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जेपी इंफ्रा ऋण शोधन मामले में बैंकों और मकान खरीदारों ने NBCC की बोली मंजूर की

Updated at : 17 Dec 2019 7:55 PM (IST)
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जेपी इंफ्रा ऋण शोधन मामले में बैंकों और मकान खरीदारों ने NBCC की बोली मंजूर की

नयी दिल्ली : जेपी इंफ्राटेक के वित्तीय कर्जदाताओं ने कर्ज में डूबी रीयल्टी कंपनी को ऋण शोधन प्रक्रिया के तहत खरीदने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीसीसी की बोली को मंजूरी दे दी है. वित्तीय कर्जदाताओं में बैंक तथा मकान खरीदार शामिल हैं. सूत्रों ने कहा कि एनबीसीसी की समाधान योजना को कर्जदाताओं की समिति […]

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नयी दिल्ली : जेपी इंफ्राटेक के वित्तीय कर्जदाताओं ने कर्ज में डूबी रीयल्टी कंपनी को ऋण शोधन प्रक्रिया के तहत खरीदने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीसीसी की बोली को मंजूरी दे दी है. वित्तीय कर्जदाताओं में बैंक तथा मकान खरीदार शामिल हैं. सूत्रों ने कहा कि एनबीसीसी की समाधान योजना को कर्जदाताओं की समिति ने 97.36 फीसदी मतदान से मंजूरी दे दी है. यह जेपी इंफ्राटेक के लिए खरीदार तलाशने को लेकर बोली प्रक्रिया का तीसरा दौर है.

दरअसल, जेपी इंफ्राटेक कंपनी ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) की शुरुआत अगस्त, 2017 में की गयी. मामले के सफल समाधान से 20,000 मकान खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी. ये मकान खरीदार कई साल से जेपी इंफ्राटेक की नोएडा और ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में शुरू की गयी विभिन्न आवासीय परियोजनाओं में फंसे हैं. एनबीसीसी ने इन लंबित परियोजनाओं को अगले साढ़े तीन साल में पूरा करने का प्रस्ताव किया है. दोनों बोलीदाताओं (एनबीसीसी और मुंबई की सुरक्षा रीयल्टी) की बोलियों के लिए मतदान एक साथ हुआ और यह सोमवार की देर रात संपन्न हुआ.

गौरतलब है कि कर्जदाताओं की समिति में 13 बैंक और 23,000 से अधिक मकान खरीदारों के पास मतदान के अधिकार हैं. खरीदारों के पास जहां 58 फीसदी वोट हैं, वहीं संस्थागत कर्जदाताओं के पास 42 फीसदी. बोली की मंजूरी के लिए 66 फीसदी मतदान की जरूरत होती है. सूत्रों के अनुसार, ज्यादातर मकान खरीदार और कर्जदाताओं ने एनबीसीसी के पक्ष में मतदान किये.

जेपी इंफ्राटेक के अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) अनुज जैन ने मकान खरीदारों के 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के दावे तथा बैंकों के करीब 9,800 करोड़ रुपये के दावे को स्वीकार किया है. ताजा बोली में एनबीसीसी ने जमीन अदला-बदली समझौते के तहत 1,526 एकड़ भूमि बैंकों को पेशकश की गयी है.

एनबीसीसी ने यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क संपत्ति बैंकों को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव किया है, लेकिन उससे पहले वह रोड टैक्स रिवेन्यू को लेकर करीब 2,500 करोड़ रुपये कर्ज लेगी, ताकि निर्माण व्यय का वित्त पोषण हो सके. मकान खरीदारों के लिए एनबीसीसी ने साढ़े तीन साल में करीब 20,000 फ्लैट का निर्माण पूरा करने का प्रस्ताव किया है. वहीं, सुरक्षा ने तीन साल का समय दिया था.

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आईडीबीआई बैंक की अगुवाई वाले समूह के आवेदन को स्वीकार करने के बाद संकट में फंसी जय प्रकाश एसोसिएट्स की अनुषंगी जेपी इंफ्राटेक अगस्त 2017 में ऋण शोधन प्रक्रिया में गयी.

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