120 मिलियन Dollar का घर... 8 साल का विवाद, साइरस पूनावाला से जुड़ा है मसला, पढ़ें पूरी खबर

Published by : Pritish Sahay Updated At : 04 Apr 2023 5:38 PM

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साइरस पूनावाला ने साल 2015 में 120 मिलियन डॉलर की सबसे बड़ी बोली लगाकर लिंकन हाउस खरीदा था. पूनावाला ने अमेरिका के साथ सौदा किया था, जिसमें लीज के अधिकारों का ट्रांसफर भी शामिल था. लेकिन इसे खरीदने के आठ साल बीत जाने के बाद भी पूनावाला परिवार को संपत्ति में दाखिल होने का अधिकार नहीं मिला है.

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सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मालिक साइरस पूनावाला के लिए एक घर गले की फांस बन गया है. पूनावाला ने 120 मिलियन डॉलर की लागत से ‘लिंकन हाउस खरीदा, लेकिन केंद्र सरकार ने कई सालों से लिंकन हाउस की खरीद पर अस्थायी रोक लगा रखी है. इस इमारत तो आज से आठ साल पहले यानी साल 2015 में साइरस पूनावाला ने खरीदा था. दरअसल जिस जमीन पर लिंकन हाउस बना है उस जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है.

गौरतलब है कि वांकानेर के तत्कालीन महाराजा के दो एकड़ में फैले इस बंगले को 1957 में अमेरिका ने लीज पर लेकर अपने वाणिज्य दूतावास का कार्यालय बनाया था. साइरस पूनावाला ने साल 2015 में 120 मिलियन डॉलर की सबसे बड़ी बोली लगाकर इसे खरीदा था. पूनावाला ने अमेरिका के साथ सौदा किया था, जिसमें लीज के अधिकारों का ट्रांसफर भी शामिल था. लेकिन इसे खरीदने के आठ साल बीते जाने के बाद भी पूनावाला परिवार को संपत्ति में दाखिल होने का अधिकार नहीं मिला है.

बता दें, अमेरिकी सरकार ने लिंकन हाउस को 1957 में वांकानेर के अंतिम शासक महाराणा राज श्री प्रताप सिंह जी साहेब झाला राजवंश से 999 साल की लीज पर खरीदा था. अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाद इस इमारत पर बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स बनाया गया. इस बीच अमेरिकी सरकार और पूनावाला के बीच हुए सौदे में पूनावाला ने 120 मिलियन डॉलर देकर इस घर को खरीद लिया. वहीं, इस मामले में पूनावाला का कहना है कि भारत सरकार ने इस मसले को क्यों होल्ड पर रखा है इसको लेकर कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है.

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महाराष्ट्र सरकार और रक्षा मंत्रालय कर रहे हैं दावा: दरअसल, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह जमीन किसकी है यह साफ नहीं हो पाया है. महाराष्ट्र सरकार इसपर अपना दावा कर रही है. वहीं, रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ये जमीन उसके अधीन है. मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि जमीन को लेकर भारत और अमेरिका के बीच भी तनाव हुआ था. 

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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