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बेतिया राज की करीब 15 सौ एकड़ जमीन गायब, खतियान खोजने यूपी जायेंगे बिहार के अधिकारी

Updated at : 26 Oct 2023 6:41 AM (IST)
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बेतिया राज की करीब 15 सौ एकड़ जमीन गायब, खतियान खोजने यूपी जायेंगे बिहार के अधिकारी

खाली जमीन और मंदिरों की जमीनों को जनहित में विकसित किया जायेगा. वहीं,यूपी के वाराणसी,प्रयाग राज और गोरखपुर जिलों में भी बेतिया राज की जमीन है और अतिक्रमित है. राज्य सरकार राज परिवार की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाने लिए उत्तर प्रदेश सरकार से भी पत्राचार कर रही है.

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पटना. बेतिया राज की अतिक्रमित जमीनों को खोज निकालने के लिए राज्य सरकार ने नये सिरे से प्रयत्न करना शुरू कर दिया है. बेतिया राज की भूमि जिन-जिन जिलों में है, उन जिलों के अपर समाहर्ता को इसके लिए नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. बेतिया राज के अभिलेखों का डिजिटाइलजेशन कराया जायेगा. खाली जमीन और मंदिरों की जमीनों को जनहित में विकसित किया जायेगा. वहीं,यूपी के वाराणसी,प्रयाग राज और गोरखपुर जिलों में भी बेतिया राज की जमीन है और अतिक्रमित है. राज्य सरकार राज परिवार की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाने लिए उत्तर प्रदेश सरकार से भी पत्राचार कर रही है.

बिहार और यूपी में बेतिया राज की 14 हजार एकड़ जमीन

बिहार और यूपी में बेतिया राज की 14 हजार एकड़ जमीन है. इसमें से लगभग आठ हजार एकड़ जमीन का सर्वे हो चुका है. अब भी पांच हजार एकड़ जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त कराया जा रहा है.इसके अतिरिक्त करीब 15 सौ एकड़ जमीन की खोजबीन जारी है. इसमें मुख्य रूप से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, छपरा, पटना, गोपालगंज और सीवान के अलावा यूपी के वाराणसी, प्रयाग राज, गोरखपुर, मिर्जापुर और कुशीनगर में बेतिया राज की संपत्ति है.बिहार और उत्तर प्रदेश में फैली बेतिया राज की जमीन का सर्वे करवाने के लिए दोनों राज्यों में एक साथ अभियान चलाया जायेगा.राजस्व पर्षद के सूत्रों के अनुसार पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सारण और पटना में बेतिया राज की बड़े पैमाने पर अचल संपत्ति है. इसका अधिकतर हिस्सा अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है.अतिक्रमण हटाने के लिए दायर सात हजार से अधिक मामले लंबित हैं.

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बेतिया राज के दस्तावेजों को किया जा रहा है डिजिटलाइजेशन और ऑनलाइन

राजस्व पर्षद ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन करा रहा है. फिलहाल दो करोड़ से अधिक दस्तावेजों की स्कैनिंग हो गयी है. वहीं, लगभग 50 लाख कागजातों की स्कैनिंग की प्रकिया चल रही है. वहीं, बेतिया राज की जमीन के भी सारे दस्तावेजों का डिजिटाइलेजेशन करने के बाद उसे ऑनलाइन किया जायेगा. इस दिशा में काम किया जा रहा है.

अतिक्रमण को लेकर प्रशासन हुआ सख्त

वैसे अब बेतिया राज की जमीन का अतिक्रमण करना आसान नहीं रह गया है. अब यह आसानी से कोई देख व समझ सकता है कि यह जमीन किसी और की नहीं बेतिया राज की है. अतिक्रमण को रोकने के लिए राज प्रबंधन ने नयी पहल करते हुए राज की जमीन के समीप सूचनापट्ट लगा कर प्रवेश को अवैध बताया है तथा उक्त जमीन में प्रवेश करने को दण्डनीय अपराध करार दिया है. सूचना पट के माध्यम से लोगों को आगाह करते हुए चेतावनी दी गई है कि जो लोग राज की जमीन में प्रवेश करेंगे उनपर कार्रवाई तय है. शहर में जहां भी राज की जमीन है तकरीबन सभी जगह यह सूचना पट लगाई गई है जिस पर राज प्रबंधक ने लिखा है यह बेतिया राज की जमीन है, इसमें प्रवेश वर्जित है. हालांकि कुछ जगहों पर अतिक्रमणकारियों के विरोध के कारण यह सूचना पट नहीं लगाया गया.

पालन नहीं करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी

अब देखना होगा की राज प्रबंधन की यह पहल कितना कारगर होता है? इधर राज प्रबंधक ने बताया कि राज की जमीन पर प्रवेश पर रोक लगाई गई है. इसके लिए सूचना पट लगा दिया गया है पालन नहीं करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि बेतिया राज की जमीन अतिक्रमण करने वाले तथा इसकी खरीद बेच करने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

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