रुपये में भारी गिरावट से सरकार सतर्क, कई गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर लगा सकती है अंकुश
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Sep 2018 8:02 PM
नयी दिल्ली : डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट के मद्देनजर सरकार जल्द ही कई गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर अंकुश लगाने की घोषणा करेगी. वित्त मंत्रालय एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. उन्होंने इसके साथ ही पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रुपये में आई 10 फीसदी गिरावट को अस्थायी रुख […]
नयी दिल्ली : डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट के मद्देनजर सरकार जल्द ही कई गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर अंकुश लगाने की घोषणा करेगी. वित्त मंत्रालय एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी. उन्होंने इसके साथ ही पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रुपये में आई 10 फीसदी गिरावट को अस्थायी रुख बताया.
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वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव एससी गर्ग ने यहां पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि डॉलर और रुपये की विनिमय दर का हमेशा प्रभाव रहता आया है. पिछले कुछ सप्ताह के दौरान रुपये में 10 फीसदी की जो गिरावट आयी है, वह अस्थायी है.
यह पूछे जाने पर कि सरकार का गैर जरूरी सामान के आयात पर अंकुश लगाने का इरादा कब है जवाब में उन्होंने कहा कि बहुत जल्द. हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई समयसीमा नहीं बतायी. पिछले सप्ताह वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चालू खाते के घाटे (कैड) पर अंकुश तथा रुपये में गिरावट को थामने के लिए विदेशी बाजार से कर्ज जुटाने के नियम सरल किये थे और साथ ही गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर अंकुश लगाने की घोषणा की थी.
देश का चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2017-18 में बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.9 फीसदी हो गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 0.6 फीसदी था. चालू वित्त वर्ष में इसके 2.8 फीसदी रहने का अनुमान है. चालू वित्त वर्ष के पहले पांच माह में व्यापार घाटा बढ़कर 80.4 अरब डॉलर हो गया है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 67.3 अरब डॉलर था. रुपये में इस साल करीब 13 फीसदी की गिरावट आयी है.
गर्ग ने भरोसा जताया कि दबाव के बावजूद राजकोषीय घाटे को बजट अनुमान के लक्ष्य पर रखा जायेगा. उन्होंने कहा कि कैसी भी परिस्थितियां हों राजकोषीय घाटे को 3.3 फीसदी के पार नहीं जाने दिया जायेगा. मुद्रास्फीति पर गर्ग ने कहा कि एक विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए चार प्रतिशत मुद्रास्फीति की दर अच्छी चीज है. यह अर्थव्यवस्था के लिए नुकसान की बात नहीं है.
गर्ग ने कहा कि देश की 50 फीसदी आबादी अभी कृषि पर निर्भर है. ऐसे में, इसमें बदलाव की जरूरत है, जिसके लिए नीतिगत कदम उठाने होंगे. उन्होंने बताया कि सरकार ने कृषि उत्पादों के निर्यात को 30 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए एक कार्यक्रम तैयार किया है.
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