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Explainer : सड़क पर बनी सफेद-पीली लाइन का मतलब जानते हैं आप? जानने के लिए देखें PHOTO

Updated at : 29 Jul 2023 5:18 PM (IST)
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Explainer : सड़क पर बनी सफेद-पीली लाइन का मतलब जानते हैं आप? जानने के लिए देखें PHOTO

Road Safety : सड़क पर बनाई गई पीली लाइनें कई प्रकार की होती हैं. हमें उनका मतलब समझने की जरूरत है. अब अगर सड़क के बीचोंबीच अगर पीली लाइन खींची गई है, तो इसका मतलब यह है कि यह पीली लाइन सड़क को दो भागों में विभाजित करती है और एक प्रकार से यह डिवाइडर का काम करती है.

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रांची : हम-आप रोजाना सड़कों पर सफर करते हैं और कहीं भी आने-जाने के लिए गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं. सफर करने के दौरान हमारी-आपकी नजर सड़क पर बनी सफेद-पीली लाइन पर भी पड़ती है, लेकिन हम उन्हें देखकर नजरअंदाज कर देते हैं. इसके साथ ही, सड़कों पर सफेद-पीली लाइनों के अलावा कई प्रकार के साइन भी लगे रहते हैं, जिनके बारे में हम कभी जानने की कोशिश नहीं करते. अब हम आपको बता देते हैं कि सड़क पर सफेद-पीली लाइन या साइन वाले बोर्ड यूं ही नहीं बनाए या लगाए जाते हैं, बल्कि यह सड़क पर गाड़ी चलाने वालों को मार्गदर्शन के लिए बनाए जाते हैं. अब अगर आप इनका मतलब नहीं समझते हैं, तो इन्हें समझ लेना बेहद जरूरी है. इन्हें समझ लेने के बाद आपको सड़कों पर गाड़ी चलाने या पैदल चलने में काफी सहूलियत होगी. आइए जानते हैं…

सड़क पर बनी पीली/सफेद लाइन का क्या है मतलब
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दिल्ली यातायात पुलिस के अनुसार, सड़क पर बनाई गई पीली लाइनें कई प्रकार की होती हैं. हमें उनका मतलब समझने की जरूरत है. अब अगर सड़क के बीचोंबीच अगर पीली लाइन खींची गई है, तो इसका मतलब यह है कि यह पीली लाइन सड़क को दो भागों में विभाजित करती है और एक प्रकार से यह डिवाइडर का काम करती है. यह पीली लाइन यह बताती है कि पीली लाइन की बाईं तरफ से गुजरने वाली गाड़ी के विपरीत दाईं ओर की गाड़ियों गुजरेंगी.

कटी हुई सफेद मध्य रेखा
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रोजाना सड़कों पर आवागमन के दौरान हमें सड़कों पर सफेद कटी हुई लाइन नजर आती है, जिसे हम देखते हैं और नजरअंदाज कर देते हैं. ये लाइन रास्तों को दो भागों में बांटती है. इसके साथ ही, ये हमें यह बताती है कि अगर आप इस सड़क पर अपनी गाड़ी चला रहे हैं, तो सामने का रास्ता पूरी तरह से साफ होने पर ही उस सड़क पर आप ओवरटेक करने का प्रयास कर सकते हैं.

गतिरोधक चिह्न
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आपने सड़कों पर गतिसीमा का साइन बोर्ड और सफेद लाइन को भी देखा होगा. बता दें कि ये लाइन हमें ये बात बताती है कि ये स्थान घनी आबादी वाला क्षेत्र है. इस स्थान पर आप गाड़ी सही तरीके से धीमी रफ्तार में चलाएं. कई जगहों पर साइन बोर्ड लगा हुआ होता है, जिसमें गतिसीमा भी लिखी होती है कि आप इस सड़क पर 30 या 40 की स्पीड से अधिक की गति में गाड़ी को ना चलाएं. ज्यादातर ये साइन बोर्ड स्कूल, कॉलेज, दफ्तर, अस्पताल तथा घनी आबादी वाले इलाकों में लगे मिलते हैं.

छोटी-छोटी खंडित सफेद रेखाएं
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सड़क की लेन को विभाजित करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. सारे वाहनों को इस लेन के बीच में चलना चाहिए. यातायात नियमों के अनुसार, आप जब सड़क पर अपनी गाड़ी को लेकर उतरते हैं, तो आपको ध्यान देना चाहिए कि आप अपनी यात्रा के दौरान किस प्रकार के वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं. यदि आप बस, ट्रक या भारी वाहन चला रहे हैं, तो आप सड़क की बाई ओर गाड़ी को चलाएं. इसके अलावा, बीच वाली लेन कार, स्कूटर और मोटरसाइकिल के लिए होती है. इसके अलावा, सबसे दाहिनी लेन ओवरटेक, बाएं मुड़ने और आपातकालीन गाड़ियों के लिए होती है.

पार्किंग प्रतिबंधित रेखाएं
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रास्तों में हम कई बार देखते हैं कि सफेद या पीली रेखा लगातार सीधी बनी होती है. ये रेखा बताती है कि आप उन रास्तों में अपनी गाड़ी को पार्क नहीं कर सकते और ना ही रोक सकते हैं. तेज रफ्तार वाहनों के चलते नियमों का उल्लंघन करते हुए यदि आप उन स्थानों पर अपनी गाड़ी को रोकते या पार्क करते हैं, तो दुर्घटना के घटने की संभावना बढ़ जाती है. कई जगहों पर पीली या सफेद लाइन कटी हुई होती है. उन जगहों पर आप अपने वाहनों को रोक सकते हैं, लेकिन पार्क नहीं कर सकते.

स्टॉप लाइन
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आपने चौराहों पर देखा होगा कि ट्रैफिक लाइट के नजदीक सफेद रंग की लाइनें बनी होती हैं. ये लाइनें हमें बताती है कि यदि ट्रैफिक लाइट लाल है, तो हमें उस सफेद लाइन के आगे रुकना है, ताकि पैदल यात्री रास्ते के उस पार जा सकें. कई लोग इस प्रकार के ट्रैफिक नियमों का आए दिन उल्लंघन करते हैं. अब तो हर जगह पर इसके लिए पीली मोटी लाइन बना दी गई है. इसके साथ ही, उस पर स्टॉप भी लिख दिया गया है, ताकि लोग उस लाइन से आगे अपनी गाड़ी को ना रोकें. हमें इन सारे निर्देशों का पालन करना चाहिए.

जेब्रा क्रॉसिंग
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ये सफेद रेखाएं दो से पांच मीटर लंबी और 50 सेंटीमीटर चौड़ी होती है. ये सड़क के बीचोंबीच बनी होती हैं. ये रेखाएं आपको कई दफा चौराहों पर भी नजर आ जाएंगे. ये रेखाएं पैदल यात्रियों के लिए बनाई जाती हैं, ताकि वे इन रेखाओं का प्रयोग कर के सड़क के उस पार जा सकें. पैदाल यात्रियों को सड़क पार करने के लिए इन्हीं मार्ग का प्रयोग करना चाहिए.

बॉक्स जंक्शन
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ये पीले रंग की आड़ी-तिरछी बनी रेखाएं देखने में बॉक्स के जैसा दिखती है. इन रेखाओं में वाहनों को रुकने की बिल्कुल भी अनुमति नहीं होती. साथ ही, इन रेखाओं में तभी प्रवेश करें, जब आपको ओवरटेक करना होता है. लेकिन, ध्यान रखें कि यदि आपको सामने से पास लेने या सामने की सड़क खाली नजर नहीं आ रही है, तो गलती से भी उन सड़कों पर गाड़ी ना चलाएं. इन रेखाओं पर वाहनों का निरंतर चलाना मना है.

ठोस और खंडित रेखाओं का मिश्रण
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ठोस और खंडित मध्य रेखाओं का संयोजन सड़क के मध्य को दर्शाता है. जिस वाहन की तरफ ये खंडित रेखाएं हैं, वे ओवरटेक के लिए सड़क के इस पार आ सकते हैं, मगर जिन वाहनों की तरफ ये सफेद या पीली ठोस रेखाएं बनी हैं, वे वाहन उस रेखा के इस पार नहीं आ सकते हैं.

रास्तों के किनारे लिखे कोटेशन
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  • रास्तों पर चलते हुए हमें बहुत सी बातें सड़क के किनारे लिखे हुए नजर आते हैं.

  • शराब पी के गाड़ी ना चलाएं.

  • नजर हटी दुर्घटना घटी.

  • आगे तीखी मोड़ है, धीरे चलें.

  • उन्हें जल्दी थी, वो चले गए.

  • धीरे चलें, घर पर आपका कोई इंतजार कर रहा है.

  • गति सीमा

  • घाटी क्षेत्र

इन तरह के साइन बोर्ड हमें दर्शाते हैं कि हमें गाड़ी चलाने के दौरान सड़क के अलावा और किन -किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. शराब पी के गाड़ी नहीं चलाने की सलाह इसलिए दी जाती है, क्योंकि शराब में मौजूद नशीले तत्व आपके दिमाग पर असर करते हैं. इसके बाद आप अपने दिमाग को अपने वश में करने में असफल हो जाते हैं और दुर्घटना घटने की संभावना बढ़ जाती है.

रिपोर्ट : वैभव विक्रम

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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