बरेली: पुलिस की पिटाई से किसान की मौत, अंतिम संस्कार में भिड़े BJP विधायक और सपा जिलाध्यक्ष, वीडियो हुआ वायरल
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 11 Nov 2023 4:19 PM
बरेली में बीजेपी विधायक और सपा जिलाध्यक्ष आमने सामने आ गए. दोनों के बीच अंतिम संस्कार को लेकर काफी कहासुनी हुई. सपा जिलाध्यक्ष समर्थकों के साथ पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी के बाद अंतिम संस्कार की बात कह रहे थे. उनका कहना था कि पुलिस के बड़े अधिकारी के आने पर ही अंतिम संस्कार होगा.
उत्तर प्रदेश के बरेली के भमोरा थाना क्षेत्र के आलमपुर जाफराबाद गांव निवासी संतोष शर्मा (48 वर्ष) के अंतिम संस्कार में शनिवार को भाजपा के बिथरी चैनपुर विधायक डॉ.राघवेंद्र शर्मा और सपा जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप आमने सामने आ गए. दोनों के बीच अंतिम संस्कार को लेकर काफी कहासुनी हुई. सपा जिलाध्यक्ष और उनके समर्थक आरोपी पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी के बाद अंतिम संस्कार की बात कह रहे थे. उनका कहना था कि पुलिस के बड़े अफसर के आने पर ही अंतिम संस्कार होगा. जिसके चलते भाजपा विधायक ने कड़े शब्दों में अंतिम संस्कार में राजनीति न करने की सलाह दी. इससे बात बिगड़ गई. सपा जिलाध्यक्ष आग बबूला हो गए. यहां मारपीट तक नौबत आ गई. काफी मुश्किल से लोगों ने शांत किया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हालांकि, पुलिस की कड़ी सुरक्षा में अंतिम संस्कार हो गया है. लेकिन, एहतियात के तौर पर गांव में कई थानों का पुलिस बल लगाया गया है. मृतक संतोष का शुक्रवार आधी रात को पोस्टमार्टम हुआ था. इसके बाद शव को शनिवार को गांव में अंतिम संस्कार के लिए लेकर गए. वहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा थे.
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पोस्टमार्टम में मृतक के शरीर पर चोटों के निशान आने की बात सामने आई है. मृतक के परिजनों ने शरीर पर 8 चोटों के निशान का दावा किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कर्मियों ने तब तक पीटा था, जब तक उनकी जिंदगी नहीं चली गई. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मौके से भागे जुआरियों के नाम न बताने पर संतोष को बुरी तरह पीटा गया. जिसके चलते एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने टीम में शामिल सरदार नगर चौकी के दरोगा समेत सात पुलिस कर्मियों को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया. मृतक संतोष के भाई कृष्ण कुमार की तहरीर पर छह पुलिसकर्मी, एक एंबुलेंस चालक को नामजद करते हुए 10 के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है. अस्पताल में संतोष की मौत के बाद पुलिस कर्मियों से ग्रामीणों की नोकझोंक भी हो गई थी.
कृष्ण कुमार का आरोप है कि बुधवार रात करीब साढ़े 9 बजे चौकी पर खड़ी रहने वाली एंबुलेंस के ड्राइवर विजय के साथ सरदार नगर चौकी की पुलिस गांव में पहुंची. बिना वर्दी के तीन लोग टीम के साथ थे. पुलिस वहां जुआ पकड़ने पहुंची थी, लेकिन टीम को देखकर जुआरी भाग गए. आरोप है कि पुलिस ने खेत से लौट रहे संतोष से जुआरियों के नाम पूछे. लेकिन, संतोष ने डर से किसी का नाम बताने से इन्कार कर दिया. इस पर पुलिस टीम ने संतोष को लात-घूंसों और राइफल की बट से बुरी तरह पीटा. शोर सुनकर जब तक परिजन मौके पर पहुंचे, तब तक पुलिसकर्मी भाग खड़े हुए थे. एसपी देहात मुकेश मिश्रा के अनुसार, मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है. जुआ खेलने की सूचना पर पुलिस आलमपुर गई थी. वहां जुआरियों में भगदड़ मच गई. इस दौरान वहां मौजूद संतोष भी मौजूद थे. भगदड़ में वह भी चोटिल हो गए. पुलिसकर्मी अधिकारियों को बिना सूचना दिए जुआ पकड़ने गए थे. एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने शुक्रवार को भमौरा थाना क्षेत्र की सरदार नगर चौकी प्रभारी टिंकू कुमार, हेड कांस्टेबल पुष्पेंद्र राणा, मनोज कुमार, कांस्टेबल अंकित कुमार, दीपक कुमार, सत्यजीत सिंह और कांस्टेबल मोहित कुमार को निलंबित किया है. इससे पुलिस महकमें में हड़कंप मचा है. इसके साथ ही गांव में तनाव के चलते बड़ी संख्या में पुलिस को लगाया गया है.
सपा जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप ने प्रभात खबर को बताया कि वे अंतिम संस्कार में गए थे. उनके परिजन आरोपी पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे. मुझसे उन्होंने अधिकारियों से बात करने को कहा था. इसलिए पुलिस के बड़े अधिकारियों को बुलाकर बात करने की कोशिश की. इसलिए फोन किया था. मगर, भाजपा विधायक पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय राजनीति न करने की बात करने लगे. इसी बात पर मामूली विवाद हो गई थी. मैंने अंतिम संस्कार में कंधा दिया. इसके बाद लौट आया था.
बिथरी विधानसभा से भाजपा विधायक डॉक्टर राघवेंद्र शर्मा ने अंतिम संस्कार में अर्थी को कंधा दिया. उन्होंने प्रभात खबर को बताया कि मृतक मेरे रिश्तेदार थे. आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ धारा 302 में एफआईआर दर्ज कराकर सस्पेंड कराया गया है. रात दो बजे तक पोस्टमार्टम कराया. पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है. आर्थिक सहयोग भी कराया जा रहा है. मगर, सपा जिलध्यक्ष तीन चार लोगों के साथ पहुंचे. वह अंतिम संस्कार नहीं होने दे रहे थे. अपनी राजनीति दिखा रहे थे. उसको लेकर ही राजनीति न करने की सलाह दी थी. मगर, सपाइयों की लाशों पर राजनीति करने की पुरानी आदत है.
रिपोर्ट मुहम्मद साजिद, बरेली
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