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नोटबंदी आैर जीएसटी से दूसरी तिमाही में 6.2% रहेगी जीडीपी, अगले साल 8% की उम्मीद

Updated at : 27 Nov 2017 9:09 PM (IST)
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नोटबंदी आैर जीएसटी से दूसरी तिमाही में 6.2% रहेगी जीडीपी, अगले साल 8% की उम्मीद

नयी दिल्ली : नोटबंदी आैर वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) का अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकरात्मक प्रभाव की वजह से चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 6.2 फीसदी रहने का अनुमान है. हालांकि, जीडीपी की यह वृद्धि पिछली तिमाही की 5.7 फीसदी से सुधरकर बढ़ेगी. वहीं, जीडीपी वृद्धि दर के मामले […]

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नयी दिल्ली : नोटबंदी आैर वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) का अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकरात्मक प्रभाव की वजह से चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 6.2 फीसदी रहने का अनुमान है. हालांकि, जीडीपी की यह वृद्धि पिछली तिमाही की 5.7 फीसदी से सुधरकर बढ़ेगी. वहीं, जीडीपी वृद्धि दर के मामले में यह भी कहा जा रहा है कि यह अगले वित्त वर्ष में सुधरकर 8 फीसदी तक पहुंच सकती है.

इसे भी पढ़ेंः जीडीपी वृद्धि में गिरावट चिंताजनक, देश को चुकानी पड़ी नोटबंदी की भारी कीमत : कौशिक बसु

देश का प्रमुख उद्योग संघ फिक्की ने अनुमान जाहिर किया है कि नोटबंदी और जीएसटी का प्रतिकूल प्रभाव कम होने के चलते भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 6.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है. अप्रैल-जुलाई तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर तीन साल के निचले स्तर 5.7 प्रतिशत पर आ गयी थी. दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) आगामी 30 नवंबर को जारी करेगा.

वहीं, इस मामले में वाॅल स्ट्रीट ब्रोकरेज गोल्डमैन साॅक्स ने अपनी एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि पूंजीकरण की योजना से लंबे समय ठहरी कर्ज की मांग बढ़ेगी और साथ ही निजी निवेश भी आयेगा. इससे अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर आठ फीसदी पर पहुंच जायेगी. गोल्डमैन साॅक्स ने कहा कि सरकार की बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये डालने की योजना और कंपनियों के नतीजों में सुधार से शेयर बाजारों में तेजी आयेगी.

ब्रोकरेज कंपनी का अनुमान है कि अगले साल दिसंबर तक निफ्टी 11,600 अंक के स्तर पर होगा. कंपनी का अनुमान है कि 2018-19 में जीडीपी की वृद्धि दर आठ फीसदी पर पहुंच जायेगी. नोटबंदी और जीएसटी का नकारात्मक प्रभाव इस साल समाप्त हो जायेगी और बैंकों के पुन: पूंजीकरण की योजना से ऋण की मांग बढ़ेगी और साथ ही निजी निवेश भी बढेगा. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अगले वित्त वर्ष में खाद्य और जिंस कीमतों में तेजी की वजह से 5.3 प्रतिशत पर पहुंच जायेगी.

उधर, दूसरी तिमाही के बारे में उद्योग संघ फिक्की ने कहा कि सर्वेक्षण में भाग लेने वाले अर्थशास्त्रियों ने उल्लेख किया है कि सरकार को सामाजिक और भौतिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उत्पादक पूंजी निवेश पर जोर देना चाहिए. इसमें कहा गया है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर सुधरकर 6.2 फीसदी रहने की उम्मीद है और आगे तीसरी तिमाही में जीपीडी दर 6.7 फीसदी होने की संभावना है.

फिक्की ने सर्वेक्षण में कहा कि नोटबंदी और जीएसटी कार्यान्वयन के प्रभाव के चलते अर्थव्यवस्था में आयी सुस्ती खत्म होती हुई प्रतीत हो रही है. नयी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था (जीएसटी) स्थिर हो रही है, जिससे आगे अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिल सकता है. सर्वेक्षण में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति के 2017-18 में करीब 2.8 फीसदी जबकि खुदरा मुद्रास्फीति 3.4 फीसदी रहने की उम्मीद जतायी गयी है.

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