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औद्योगिक उत्पादन घटने और महंगाई के निचले स्तर पर, ब्याज दरों में कटौती की संभावना

Updated at : 12 Sep 2017 10:07 PM (IST)
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औद्योगिक उत्पादन घटने और महंगाई के निचले स्तर पर, ब्याज दरों में कटौती की संभावना

नयी दिल्ली: जुलाई महीने में देश में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) की वृद्धि दर में कमी आयी है और यह 1.2 फीसदी रही है. वहीं, अगस्त महीने की मुद्रास्फीति की दर पांच महीने के उच्चस्तर 3.36 फीसदी पर पहुंच गयी है. इसके बावजूद यह रिजर्व बैंक के 4 से 6 फीसदी के मुद्रास्फीति के लक्ष्य से […]

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नयी दिल्ली: जुलाई महीने में देश में औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) की वृद्धि दर में कमी आयी है और यह 1.2 फीसदी रही है. वहीं, अगस्त महीने की मुद्रास्फीति की दर पांच महीने के उच्चस्तर 3.36 फीसदी पर पहुंच गयी है. इसके बावजूद यह रिजर्व बैंक के 4 से 6 फीसदी के मुद्रास्फीति के लक्ष्य से कम है. ऐसे में इस बात की संभावना बनी है कि रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में कटौती करेगा. विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन की वजह से जुलाई में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 1.2 फीसदी रह गयी.

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केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, फल और सब्जियां महंगी होने की वजह से अगस्त माह में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 3.36 फीसदी पर पहुंच गयी है, जो जुलाई में 2.36 फीसदी पर थी. केंद्रीय बैंक ने पिछले महीने मुद्रास्फीति में नरमी के चलते नीतिगत दरों यानी रेपो दर को चौथाई फीसदी घटाकर 6 फीसदी किया था. रिजर्व बैंक की अगली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बैठक 4 अक्तूबर को होगी.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंतित होने के सवाल पर कहा कि निश्चित रूप से नहीं. वास्तव में मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के 4 से 6 फीसदी के लक्ष्य से कम है. जून महीने में औद्योगिक उत्पादन 0.2 फीसदी घटा था. अप्रैल-जुलाई के दौरान औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 1.7 फीसदी रही है, जो पिछले साल इसी अवधि में 6.5 फीसदी रही थी. सूचकांक में 77.6 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर जुलाई में घटकर 0.1 फीसदी रही, जो 2016 के इसी महीने में 5.3 फीसदी थी.

पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन जुलाई में एक फीसदी घटा, जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 8.8 फीसदी की वृद्धि हुई थी. टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन आलोच्य महीने में 1.3 फीसदी घटा, जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 0.2 फीसदी की मामूली वृद्धि हुई थी. हालांकि, बिजली उत्पादन में जुलाई के दौरान 6.5 फीसदी की वृद्धि हुई, जो 2016 के इसी महीने में 2.1 फीसदी थी. खनिज उत्पादन में भी आलोच्य महीने में 4.8 फीसदी की वृद्धि हुई, जो एक साल पहले जुलाई महीने में 0.9 फीसदी थी. गैर-टिकाऊ उपभोक्ता क्षेत्र में वृद्धि दर जुलाई 2017 में 3.4 फीसदी रही.

विनिर्माण क्षेत्र में कुल 23 औद्योगिक समूह में से आठ में जुलाई 2017 में इससे पूर्व वर्ष के इसी महीने के मुकाबले वृद्धि हुई. उपभोक्ता मूल्यू सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जुलाई में 2.36 फीसदी रही थी. अगस्त महीने का खुदरा मुद्रास्फीति का आंकड़ा मार्च, 2017 के बाद सबसे ऊंचा है. उस समय यह 3.89 फीसदी पर थी.

सरकार की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 1.52 फीसदी पर पहुंच गयी. इससे पहले इसमें अपस्फीति थी. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, माह के दौरान रोजाना उपभोग वाले फल और सब्जियों की महंगाई दर बढ़कर क्रमश: 5.29 फीसदी और 6.16 फीसदी हो गयी. यह जुलाई में क्रमश: 2.83 फीसदी और शून्य से 3.57 फीसदी नीचे थी.

इसी तरह तैयार भोजन, जलपान और मिठाई की श्रेणी में मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 1.96 फीसदी हो गयी, जो जुलाई में 0.43 फीसदी थी. इसी तरह परिवहन और संचार क्षेत्रों में भी महंगाई दर बढ़कर 3.71 फीसदी हो गयी, जो जुलाई में 1.76 फीसदी थी. इसके अलावा, मोटे अनाज और उत्पाद, मीट एवं मछली, तेल एवं वसा की महंगाई दर घटकर क्रमश: 3.87 फीसदी, 2.94 फीसदी और 1.03 फीसदी पर आ गयी.

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