Karakat Vidhan Sabha: भाकपा माले का गढ़ बना काराकाट, भाजपा की नजर पहली जीत पर
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 13 Jul 2025 7:37 PM
Karakat Vidhan Sabha: काराकाट विधानसभा सीट रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल में स्थित है. यह क्षेत्र प्राचीन साम्राज्यों से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक एक्टिव रहा है और आज भी भाकपा माले, राजद और भाजपा के लिए राजनीति का केंद्र बना हुआ है.
Karakat Vidhan Sabha: बिहार के रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल में स्थित काराकट एक ऐसा ब्लॉक है जो अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और भौगोलिक विशेषताओं के कारण विशिष्ट पहचान रखता है. 2011 की जनगणना के अनुसार, काराकाट का क्षेत्रफल 202 वर्ग किमी है, जिसमें 209284 की कुल जनसंख्या दर्ज की गई. जनसंख्या घनत्व 1,036 व्यक्ति/वर्ग किमी था और लिंगानुपात 919 रहा. साक्षरता दर 61.64% रही, जिसमें पुरुष साक्षरता 71.13% और महिला साक्षरता 51.33% थी. क्षेत्र के 143 गांवों में से लगभग एक तिहाई गांवों की आबादी 2000 से कम है.
राजनितिक इतिहास
राजनीतिक दृष्टि से काराकाट विधानसभा सीट की स्थापना 1967 में हुई थी. यह सीट सामान्य श्रेणी के अंतर्गत आती है और काराकट लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. अब तक यहां 14 बार चुनाव हुए हैं, जिनमें भाकपा माले (लिबरेशन) के अरुण सिंह कुशवाहा ने चार बार जीत दर्ज की है. संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, कांग्रेस, जनता दल और जनता पार्टी ने दो-दो बार तथा जदयू और राजद ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
पिछले चुनाव में कैसा रहा था हाल
2020 के विधानसभा चुनाव में अरुण सिंह ने महागठबंधन के तहत भाजपा प्रत्याशी राजेश्वर राज को 18189 वोटों से हराया. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाकपा माले की बढ़त घटकर 6599 वोटों तक सीमित रह गई, जिससे एनडीए को उम्मीद है कि यदि गठबंधन एकजुट रहा, तो वह पहली बार यह सीट जीत सकता है.
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जातीय समीकरण
काराकट की राजनीति में जातीय समीकरण के बात करे तो यहां 17.61% अनुसूचित जाति और 8.6% मुस्लिम मतदाता हैं. यह एक ग्रामीण बहुल क्षेत्र है. यहां केवल 11.13% शहरी मतदाता हैं. 2020 में कुल 3.28 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से 52.28% ने मतदान किया था, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 3.37 लाख हो गई है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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