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हस्तांतरण मूल्य के हर मामले पर अलग-अलग विचार होगा : जयंत सिन्हा

Updated at : 29 Jan 2015 4:48 PM (IST)
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हस्तांतरण मूल्य के हर मामले पर अलग-अलग विचार होगा : जयंत सिन्हा

नयी दिल्ली : बहुराष्ट्रीय कंपनियों से जुड़े ट्रांसफर प्राइसिंग के हर मुकदमे के संबंध में सरकार उसके गुण-दोष पर अलग-अलग विचार कर निर्णय करेगी. यह बात वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने आज कही. सिन्हा ने यहां एक समारोह में संवाददाताओं से कहा, आप इन मामलों में कोई एक सामान्य ढर्रा नहीं अपना सकते क्योंकि […]

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नयी दिल्ली : बहुराष्ट्रीय कंपनियों से जुड़े ट्रांसफर प्राइसिंग के हर मुकदमे के संबंध में सरकार उसके गुण-दोष पर अलग-अलग विचार कर निर्णय करेगी. यह बात वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने आज कही.
सिन्हा ने यहां एक समारोह में संवाददाताओं से कहा, आप इन मामलों में कोई एक सामान्य ढर्रा नहीं अपना सकते क्योंकि हर मामले पर अलग-अलग तरीके से विचार करना होता है. कई मामले फिलहाल अदालत में हैं. कई मामले मध्यस्थ निर्णय की प्रकिया में है. इसलिए हर मामले को उसके गुण-दोष के आधार पर सुलझाया जाएगा. सरकार ने कल निर्णय किया कि वह वोडाफोन इंडिया के शेयर इसकी मूल कंपनी ब्रिटेन की वोडाफोन को हस्तांतरित करने के मामले में हस्तांतरण मूल्य (ट्रांसफर प्राइसिंग) को लेकर 3,200 करोड रुपए के आयकर विवाद में कंपनी के पक्ष में आये बम्बई उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ अपील नहीं करेगी.
वित्त राज्यमंत्री सिन्हा इस प्रश्न का जवाब दे रहे थे कि क्या सरकार ट्रांसफर प्राइसिंग से जुडे मुकदमे से जूझ रही अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इसी तरह की रियायत मिलेगी.
मंत्रिमंडल ने वोडाफोन इंडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के मामले में 10 अक्तूबर 2014 के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को स्वीकार करने का फैसला किया है.
सरकार ने अन्य करदाताओं के मामलों में भी अदालत-आईटीएटी-डीआरपी के आदेश को स्वीकार करने का भी फैसला किया है, जिनमें ट्रांसफर प्राइसिंग समायोजन किया गया हो और अदालतों-आईटीएटी-डीआरपी ने करदाता कंपनी के समर्थन में फैसला किया हो.
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कल के फैसले का बहुराष्ट्रीय कंपनियों विशेष तौर पर हॉलैंड की प्रमुख तेल कंपनी शेल पर सकारात्मक असर हो सकता है. गौरतलब है कि बंबई उच्च न्यायालय ने ट्रांसफर प्राइसिंग मामले में शेल के पक्ष में फैसला दिया है.
सिन्हा ने एक अन्य सवाल के जवाब में उम्मीद जताई कि सरकार चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे को 4.1 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य हासिल कर लेगी. उन्होंने कहा, हम फिलहाल हर तरह के आंकडे देख रहे हैं. माननीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि हम विवेकपूर्ण राजकोषीय नीति का अनुपालन कर रहे हैं और हम इस साल राजकोषीय घाटे का अपना लक्ष्य पूरा कर लेंगे. मुझे कोई दिक्कत नहीं लगती है. सिन्हा ने यह भी कहा कि विनिवेश योजना मंत्रिमंडल के फैसले के मुताबिक आगे बढेगा.
सिन्हा ने कहा कि अगले 20 से 30 साल में पेंशन उत्तरदायित्व सरकार के लिए सबसे बडी चिंता का विषय होगा. उन्होंने निजी क्षेत्र से राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में भागीदारी करने की अपील की. राजग सरकार ने 2004 में एनपीएस पेश किया था.
उन्होंने कहा, हमें एनपीएस में भागीदारी करने के लिए और लोग चाहिए. भारतीय निजी क्षेत्र और अनौपचारिक क्षेत्र से जुडे लोगों को भी इस योजना में भागीदारी करने की जरुरत है.
सिन्हा ने पेंशन योजना नियामकीय और विकास प्राधिकार (पीएफआरडीए) से और उत्पाद पेश करने के लिए भी कहा.
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