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हाईकोर्ट ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर मालविंदर को 35 लाख सिंगापुरी डॉलर जमा कराने का दिया निर्देश

Updated at : 05 Sep 2018 9:09 PM (IST)
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हाईकोर्ट ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर मालविंदर को 35 लाख सिंगापुरी डॉलर जमा कराने का दिया निर्देश

नयी दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने रैनबैक्सी लैबोरेट्रीज के पूर्व प्रवर्तक मालविंदर सिंह को अदालती आदेश के उल्लंघन के लिए 35 लाख सिंगापुरी डॉलर जमा कराने का निर्देश दिया है. मालविंदर ने यह राशि एक कंपनी में अपने शेयर बेचकर प्राप्त की थी, जो अदालत के आदेश का उल्लंघन है. न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने कहा […]

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नयी दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने रैनबैक्सी लैबोरेट्रीज के पूर्व प्रवर्तक मालविंदर सिंह को अदालती आदेश के उल्लंघन के लिए 35 लाख सिंगापुरी डॉलर जमा कराने का निर्देश दिया है. मालविंदर ने यह राशि एक कंपनी में अपने शेयर बेचकर प्राप्त की थी, जो अदालत के आदेश का उल्लंघन है. न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने कहा कि निश्चित रूप से यह अदालत के पिछले आदेश का उल्लंघन है.

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हाईकोर्ट ने मालविंदर और उनके भाई शिविंदर सिंह को अपनी संपत्तियों की बिक्री नहीं करने का निर्देश दिया था. मालविंदर के अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि रेलिगेयर हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड में उनके 45 लाख इक्विटी शेयर अप्रैल में सिंगापुर में बेचे गये. मालविंदर भी अदालत में मौजूद थे. उन्होंने बताया कि इस शेयर बिक्री से मालविंदर को 35 लाख सिंगापुरी डॉलर मिले. इस राशि का इस्तेमाल मालविंदर और शिविंदर ने सिंगापुर में एक अपार्टमेंट के ईएमआई के भुगतान के लिए किया, जिससे भुगतान में चूक होने से बचा जा सके.

दिल्ली हाईकोर्ट दाइची सान्क्यो की उस याचिका की सुनवाई कर रहा है, जिसमें उसने सिंगापुर न्यायाधिकरण के फैसले के क्रियान्वयन की अपील की है. इस मामले में न्यायाधिकरण ने 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा था. दाइची के वकील ने कहा कि मालविंदर ने अदालत के 19 फरवरी के उस फैसले की अवमानना की है, जिसमें दोनों भाइयों को संपत्तियों की बिक्री नहीं करने का निर्देश दिया गया था.

अदालत ने कहा था कि दोनों भाइयों ने इस मामले के दौरान जिन संपत्तियों का खुलासा किया है, उसकी बिक्री वे नहीं कर सकते. अदालत ने दोनों भाइयों और 12 अन्य पर अपने शेयरों या किसी अन्य चल अचल संपत्ति के स्थानांतरण पर रोक लगायी थी. आदेश के उल्लंघन पर संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश ने कहा कि निश्चित रूप से यह अदालती निर्देशों के उल्लंघन का मामला है.

अदालत ने कहा कि ऐसे में मालविंदर को निर्देश दिया जाता है कि वह शेयरों की बिक्री से हासिल राशि अदालत की रजिस्ट्री के पास जमा करायें. दो घंटे से अधिक समय तक चली सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह राशि चार सप्ताह में जमा करानी होगी. यह सूचित किये जाने पर कि अदालत द्वारा नियुक्त स्थानीय आयुक्त ने सिंह भाइयों के सूचीबद्ध कंपनियों में शेयर बेचे हैं. न्यायाधीश ने कहा कि इस बिक्री से हासिल 9.2 करोड़ रुपये दाइची को जारी किये जायें. हालांकि, अदालत ने दाइची से एक शपथपत्र देने को कहा, जिसमें कहा गया है कि यदि भविष्य में धन को वापस जमा करने को कहा जायेगा तो वह उसका अनुपालन करेगा.

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