साइप्रस से मिली ''कर-चोरी'' की सूचना का अध्ययन कर रहा है भारत
Updated at : 25 Dec 2014 7:55 PM (IST)
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नयी दिल्ली: भारत कर चोरों के बारे में जानकारी साझा नहीं करने के लिए बनाई गई काली सूची से साइप्रस को हटा सकता है. फिलहाल वह साइप्रस से मिली सूचना का अध्ययन कर रहा है. कर चोरो के बारे में जानकारी नहीं देने की वजह से पिछले साल भारत ने साइप्रस को ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया […]
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नयी दिल्ली: भारत कर चोरों के बारे में जानकारी साझा नहीं करने के लिए बनाई गई काली सूची से साइप्रस को हटा सकता है. फिलहाल वह साइप्रस से मिली सूचना का अध्ययन कर रहा है. कर चोरो के बारे में जानकारी नहीं देने की वजह से पिछले साल भारत ने साइप्रस को ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया था.
एक शीर्ष अधिकारी ने आज कहा, ‘‘उन्होंने हमें कुछ सूचना दी है. हम सिर्फ यह जांच कर रहे हैं कि यह सूचना सही है या नहीं. यदि हम संतुष्ट हो जाते हैं कि साइप्रस ने सही सूचना दी है, तो उसे भारत सरकार की काली सूची से हटाने पर विचार किया जाएगा.’’ वित्त मंत्रालय ने साइप्रस को एक अधिसूचित अधिकार क्षेत्र के रुप में वगीकृत किया था, क्योंकि वह कराधान संधि के तहत कर अधिकारियों द्वारा मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं करा रहा था.
इस अधिसूचना के बाद साइप्रस की कंपनियों को किए जाने वाली सभी भुगतानों पर 30 प्रतिशत का विदहोल्डिंग कर लग रहा है. इसके अलावा वहां से धन पाने वाली भारतीय इकाइयों को कोष के स्रोत का खुलासा करना होता है.भारत और साइप्रस ने दिसंबर, 1994 में आय पर दोहरा कराधान बचाव तथा वित्तीय चोरी रोधक करार किया था. इस करार के तहत दोनों देशों के लिए सूचनाओं को साझा करने की कानूनी बाध्यता है. वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में वित्त मंत्रालय ने आयकर कानून में धारा 94ए को शामिल किया था. इसका मकसद सूचना प्रोटोकाल में सहयोग नहीं करने वाले देशों को अधिसूचित करना व उनसे संरक्षण करना था.
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