AI और 5G से बदल जाएगी ऑटो इंडस्ट्री; Google, Tesla और Xiaomi क्यों बदल रहे कारों का भविष्य?

EV से लेकर सेल्फ ड्राइविंग तक, टेक्नोलॉजी बदल रही ऑटो इंडस्ट्री / / सिम्बॉलिक पिक एआई से बनी
इलेक्ट्रिक कार, AI, 5G और कनेक्टेड टेक्नोलॉजी ऑटो सेक्टर को तेजी से बदल रही हैं. आने वाले वर्षों में कारें सिर्फ वाहन नहीं बल्कि स्मार्ट डिजिटल प्लैटफॉर्म बन सकती हैं.
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री अब सिर्फ इंजन, गियरबॉक्स और मेटल बॉडी तक सीमित नहीं रही. कारें तेजी से कंप्यूटर ऑन व्हील्स में बदल रही हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G, क्लाउड, कनेक्टेड टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर सबसे बड़ा रोल निभा रहे हैं. दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां अब कार कंपनियों के साथ मिलकर भविष्य की ऐसी गाड़ियां तैयार कर रही हैं, जो खुद अपडेट होंगी, ड्राइवर की आदतें समझेंगी और आने वाले समय में बिना ड्राइवर के भी चल सकेंगी. यही वजह है कि अब ऑटो और टेक सेक्टर के बीच की दूरी तेजी से खत्म होती दिख रही है.
बदल रही है ऑटो इंडस्ट्री की पूरी तस्वीर
एक समय था जब कार कंपनियों की पहचान सिर्फ उनके इंजन और डिजाइन से होती थी, लेकिन अब मुकाबला सॉफ्टवेयर, कनेक्टिविटी और डिजिटल एक्सपीरियंस पर आ गया है. इलेक्ट्रिक व्हीकल, कनेकेड कार, ऑटोनॉमस ड्राइविंग और शेयर मोबिलिटी जैसे ट्रेंड्स पूरी इंडस्ट्री को बदल रहे हैं. एक्सपर्ट्स इसे CASE यानी Connected, Autonomous, Shared और Electric ट्रांसफॉर्मेशन कहते हैं.
आज कई कार कंपनियां माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एनवीडिया, क्वालकॉम और एरिक्सन जैसी टेक कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं. MG Hector जैसी गाड़ियों में इंटरनेट बेस्ड फीचर्स, AI सपोर्ट और क्लाउड कनेक्टिविटी पहले ही देखने को मिल चुकी है. वहीं टाटा मोटर्स अपने कनेक्टेड व्हीकल्स में क्लाउड और AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है.
5G और AI बदल देंगे ड्राइविंग का अनुभव
आने वाले वर्षों में 5G इंटरनेट कारों को पूरी तरह बदल सकता है. हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की मदद से गाड़ियां रियल टाइम डेटा शेयर करेंगी, लाइव ट्रैफिक अपडेट लेंगी और कई काम खुद कर पाएंगी. ऑटोनॉमस ड्राइविंग टेक्नोलॉजी में भी 5G का बड़ा रोल माना जा रहा है.
कई कंपनियां पहले ही स्मार्ट फैक्ट्री और ऑटोमेटेड व्हीकल्स पर काम कर रही हैं. उदाहरण के तौर पर Volvo और Ericsson ने 5G सपोर्टेड सिस्टम पर टेस्टिंग की है, जिसमें गाड़ियों को लगातार लाइव मैप डेटा मिलता रहा. इससे भविष्य में सेल्फ-ड्राइविंग कारों की सटीकता और सुरक्षा बेहतर हो सकती है.
कार कंपनियों को अब टेक कंपनी की तरह सोचना होगा
ऑटो सेक्टर के एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिर्फ सॉफ्टवेयर इंजीनियर हायर करने से काम नहीं चलेगा. कार कंपनियों को पूरी सोच बदलनी होगी. आने वाले समय में कार की वैल्यू सिर्फ उसके हार्डवेयर से तय नहीं होगी, बल्कि उसमें मिलने वाले सॉफ्टवेयर और डिजिटल सर्विसेज ज्यादा अहम होंगी.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भविष्य में कारों में हार्डवेयर का हिस्सा घटकर लगभग 40 फीसदी रह सकता है, जबकि सॉफ्टवेयर और कंटेंट की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ेगी. यानी कार खरीदने वाले ग्राहक अब सिर्फ माइलेज या इंजन नहीं, बल्कि स्मार्ट फीचर्स, OTA अपडेट, ऐप कंट्रोल और AI बेस्ड सिस्टम भी देखेंगे.
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और टेक कंपनियों की बढ़ती साझेदारी
Tesla ने दुनिया को दिखाया कि टेक और ऑटो का कॉम्बिनेशन कितना बड़ा बदलाव ला सकता है. अब Xiaomi, Sony और Apple जैसी कंपनियां भी EV सेगमेंट में दिलचस्पी दिखा रही हैं. भारत में भी Ather, Ola Electric और कई स्टार्टअप्स टेक्नोलॉजी बेस्ड मोबिलिटी पर फोकस कर रहे हैं.
हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़े स्तर पर कार मैन्युफैक्चरिंग आसान काम नहीं है. टेक कंपनियों के पास सॉफ्टवेयर और प्रोसेसिंग पावर की ताकत है, लेकिन बड़े पैमाने पर भरोसेमंद वाहन बनाना अब भी बड़ी चुनौती माना जाता है.
भविष्य में कार नहीं, मोबिलिटी सर्विस खरीदेंगे लोग
ऑटो इंडस्ट्री तेजी से कार ऐज अ सर्विस मॉडल की तरफ बढ़ रही है. यानी आने वाले समय में लोग गाड़ी खरीदने के बजाय जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद कर सकते हैं. कारें स्मार्ट डिवाइस की तरह काम करेंगी, जहां एंटरटेनमेंट, सब्सक्रिप्शन सर्विस, ऐप बेस्ड फीचर्स और डेटा सर्विस नई कमाई का जरिया बनेंगी.
इसके साथ साइबर सिक्योरिटी, डेटा प्राइवेसी और नेटवर्क सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है. क्योंकि जितनी ज्यादा कारें इंटरनेट से जुड़ेंगी, उतना ही ज्यादा डेटा और सिक्योरिटी का जोखिम बढ़ेगा.
भारत में क्यों अहम है यह बदलाव?
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटो मार्केट्स में शामिल है और यहां टेक्नोलॉजी तेजी से अपनाई जा रही है. कनेक्टेड कार, ADAS, ऐप कंट्रोल और EV फीचर्स अब प्रीमियम सेगमेंट से निकलकर आम ग्राहकों तक पहुंचने लगे हैं. आने वाले दशक में भारतीय सड़कों पर ऐसी गाड़ियां दिखाई दे सकती हैं, जो लगातार इंटरनेट से जुड़ी रहेंगी, खुद अपडेट होंगी और ड्राइविंग एक्सपीरियंस को पूरी तरह बदल देंगी.
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By Rajeev Kumar
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