चंद्रयान-3 : केरल के लैटिन चर्च ने भारत की अंतरिक्ष गाथा में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 25 Aug 2023 4:33 AM

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जब भारत ने चंद्रमा मिशन या मंगल अभियान के बारे में सपना देखना शुरू किया था और देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम प्रारंभिक अवस्था में था, तब इस लैटिन चर्च ने थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्च स्टेशन की पहली इकाई स्थापित करने के लिए अपना चर्च और निकटवर्ती बिशप हाउस पूरे दिल से वैज्ञानिकों के हवाले कर दिया था.

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St Mary Magdalene church in Thumba plays key role India’s space Saga : भारत के चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ की ऐतिहासिक सफलता पर एक ओर जहां पूरा देश जश्न में डूबा है, तो वहीं केरल में स्थित कैथोलिक संप्रदाय के एक प्रमुख गिरजाघर ‘लैटिन चर्च’ के लिए यह कुछ विशेष तौर पर खुशी का अवसर है क्योंकि इसने भारत की अंतरिक्ष गाथा में एक अनूठी भूमिका निभाई है.

थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्च स्टेशन की पहली इकाई यहां स्थापित हुई

बहुत पहले जब भारत ने चंद्रमा मिशन या मंगल अभियान के बारे में सपना देखना शुरू किया था और देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम प्रारंभिक अवस्था में था, तब इसी लैटिन चर्च ने यहां थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्च स्टेशन (टीईआरएलएस) की पहली इकाई स्थापित करने के लिए अपना चर्च और निकटवर्ती बिशप हाउस पूरे दिल से वैज्ञानिकों के हवाले कर दिया था. बाद में, टीईआरएलएस का नाम बदलकर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र कर दिया गया.

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देश के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता

चंद्र मिशन की शानदार सफलता पर गिरजाघर की खुशी और उत्साह प्रदर्शित करते हुए लैटिन आर्चडायोसिस विकर जनरल फादर यूजीन एच. परेरा ने कहा कि चर्च और इसके श्रद्धालुओं ने हमेशा देश के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता दी है.

इसरो की उपलब्धि से बहुत खुश और गौरवान्वित

उन्होंने कहा- हम, चर्च और यहां के तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरा समुदाय भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की उपलब्धि से बहुत खुश और गौरवान्वित हैं. परेरा ने कहा कि उन्हें यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि तिरुवनंतपुरम के महाधर्मप्रांत और यहां के बाहरी इलाके में स्थित मछली पकड़ने वाली बस्ती थुम्बा में सेंट मैरी मैग्डलीन चर्च ने देश के अंतरिक्ष मिशन के सपनों को पंख देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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पृथ्वी के चुंबकीय भूमध्य रेखा से करीबी ने क्षेत्र को बनाया रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन स्थापित करने के लिए आदर्श

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने 1960 के दशक के दौरान, मैग्डलीन चर्च स्थल को पृथ्वी के चुंबकीय भूमध्य रेखा के करीब होने के कारण रॉकेट प्रक्षेपण स्टेशन स्थापित करने के लिए आदर्श पाया था. इससे पहले थुम्बा के सैंकड़ों मछुआरा परिवार प्रार्थना के लिए यहां आते थे.

विक्रम साराभाई ने देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए मांगा चर्च भवन और जमीन

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक विक्रम साराभाई ने तत्कालीन लैटिन चर्च के बिशप रेवरेंड पीटर बर्नार्ड परेरा से मुलाकात की थी और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए चर्च भवन और आस-पास के क्षेत्रों को सौंपने में समर्थन का अनुरोध किया था. बिशप ने न केवल चर्च को सौंपने के लिए तत्परता से सहमति जताई बल्कि थुम्बा में मछुआरा समुदाय से संबंधित लोगों से बात करने और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान के महत्व के बारे में समझाने के लिए भी तैयार हो गए.

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आस्था और विज्ञान को एक साथ लाने की एक दुर्लभ घटना

विकर जनरल ने कहा, बिशप ने साराभाई और हमारे प्रिय वैज्ञानिक व पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की उपस्थिति में श्रद्धालुओं से बात की और उन्हें चर्च की जमीन को खाली करने की आवश्यकता के बारे में बताया. चर्च में एकत्र हुए सभी श्रद्धालुओं ने उनके सुझाव पर सहमति व्यक्त की. उन्होंने कहा कि यह घटना देश के इतिहास में आस्था और विज्ञान को एक साथ लाने की एक दुर्लभ घटना बन गई.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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