45 की उम्र में पुणे की ये महिला 55.13 घंटे में साइकिल चलाकर लेह से पहुंचीं मनाली, बन गया रिकॉर्ड

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 30 Nov 2023 10:25 AM

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महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली प्रीति मस्के एनीमिया यानी रक्ताल्पता और हार्मोनल इमबैलेंस से ग्रस्त थीं. कमजोरी की वजह से उनका स्टैमिना खत्म हो चुका था. रसोई में पैदल चलने पर सांसें फुलने लगती थीं. रात में सोना उनके लिए मुश्किल था. ऐसे में वह अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहने लगीं.

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Success Story : कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो उम्र कोई मायने नहीं रखता. जज्बे के आगे उम्र भी छोटी पड़ जाती है. महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली प्रीति मस्के ने भी 40 की उम्र के बाद भी कुछ ऐसा किया कि आज उनके नाम पर कई रिकॉर्ड कायम हो गए. दो बच्चों की मां होने के बावजूद उन्होंने साइकिल चलाकर कई रिकॉर्ड बनाए हैं. इन रिकॉर्ड्स के पीछे उनकी बीमारी की भी बहुत बड़ी भूमिका है. अभी हाल ही में प्रीति मस्के 45 साल की उम्र में 55 घंटे और 13 मिनट में साइकिल चलाकर लेह से मनाली पहुंच गईं. इस समय वह देश-दुनिया में साइकिल चलाने वाले और नहीं चलाने वाले लोगों की रोल मॉडल बन गई हैं. आइए, उनकी इस सफलता के पीछे की असली कहानी जानते हैं.

एनीमिया और हार्मोनल इमबैलेंस ने दिखाया रास्ता

मीडिया की रिपोर्ट्स की मानें, तो महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली प्रीति मस्के एनीमिया यानी रक्ताल्पता और हार्मोनल इमबैलेंस से ग्रस्त थीं. कमजोरी की वजह से उनका स्टैमिना खत्म हो चुका था. रसोई में पैदल चलने पर सांसें फुलने लगती थीं. रात में सोना उनके लिए मुश्किल था. ऐसे में वह अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहने लगीं. बीमारी से परेशान प्रीति मस्के करीब 40 साल की उम्र में साइकिल चलाना शुरू कर दिया. जिस समय उन्होंने यह काम शुरू किया, उस समय वे एनीमिया, हार्मोनल इमबैलेंस और पीसीओएस जैसी कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही थीं. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने 55 घंटे और 13 मिनट तक साइकिल चलाकर लेह से मनाली पहुंचने वाली पहली महिला बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कायम किया.

एंड्यूरो बाधा दौड़ में दूसरे स्थान पर रहीं प्रीति

इतना ही नहीं, मीडिया की रिपोर्ट्स की मानें, तो प्रीति मस्के स्कूल में राष्ट्रीय स्तर की हॉकी और बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उन्‍होंने खेलना बंद कर दिया. वर्ष 2017 में अपने बेटे के स्कूल में माता-पिता की दौड़ में प्रीति प्रतिभागी बनीं. उनके कोच ने उन्‍हें एंड्यूरो बाधा दौड़ के बारे में बताया. इसमें साइकिल चलाना, तैराकी और दौड़ना शामिल है. उन्‍होंने कोच से पूछा कि क्या उन्‍हें लगता है कि वह इस उम्र में ये काम कर सकती हैं. इसका जवाब कोच ने उत्साहित किया. हालांकि, इसके लिए प्रीति ने ज्‍यादा अभ्यास नहीं किया, लेकिन वह दौड़ में दूसरे स्थान पर रहीं. इसके बाद उन्‍होंने साइकिल चलाना और दौड़ना जारी रखा.

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2019 में प्रीति ने साइक्लिंग में बनाया ग्रुप वर्ल्ड रिकॉर्ड

लेह से मनाली तक साइकिल चलाकर रिकॉर्ड बनाने के अलावा प्रीति मस्के चार फुल मैराथन, 30 हाफ मैराथन और दो अल्ट्रा में दौड़ चुकी हैं. उन्होंने दिसंबर 2019 में कश्मीर से कन्याकुमारी तक 3,773 किमी की दूरी 17 दिन, 17 घंटे में सबसे तेजी से साइकिल चलाकर पूरी करने का ग्रुप वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया.

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2021 में स्वर्णिम चतुर्भुज पर साइकिल चलाकर बनाया रिकॉर्ड

रिपोर्ट में कहा गया है कि दौड़ने और साइकिल चलाने के बाद प्रीति मस्के के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा. अच्छा महसूस होने के साथ ही उन्होंने लंबी राइड्स की तैयारी कर दीं. वर्ष 2021 में स्वर्णिम चतुर्भुज पर साइकिल राइड पूरी करने के बाद वे नई चुनौतियों की तलाश में जुट गईं. लेह से मनाली तक अल्ट्रा-साइकिलिंग रिकॉर्ड की संभावना के बारे में उन्‍होंने अपने एक दोस्त से सुना था. वह जानती थीं कि यह आसान नहीं होगा. उन्‍होंने उसी के हिसाब से ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया. लेह से मनाली की रेस चुनौती भरी थी. भारी बर्फबारी, तेज हवा और कम ऑक्सीजन की वजह से उन्हें कई प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ा.

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2022 में गुजरात से अरुणाचल तक साइकिल चलाकर बनाया रिकॉर्ड

इसके बाद उन्होंने 22 नवंबर 2022 में पुणे की 45 वर्षीय एकल साइक्लिंग उत्साही प्रीति मस्के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया. उन्होंने भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात से पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश तक का सफर साइकिल से 13 दिन, 19 घंटे और 12 मिनट में पूरी की. इस दौरान उन्होंने गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम होते हुए अरुणाचल प्रदेश पहुंचने में कामयाबी हासिल की.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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