Irrfan khan Death : इरफान हमेशा पूछते थे, हमें कब कास्ट कर रहे हो

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 30 Apr 2020 1:30 AM

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महज 54 साल की उम्र में अभिनेता इरफान खान का निधन हो गया. भले ही वह हमें छोड़कर चले गये, लेकिन फिल्मी दुनिया के आसमान पर हमेशा यह सितारा चमचमाता रहेगा. उन्होंने हॉलीवुड में भी कई शानदार किरदार निभाये, जो हमेशा याद रखें जायेंगे

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पंकज पाठक , रांची : महज 54 साल की उम्र में अभिनेता इरफान खान का निधन हो गया. भले ही वह हमें छोड़कर चले गये, लेकिन फिल्मी दुनिया के आसमान पर हमेशा यह सितारा चमचमाता रहेगा. उन्होंने हॉलीवुड में भी कई शानदार किरदार निभाये, जो हमेशा याद रखें जायेंगे. इस छोटे लेकिन अद्भुत सफर में झारखंड के गुरु का ज्ञान भी इरफान खान के साथ चलता रहा. इरफान को गुरु भाई कहकर संबोधित करने वाले नंदलाल जब भी मिलते थे तो इरफान हमेशा पूछते थे, हमें कब कास्ट कर रहे हो.

इरफान का झारखंडी संस्कृति और लोकगीत से परिचयझारखंड लोक संगीत की पहचान माने जाने वाले पद्मश्री मुकुंद नायक 1985 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा गये थे. यहीं पहली बार इरफान खान से उनकी मुलाकात हुई थी़ यहीं मुकुंद नायक ने इरफान और अन्य छात्रों का परिचय झारखंडी संस्कृति, लोकगायिकी और लाठी के खेल से कराया था. नंदलाल नायक इरफान को इसी रिश्ते से हमेशा गुरु भाई बुलाते थे.किसके निमंत्रण पर हुआ था परिचयउन दिनों को याद करते हुए मुकुंद नायक बताते हैं : उस वक्त एनएसडी के डायरेक्टर डॉ. सुरेश अवस्थी के बुलावे पर गया था. डॉ अवस्थी साल 1985 में फेस्टिवल ऑफ छोटानागपुर के आयोजन में शामिल होने के लिए जमशेदपुर आये थे.

यहां मुलाकात हुई. उन्होंने हमें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा आकर बच्चों को भी लोक संस्कृति का ज्ञान देने का आग्रह किया. गीत से प्रभावित हुए थे इरफान मुकुंद नायक बताते हैं कि हमें वह गीत आज भी याद है, जो हमने गाया था. बोल थे, अंबा मंजरे मधु मातलें रे, तइसने पिया मातल जाए… इस गाने को सुनकर इरफान ने पूछा था कि इसे किसने लिखा है? इस गाने और इसकी धुन से बहुत प्रभावित हुए थे. यहां की संस्कृति और परंपरा वहां लोगों को पसंद आयी. साल 1992 में एनएसडी का वर्कशॉप नेतरहाट में हुआ. एक महीने तक कलाकारों की टोली यहां रही थी. यहीं पर शकुंतला का मंचन हुआ, जिसमें हमने गीत लिखा और पूरा नाटक गीतों के जरिये ही हुआ इरफान के साथी विपिन से यहीं हमारी दोबारा मुलाकात हुई. शकुंतला के मंचन की खूब चर्चा हुई और आज भी एनएसडी में इसे संग्रहित रखा गया है.

हमेशा पूछते थे कब कास्ट करोगे मुझेमुंकुद नायक के बेटे नंदलाल नायक जब भी इरफान से मिलते थे, उन्हें गुरु भाई कहकर संबोधित करते थे. नंदलाल कहते हैं बाबूजी की वजह से मैं उन्हें गुरु भाई कहकर ही संबोधित करता था. इरफान से हुई मुलाकातों को याद करते हुए नंदलाल कहते हैं, गुरुभाई जब भी मिलते, तो पूछते : हमें कब कास्ट कर रहे हो. स्टार ऑफ स्टार्स जब इस तरह बात करता था, तो ऊर्जा मिलती थी. जब इरफान ने फोन कर पूछा था, पान सिंह तोमर देखीपरवेज कुरैशी साल 2007-08 में मैं प्रभात खबर में रंग पेज के लिए काम करता था. अचानक कहीं से मुझे इरफान खान का फोन नंबर मिला, मैंने भी सोचा नहीं और कॉल कर दिया. उनके भाई फिरोज फोन उठाते थे फिर धीरे- धीरे इरफान से भी बात होने लगी.

मैं उन्हें टेलीफोन बूथ से फोन किया करता था. एक दिन इसी बूथ पर इरफान भाई ने कॉल किया़ दुकानदार ने फोन उठाया उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि कोई गली का इरफान नहीं अभिनेता इरफान खान बात कर रहे हैं. उसने मुझे बाद में बताया कि किसी इरफान का फोन आया था. इसी बीच बेहतरीन कलाकार निर्मल पांडे का निधन हुआ. इस पर मैंने एनएसडी के डायरेक्टर अनुराधा कपूर और इरफान खान से बातचीत की और रिपोर्ट बनायी. इरफान से अंतिम बात हुई फिल्म पान सिंह तोमर की रिलीज के वक्त उन्होंने खुद फोन कर पूछा, पान सिंह तोमर कैसा लगा भाई.

मैंने अबतक फिल्म नहीं देखी थी लेकिन जानता था उनकी निभायी भूमिका शानदार होगी. कह दिया, भाई अभी तुरंत देख कर निकल रहा हूं बहुत अच्छा लगा. बाद में मैंने फिल्म देखी, मैंने गलत नहीं कहा था. मैं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा जाना चाहता था. एक बार मैसेज के जवाब में उन्होंने कहा था, मेहनत करो फल जरूर मिलेगा. उनकी तबीतय खराब होने के बाद मैं उनके पीएस सनी शाह से लगातार बातचीत करता रहा. साल 2019 में उनकी पत्नी सूतापा सीकदार से फोन पर बातचीत हुई थी. उन्होंने कहा था, अभी ठीक है बहुत जल्द हम लोग वापस हिंदुस्तान लौटेंगे.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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