बिहार में पहली बार ग्रीन-टेक कॉनक्लेव, किसान सीखेंगे टेक्नोलॉजी बेस्ड खेती में नए प्रयोग

Updated at : 20 Mar 2026 9:32 AM (IST)
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Bihar Government first time Green-Tech Conclave

सांकेतिक तस्वीर

Bihar Government: बिहार में खेती अब हाईटेक बनने वाली है. राज्य में पहली बार ग्रीन-टेक कॉनक्लेव का आयोजन किया जाएगा. तीन दिनों तक पटना के ज्ञान भवन में आयोजित होगा. इसमें किसान टेक्नोलॉजी बेस्ड खेती में नए प्रयोग सीखेंगे.

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Bihar Government: बिहार के किसानों के लिए सरकार की तरफ से खास तैयारी की गई है. राज्य के किसानों को बागवानी और उन्नत खेती से जुड़े नए टेक्नोलॉजी की जानकारी मुहैया कराई जाएगी. खेती में इन दिनों हो रहे इनोवेशन और नए प्रयोगों से किसानों को रूबरू कराने के उदेश्य से बिहार में पहली बार ‘बिहार नर्सरी एवं ग्रीन-टेक कॉनक्लेव-2026’ का आयोजन होने जा रहा है.

21 से 23 मार्च तक होगा आयोजन

जानकारी के मुताबिक, पटना के ज्ञान भवन में 21 से 23 मार्च के बीच यह कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है. कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, नर्सरी के क्षेत्र में मॉडर्न टेक्नोलॉजी अपनाकर अधिक उपज प्राप्त करने से संबंधित कई तरीके किसानों को इस तीन दिवसीय प्रदर्शनी के दौरान बताए जाएंगे. यहां राष्ट्रीय और बिहार पैवेलियन में कृषि को उन्नत बनाने को लेकर हो रहे नए प्रयोगों को बताया जाएगा.

साथ ही इसमें इंटरनेशनल और नेशनल लेवल के 8 संस्थान और बिहार में प्रगतिशील टेक्नोलॉजी के आधार पर खेती करने वाले 12 से अधिक लोग शामिल होंगे. इस कार्यक्रम में चाणक्या हॉर्टि-पिच नाम से एक अलग पैवेलियन होगा, जिसमें कृषि के क्षेत्र में बेहतरीन स्टार्ट-अप करने वालों को मौका दिया जाएगा. इनके उन्नत प्रयोगों से किसानों को खेती और बागवानी में नए प्रयोगों के बारे में जानकारी मिलेगी.

किसानों के मुनाफे पर विचार

मंत्री ने कहा कि बिहार की 76 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है. ऐसे में किसानों की आमदनी को लगातार बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. नई टेक्नोलॉजी की मदद से कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के तरीके किसानों को बताए जाएंगे. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका सपना हर किसी की थाली में बिहार का व्यंजन पहुंचाने का है.

यह सपना पूरा भी हो रहा है, लेकिन अब इससे आगे विदेशों तक बिहार के व्यंजन और कृषि उत्पादों को पहुंचाने की मुहिम में विभाग जुटा है. मुजफ्फरपुर की लीची, भागलपुर का जर्दालू आम, मखाना समेत अन्य कई उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है. इससे इन्हें वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की कवायद शुरू हो गई है. नर्सरी में भी मॉडर्न टेक्नोलॉजी को अपनाकर किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.

लीची की प्रोसेसिंग इकाई लगाने पर हो रहा विचार

मंत्री रामकृपाल यादव ने यह भी कहा कि बिहार में लीची की उन्नत प्रोसेसिंग इकाई लगाने पर विचार हो रहा है. इसे पीपीपी मोड पर लगाया जाएगा, ताकि लीची की पैकेजिंग सही तरीके से हो सके और इसे लंबे समय तक फ्रेश बनाए रखने में मदद मिले. इसकी पैकेजिंग यूनिट लगाने वाली इकाईयों को बिहार इंडस्ट्रियल प्रोमोशन पॉलिसी के तहत उचित सब्सिडी भी दी जाएगी.

वर्तमान टेक्नोलॉजी के आधार पर लीची का सेल्फलाइन 30 दिन तक किया गया है. मेडागास्कर देश ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी का इजात किया है, जिससे लीची की सेल्फलाइफ बढ़कर 45 दिन हो गई है. इस टेक्नोलॉजी को आयात करने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है. ताकि इसे अपनाकर बिहार के किसानों को भी लाभ दिलाई जा सके. ऐसे यहां के वैज्ञानिक भी लगातार इस विषय पर सर्च कर रहे हैं.

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Preeti Dayal

लेखक के बारे में

By Preeti Dayal

डिजिटल जर्नलिज्म में 3 साल का अनुभव. डिजिटल मीडिया से जुड़े टूल्स और टेकनिक को सीखने की लगन है. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं. बिहार की राजनीति और देश-दुनिया की घटनाओं में रुचि रखती हूं.

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