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पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर संकट में घिरी मोदी सरकार, आम आदमी को जल्द ही मिल सकती है बड़ी राहत

Updated at : 22 May 2018 8:43 PM (IST)
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पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर संकट में घिरी मोदी सरकार, आम आदमी को जल्द ही मिल सकती है बड़ी राहत

नयी दिल्ली : पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार संकट में घिरी हुई नजर आ रही है. इन दोनों पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों के बढ़ने के बाद देश में सियासी पारा गर्म होने के साथ ही आम आदमी ने भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिये हैं. बताया जा रहा है कि आम आदमी […]

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नयी दिल्ली : पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार संकट में घिरी हुई नजर आ रही है. इन दोनों पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों के बढ़ने के बाद देश में सियासी पारा गर्म होने के साथ ही आम आदमी ने भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिये हैं. बताया जा रहा है कि आम आदमी को ईंधनों की बढ़ती कीमतों से राहत पहुंचाने के लिए सरकार इसी सप्ताह कोई कदम उठा सकती है.

इसे भी पढ़ें : पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस का तंज, तत्काल उत्पाद शुल्क घटायें ‘महाराजा मोदी’

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गये हैं. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार इस मामले में केवल उत्पाद शुल्क कटौती पर ही निर्भर नहीं करेगी, बल्कि कुछ और कदम भी उठा सकती है. पेट्रोल-डीजल के दाम में उत्पाद शुल्क का हिस्सा मात्र एक चौथाई ही है. हालांकि, अधिकारी ने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया.

पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ बात कर रहा वित्त मंत्रालय

अधिकारी ने कहा कि ईंधनों के बढ़ते दाम सरकार के लिए संकट वाली स्थिति है. इस मामले में कुछ दूसरे उपायों को भी शामिल करना होगा. वित्त मंत्रालय इस संबंध में पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श कर रहा है. पेट्रोलियम कंपनियों ने पिछले एक सप्ताह के दौरान पेट्रोल-डीजल के दाम में अंतरराष्ट्रीय बाजार के बढ़ते दाम के मुताबिक वृद्धि की है.

नौ दिनों में 2.24 रुपये पेट्रोल और 2.15 रुपये बढ़े डीजल के दाम

पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से दामों में वृद्धि करने से दिल्ली में पेट्रोल 76.87 रुपये और डीजल का दाम 68.08 रुपये लीटर तक पहुंच गया. पिछले नौ दिन में पेट्रोल का दाम 2.24 रुपये और डीजल का दाम 2.15 रुपये लीटर बढ़ गया. इससे पहले, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान 19 दिन तक तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम में रोजाना होने वाला फेरबदल नहीं किया.

कोई भी कदम उठाने से पहले वित्तीय गणित को ध्यान में रखेगी रखेगी सरकार

हालांकि, अधिकारी ने उन कदमों के बारे में बताने से इनकार किया, जिन पर सरकार विचार कर रही है. अधिकारी ने कहा कि सरकार को कोई भी कदम उठाते समय अपने वित्तीय गणित को ध्यान में रखना होगा. बढ़ते तेल मूल्यों की समस्या से निपटने के लिये कुछ कदम इसी सप्ताह उठाये जा सकते हैं.

इतने टैक्सों के बाद तय होता ईंधन का दाम

गौरतलब है कि केंद्र सरकार पेट्रोल पर 19.48 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क लगाती है, जबकि डीजल पर 15.33 रुपये लीटर की दर से उत्पाद शुल्क लगता है. राज्यों में वैट की दर अलग अलग है. उत्पाद शुल्क की दर प्रति लीटर निर्धारित है, लेकिन राज्यों में वैट की दर मूल्यानुसार लगती है. दाम बढ़ने पर वैट प्राप्ति भी बढ़ती है.

दिल्ली में एक महीने में बेतहाशा बढ़ा वैट

दिल्ली में अप्रैल महीने में पेट्रोल पर प्रति लीटर वैट 15.84 रुपये जबकि डीजल पर यह 9.68 रुपये प्रति लीटर था, लेकिन मई महीने में मंगलवार को यह पेट्रोल पर 16.34 रुपये और डीजल पर 10.02 रुपये प्रति लीटर है. सरकार के मुताबिक, उत्पाद शुल्क में प्रत्येक एक रुपये की कटौती से खजाने को 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है.

कच्चे तेल के दाम में कमी के बावजूद नौ बार बढ़ाया गया उत्पाद शुल्क

इससे पहले सरकार ने नवंबर, 2014 से लेकर जनवरी, 2016 के बीच जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम नीचे चल रहे थे और उत्पाद शुल्क में नौ बार वृद्धि की. इस दैरान पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 11.77 रुपये और डीजल में 13.47 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गयी. इससे सरकरी खजाने में 2016- 17 में 2,42,000 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई.

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