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ब्याज दरें घटाने से अर्थव्यवस्था को मिलेगा बेहतर प्रोत्साहन : जेटली

Updated at : 17 Nov 2014 11:50 PM (IST)
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ब्याज दरें घटाने से अर्थव्यवस्था को मिलेगा बेहतर प्रोत्साहन : जेटली

नयी दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की वकालत की है. उन्‍होंने कहा कि कर्ज सस्ता होने से अर्थव्यवस्था को ‘अच्छा प्रोत्साहन’ मिलेगा. सिटी निवेशक सम्मेलन में आज यहां मुख्य वक्ता के रुप में संबोधित करते हुए जेटली ने कहा, इस बात को लेकर मैं पूरी तरह […]

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नयी दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की वकालत की है. उन्‍होंने कहा कि कर्ज सस्ता होने से अर्थव्यवस्था को ‘अच्छा प्रोत्साहन’ मिलेगा. सिटी निवेशक सम्मेलन में आज यहां मुख्य वक्ता के रुप में संबोधित करते हुए जेटली ने कहा, इस बात को लेकर मैं पूरी तरह स्पष्ट हूं कि पूंजी की लागत नीचे आनी चाहिए.

महंगाई घटी है, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम नीचे आये हैं. ऐसे में यदि बेहद पेशेवर संगठन रिजर्व बैंक अपने विवेक से पूंजी की लागत घटाने का फैसला करता है, तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बेहतर प्रोत्साहन मिलेगा. वित्त मंत्री ने उम्मीद जतायी कि एक पेशेवर संगठन के रुप में रिजर्व बैंक ‘सर्वश्रेष्ठ निर्णय’ लेगा.

इसी कार्यक्रम में मौजूद रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एस एस मुंदडा ने कहा कि केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में संशोधन करता है. लेकिन वह यह काम लोकप्रिय मांग के आधार पर नहीं किया जाता है. यह तभी होता है, जब उसे पूरा विश्वास होता है. एक अन्य कार्यक्रम में मुंदडा ने संवाददाताओं से कहा कि रिजर्व बैंक अगली मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों पर फैसला करने से पहले विभिन्न आर्थिक पहलुओं को देखेगा.

रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिये महत्वपूर्ण नीतिगत दर (रेपो) को इस साल जनवरी से आठ प्रतिशत पर कायम रखा हुआ है. केंद्रीय बैंक अपनी अगली मौद्रिक समीक्षा दो दिसंबर को पेश करेगा. इस बीच, खुदरा मुद्रास्फीति अक्तूबर में घटकर 5.52 प्रतिशत के रिकार्ड निचले स्तर पर आ गयी. वहीं थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पांच साल के निचले स्तर 1.77 प्रतिशत पर आ गयी है.

चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 5.4 से 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो इससे पिछले दो वित्त वर्षों में पांच फीसद से नीचे रही थी. वित्त मंत्री ने पाइपलाइन में विभिन्न आर्थिक सुधारों की जानकारी देते हुए विशेष रुप से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व बीमा संशोधन विधेयक का उल्लेख किया. उन्‍होंने कहा कि बीमा संशोधन विधेयक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पारित होने की उम्मीद है.

वित्त मंत्री ने कहा कि वह संसद की प्रवर समिति के संपर्क में हैं, जो फिलहाल बीमा विधेयक की समीक्षा कर रही है. वह समिति से अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द देने को कहेंगे. जीएसटी के बारे में जेटली ने कहा कि उनकी विभिन्न राज्य सरकारों के साथ बातचीत चल रही है और ज्यादातर मुद्दों को पहले ही सुलझाया जा चुका है. जेटली ने कहा कि वह जीएसटी पर संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने से पहले इसके मसौदे की जानकारी राज्‍यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति को देंगे.

विभिन्न राज्‍यों में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति न बन पाने की वजह से जीएसटी को लागू करने की समयसीमा कई बार निकल चुकी है. जेटली ने तेजी से निर्णय लेने की जरुरत बताते हुए कहा कि नयी सरकार ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र के विभिन्न वर्गों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को खोला है. वित्त मंत्री ने कहा, सिर्फ किसी क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए खोलना पर्याप्त नहीं है.

सिर्फ यह कहना कि हम लाल कालीन बिछा रहे हैं, काफी नहीं है. प्रणाली निर्णायक होनी चाहिए. ऐसा नहीं हो सकता है कि निवेश आए और कुछ मंजूरियों अथवा किसी कर नीति की वजह से अटका रह जाए. जेटली ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए विनिवेश का लक्ष्य कुछ महत्वाकांक्षी है, लेकिन उन्‍हें उम्मीद है कि सरकार इसके नजदीक पहुंच जाएगी.

उन्‍होंने बताया कि इस बारे में दुनिया के कई हिस्‍सों में रोड शो का आयोजन किया जा रहा है. सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 43,425 करोड रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. मंत्री ने कहा कि उनकी भूमि अधिग्रहण कानून में प्रक्रियागत बदलावों को लेकर विपक्षी दलों के सदस्‍यों के साथ बातचीत चल रही है, जिससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन में विलंब समाप्त किया जा सके. इस मौके पर आर्थिक मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव दिनेश शर्मा व सिटी बैंक के सीईओ प्रमीत झावेरी भी मौजूद थे.

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