Coronavirus Effect: खुद डॉक्टर बन 40 दिन में तीन करोड़ की विटामिन, जिंक व इम्यूनिटी बूस्टर गटक गये भागलपुर जिला के लोग
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 01 Jun 2021 8:00 AM
कोरोना की दूसरी लहर से भयभीत जिलावासी खुद चिकित्सक बन गये. कोई गुगल की मदद लेने लगा, तो कोई वाट्सएप ज्ञान के बल स्वस्थ होने की कवायद में जुट गया. नतीजा यह हुआ कि कई लोग जहां अनापशनाप दवा खाने से बीमार होने लगे, तो दवा कंपनियों व दुकानदारों ने इस आपदा को अवसर में बदल कर कमाई शुरू कर दी. प्रभात खबर ने इसकी जब पड़ताल की तो चौंकानेवाले तथ्य मिले. दूसरी लहर के इस 40 दिन में इम्यूनिटी बढ़ानेवाली दवाइयों की बिक्री जिले में बढ़ गयी है. मल्टी विटामिन, जिंक और इम्यूनिटी बढ़ानेवाली दवाओं की लगभग तीन करोड़ रुपये की बिक्री महज 40 दिनों में हुई है. लगभग 30 लाख लोगों ने ये दवाइयां खायी.
कोरोना की दूसरी लहर से भयभीत जिलावासी खुद चिकित्सक बन गये. कोई गुगल की मदद लेने लगा, तो कोई वाट्सएप ज्ञान के बल स्वस्थ होने की कवायद में जुट गया. नतीजा यह हुआ कि कई लोग जहां अनापशनाप दवा खाने से बीमार होने लगे, तो दवा कंपनियों व दुकानदारों ने इस आपदा को अवसर में बदल कर कमाई शुरू कर दी. प्रभात खबर ने इसकी जब पड़ताल की तो चौंकानेवाले तथ्य मिले. दूसरी लहर के इस 40 दिन में इम्यूनिटी बढ़ानेवाली दवाइयों की बिक्री जिले में बढ़ गयी है. मल्टी विटामिन, जिंक और इम्यूनिटी बढ़ानेवाली दवाओं की लगभग तीन करोड़ रुपये की बिक्री महज 40 दिनों में हुई है. लगभग 30 लाख लोगों ने ये दवाइयां खायी.
ड्रग एसोसिएशन की मानें, तो कोरोना के प्रथम लहर में जिले में 10 लाख रुपये से ज्यादा की इस दवा की खपत नहीं होती थी. यह आंकड़ा एलोपैथ का है, जबकि होमियोपैथ दवा की खपत 40 दिन में 25 से 30 प्रतिशत बढ़ गयी. इसी तरह आयुर्वेद की दवा की बिक्री में भी उछाल आया. लगभग 30 लाख का चूर्ण, तुलसी नीर समेत अन्य औषधि का लोगों ने सेवन कर लिया है. इसका कारोबार भी 15 से 20 लाख रुपये तक गया. जानकारों के अनुसार सामान्य दिनों में आयुर्वेद दवा का 10 लाख तक का भी कारोबार नहीं होता था.
जिंक, विटामिन सी, एसीटाइल 600 एमजी, विटामिन डी थ्री, विटामिन कंपलैक्स, एवरमेंटरीन व लिमसी का सेवन 40 दिनों में लोगों ने जम कर किया. यह दवा ताकत व कफ को निकालने की दवा है. महज 40 दिन में तीन करोड़ से ज्यादा की रोग प्रतिरोधक दवा का सेवन लोग कर गये.
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सचिव प्रशांत लाल ठाकुर उर्फ लाल ठाकुर कहते हैं कि कोरोना से पहले दस लाख से ज्यादा की विटामिन और जिंक की दवा की बिक्री नहीं थी. कोरोना काल के 40 दिन में 40 लाख की दवा का सेवन लोगों ने कर लिया. वहीं थोक विक्रेता विनय शंकर ठाकुर कहते हैं कि दो रुपये से 70 रुपये तक की गोली इस कटेगरी में आती है.
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच लोगों का रुझान आयुर्वेद की ओर बढ़ा है. सामान्य दिनों में रोग प्रतिरोधक दवा की बिक्री दो से तीन लाख रुपये की भी नहीं होती थी. महज 40 दिन में 15 से 20 लाख रुपये की आयुर्वेदिक दवाइयां बिक गयीं. आयुर्वेदिक दवा विक्रेताओं की मानें, तो कोविड काल में लोगों को आयुर्वेद की ताकत का पता चला.
आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री में करीब 800 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है. लोग नियमित रूप से आयुष काढ़े का सेवन करते रहे. वहीं गिलोय, तुलसी ड्रॉप, च्यवनप्राश व अश्वगंधा के कैप्सूल का भी सेवन किया. कोविड केयर सेंटर, घंटाघर के मेडिकल ऑफिसर डॉ नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि घर-घर में आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रयोग बढ़ गया है. खासकर अश्वगंधा कैप्सूल, तुलसी ड्रॉप, शुगर फ्री चवनप्राश, आयुष काढ़ा और गिलोय का लोग सेवन कर रहे हैं और साथ ही अपने शरीर की इम्युनिटी पावर को बढ़ा रहे हैं.
डॉ हेमशंकर शर्मा ने कहा की किसी भी दवा का सेवन अधिक करना खतरनाक होता है. आप के शरीर को कितनी मात्रा में दवा चाहिए, इसकी जानकारी आप को होनी चाहिए. यह जानकारी आप अपने डॉक्टर से प्राप्त कर सकते हैं. ऐसे में जिंक और विटामिन की दवा का लगातार सेवन करना हानिकारक हो सकता है. शरीर में ज्यादा विटामिन भी हानि करता है.
डॉ अमित आनंद के अनुसार जिंक का सेवन लिमिट में करना चाहिए. जिंक को एंटी ऑक्सीजन माना जाता है. इसके ज्यादा सेवन से प्रोस्टेट कैंसर भी हो सकता है. जिंक सामान्य रूप में गंध संबंधी परेशानी को दूर करने के लिए किया जाता है. इसके ज्यादा सेवन से खुजली, त्वचा में बर्न हो सकता है. बिना डॉक्टर के सलाह के दवा न लें.
डॉ विनय कुमार झा कहते हैं कि मल्टी विटामिन का साइड इफैक्ट नहीं होता है. विटामिन सी, बी पानी में घुलनेवाली दवा है. यह पेशाब के साथ निकल जाता है. विटामिन ए, के, ई वसा के साथ घुल जाता है. हालांकि इस दवा का ज्यादा प्रयोग नहीं करना चाहिए. डॉक्टर से जरूर राय लें. कैल्शियम ज्यादा लेते हैं तो गैस बनता है.
आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ सीबी सिंह के अनुसार जरूरत से ज्यादा कुछ भी हानिकारक होता है. आयुर्वेदिक दवा को आप प्राकृतिक रूप से लेते हैं, तो यह शरीर के लिए कभी भी हानिकारक नहीं होगा. लेकिन मन में जो आया वह डाल कर पी लेंगे तो यह हानिकारक होगा. हरेक औषधि का अपना गुण होता है. सलाह आयुर्वेद के डॉक्टर से जरूर लें. वरना दिक्कत होगी.
होमियोपैथ चिकित्सक डॉ विनय गुप्ता के अनुसार आर्सेनिक अल्बम 30 व केम्फर रोग प्रतिरोधक दवा है. सांस फूलने को रोकने व ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए एसपीडोस्पर्मा दवा लोग ले रहे थे. आवश्यकता अनुसार एकोनाइट, एंटिमटार्ट, ब्रायोनिया, जेलसिनियम, टेनोसफोरा का भी सेवन कर रहे थे. दरअसल इस दवा का कोई साइड इफैक्ट नहीं है. इसलिए लोगों को इसके प्रति विश्वास कोरोना काल में ओर बढ़ा.
होमियोपैथ चिकित्सक डॉ एसके पंथी ने बताया कि पहले जहां एक माह में इस तरह की दवा की बिक्री एक से डेढ़ लाख रुपये में हुई थी, वहीं यह पांच से छह लाख रुपये से ज्यादा की हुई. होम्योपैथिक दवा के थोक दुकानदार अंकित चुड़ीवाला ने बताया कि शहर में होमियोपैथ की छोटी-बड़ी 25 दुकानें हैं. पहले जहां थोक में एक से डेढ़ लाख रुपये का कारोबार होता था, वहीं 30 फीसदी तक कारोबार बढ़ गया है.
POSTED BY: Thakur Shaktilochan
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