Uber ड्राइवर ने Tesla को छोड़ा ऑटो मोड पर, 20 मिनट खुद चलती रही कार, सेफ्टी पर छिड़ी बहस

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सेल्फ-ड्राइविंग Tesla का वायरल वीडियो / फोटो एक्स से

Tesla की Full Self-Driving टेक्नोलॉजी वाला एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें Uber ड्राइवर सफर के दौरान सोता दिखा जबकि कार हाईवे पर खुद चलती रही. घटना ने सुरक्षा पर नयी बहस छेड़ दी है.

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सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी को लेकर दुनिया भर में बहस लगातार तेज हो रही है. इसी बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने लोगों को हैरान भी किया और डरा भी दिया. अमेरिका में एक Uber यात्री ने दावा किया कि उसका Tesla ड्राइवर पूरे सफर के दौरान लगभग सोया रहा, जबकि कार खुद हाईवे पर चलती रही. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोग दो हिस्सों में बंट गए. कुछ ने Tesla की तकनीक की तारीफ की, तो कई लोगों ने इसे बेहद खतरनाक बताया.

20 मिनट तक खुद चलती रही Tesla

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Uber यात्री ने लगभग 20 मिनट लंबे हाईवे सफर का वीडियो रिकॉर्ड किया. इसमें ड्राइवर सीट पर बैठा व्यक्ति आंखें बंद किए दिखाई देता है, जबकि Tesla की Full Self-Driving (FSD) प्रणाली गाड़ी को कंट्रोल कर रही थी.

वीडियो में कार लेन बदलते, सही एग्जिट लेते और ट्रैफिक के बीच सामान्य तरीके से चलती नजर आई. यात्री ने दावा किया कि ड्राइवर सफर के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में सोया हुआ था.

सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर यह क्लिप तेजी से वायरल हो गई और लोगों ने इसे भविष्य की झलक भी कहा.

Tesla की तकनीक पर फिर छिड़ी बहस

इस घटना के बाद इंटरनेट पर बहस शुरू हो गई कि क्या Tesla की सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक अब इंसानों से ज्यादा भरोसेमंद होती जा रही है. कई यूजर्स ने कहा कि अगर कार बिना किसी दिक्कत के सफर पूरा कर सकती है, तो भविष्य में पूरी तरह ऑटोनॉमस वाहन आम हो सकते हैं.

वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी उठे. लोगों ने कहा कि अगर अचानक कोई इमरजेंसी आ जाती, तो सोया हुआ ड्राइवर समय पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाता.

कुछ यूजर्स ने यह भी लिखा कि ड्राइवर को खराब रेटिंग मिलनी चाहिए क्योंकि Tesla अभी पूरी तरह ड्राइवरलेस सिस्टम नहीं है.

ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम ने क्यों नहीं रोका?

Tesla की Full Self-Driving प्रणाली में ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम दिया जाता है, जो लगातार ध्यान भटकने पर अलर्ट भेजता है. आमतौर पर सिस्टम 15 से 30 सेकंड के भीतर चेतावनी देता है.

इसी वजह से कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर इस मामले में सिस्टम ने ड्राइवर को जगाया क्यों नहीं. कुछ Tesla मालिकों का मानना है कि सनग्लासेस या कैमरा एंगल की वजह से सिस्टम ड्राइवर की स्थिति पहचान नहीं पाया होगा.

हालांकि कुछ लोगों ने वीडियो को स्टेज्ड होने की आशंका भी जताई है. Tesla की आधिकारिक गाइडलाइन साफ कहती है कि FSD फीचर के बावजूद ड्राइवर को हर समय सतर्क रहना जरूरी है.

कानून और सुरक्षा पर बढ़ सकता है दबाव

अमेरिका के कई राज्यों में वाहन चलाते समय सोना गैरकानूनी माना जाता है, चाहे कार में सेल्फ-ड्राइविंग फीचर ही क्यों न हो. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं भविष्य में ऑटोनॉमस ड्राइविंग नियमों को और सख्त बना सकती हैं.

Tesla पहले भी कई बार अपनी ऑटोपायलट और FSD तकनीक को लेकर जांच का सामना कर चुकी है. अब यह नया मामला फिर से यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या मौजूदा टेक्नोलॉजी पूरी तरह सुरक्षित है या अभी भी इंसानी निगरानी सबसे जरूरी हिस्सा बनी हुई है.

AI और ऑटोनॉमस कारों का बदलता भविष्य

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तेजी से AI आधारित ड्राइविंग सिस्टम की तरफ बढ़ रही है. Tesla, Mercedes, Waymo और कई दूसरी कंपनियां ड्राइवरलेस टेक्नोलॉजी पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं.

लेकिन इस वायरल वीडियो ने साफ कर दिया है कि टेक्नोलॉजी कितनी भी एडवांस क्यों न हो, लोगों का भरोसा जीतना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

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