने के साथ सुबह कुछ ही समय में अडानी इंटरप्राइज के 3, 197, 373 शेयर बिक गये. बाजार में कंपनी के शेयरों की इतनी बडी संख्या में बिकवाली के बाद अचानक इसके शेयरों में 80 प्रतिशत तक गिरावट आ गयी. बाजार खुलने पर जो शेयर 574 रुपये का था, वह महज आधे घंटे बाद 9.45 बजे सुबह 116.50 रुपये का हो गया.
जब इस साल के जनवरी में अडानी इंटरप्राइज के डिमर्जर का फैसला लिया गया था तब कंपनी के सीएफओ अमित देसाई ने अपने बयान में कहा था कि हमारे कोल, पोर्ट व पॉवर बिजनेस का काफी विस्तार हुआ है. हम चाहते हैं कि हमारे शेयर होल्डर अडानी ग्रुप के साथ संबंधित बिजनेस में डायरेक्ट शेयर होल्डिंग के पैटर्न से जुडें और लाभ कमायें. उल्लेखनीय कि पिछले वर्ष के क्वार्टर थ्री में कंपनी ने 551 प्रतिशत तक का मुनाफा कमाया था.
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