कश्मीर व हिमाचल की तरह बिहार में भी हो रही है सेब की खेती, नारंगी की उपज भी कर रहा यह दियारा

देश में सिल्क के चादर, कतरनी की खुशबू और नवगछिया केले की खेती के लिए भागलपुर जाना जाता है. क्या आपको पता है कि कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की तरह भागलपुर जिले में भी सेब की खेती होने लगी है. हां हम नवगछिया तेतरी के किसान गोपाल सिंह की बात कर रहे है. वह तेतरी में ही पांच एकड़ भूमि में सेब की खेती कर यह साबित कर दिया कि अगर इंसान में काम करने का जुनून है, तो वह कुछ भी कर सकता है. किसान गोपाल सिंह चार साल से सेब की खेती कर रहे हैं. पिछले साल से सेब के पौधे फल देना शुरू कर दिये हैं. यह सेब एचआरएमएस 99 प्रभेद का है और इस प्रभेद की खेती 23 राज्यों में की जा रही है.
ललित किशोर मिश्र, भागलपुर: देश में सिल्क के चादर, कतरनी की खुशबू और नवगछिया केले की खेती के लिए भागलपुर जाना जाता है. क्या आपको पता है कि कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की तरह भागलपुर जिले में भी सेब की खेती होने लगी है. हां हम नवगछिया तेतरी के किसान गोपाल सिंह की बात कर रहे है. वह तेतरी में ही पांच एकड़ भूमि में सेब की खेती कर यह साबित कर दिया कि अगर इंसान में काम करने का जुनून है, तो वह कुछ भी कर सकता है. किसान गोपाल सिंह चार साल से सेब की खेती कर रहे हैं. पिछले साल से सेब के पौधे फल देना शुरू कर दिये हैं. यह सेब एचआरएमएस 99 प्रभेद का है और इस प्रभेद की खेती 23 राज्यों में की जा रही है.
किसान गोपाल सिंह ने सेब की खेती कर कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के वादियों के सेब को चुनौती दी है. तेतरी के पांच एकड़ खेत में सेब की खेती पिछले चार साल से शुरू की. चार साल पहले लगाये सेब के पौधे में पिछले साल से फल आना शुरू हो गया है. पिछले साल एक पेड़ में लगभग 20 किलो फल आया. पिछले साल इन सेब को जिले की मंडी के अलावा सिलीगुड़ी तक भेजा है. फरवरी से पेड़ में फूल के साथ फल आना शुरू हो जायेगा. जुलाई में सेब पूरी तक तैयार हो जायेगा और जुलाई मेंं सेब को तोड़ा जायेगा.
किसान गोपाल सिंह हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के पनियाला गांव से चार साल पहले ट्रायल के तौर पर चार पौधा लाकर उसे लगाया. जब मौसम के अनुरूप पौधे में फल लगना शुरू हुआ, तो उन्होंने वहां से एक हजार पौधे लाकर लगाया. वह कहते हैं कि पांच एकड़ खेत में सेब की खेती कर रहे हैं. चार साल पहले इसे लगाया है. पिछले साल से फल आना शुरू हो गया है. एक पेड़ में लगभग बीस किलो सेब हुआ था. वह कहते हैं कि आठ साल बाद इसी एक पेड़ में एक क्विंटल सेब होगा. अभी जिले के बाजार के अलावा सिलीगुड़ी तक इसे भेजा गया था. वह कहते हैं कि 80 प्रतिशत आर्गेनिक खाद का प्रयोग करते हैं, बीस प्रतिशत दवा का उपयोग पौधे में करते हैं.
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बीएससी ऑनर्स व एलएलबी कर चुके किसान गोपाल सिंह 15 एकड़ भूमि में आठ साल से नारंगी की खेती कर रहे हैं. वह केला, एप्पल बेर व अमरूद की खेती कर रहे हैं.
Posted By: Thakur Shaktilochan
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