स्वतंत्रता दिवस 2026: मारुति 800 से लेकर EV क्रांति तक, जानिए कैसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऑटो पावर बना भारत

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भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का शानदार सफर / एआई इमेज

79वें स्वतंत्रता दिवस पर जानिए भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का पूरा इतिहास. लाइसेंस राज के दौर से निकलकर भारत कैसे आज दुनिया भर में गाड़ियों का निर्माण और निर्यात कर रहा है.

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देश के 79वें स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर यदि भारत की आत्मनिर्भरता और औद्योगिक क्रांति पर नजर डालें, तो ऑटोमोबाइल सेक्टर इस बदलाव की सबसे चमकदार मिसाल बनकर सामने आता है. कभी विदेशी पार्ट्स को असेंबल करने और लाइसेंस राज की सख्त सीमाओं में बंधा रहने वाला भारतीय ऑटो क्षेत्र आज दुनिया के नक्शे पर एक बड़ी ताकत बन चुका है. सालाना 2.8 करोड़ से अधिक वाहनों के उत्पादन और $145 बिलियन से ज्यादा के वैल्यूएशन के साथ भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है. विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने वाले इस देश ने आज छह महाद्वीपों में अपनी गाड़ियां और तकनीक भेजकर दुनिया को हैरान कर दिया है.

1947 से अब तक: तीन दौर में बदली भारत की रफ्तार

भारतीय ऑटो इंडस्ट्री की इस लंबी यात्रा को तीन मुख्य पड़ावों में देखा जा सकता है. आजादी के शुरुआती दशकों में प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स और हिंदुस्तान मोटर्स ने ऑटो निर्माण की नींव रखी, हालांकि उस समय कार खरीदना एक बड़ा सपना माना जाता था. साल 1983 में मारुति 800 के आगमन ने देश के मध्यम वर्ग को पहली बार अपनी कार का अनुभव कराया और देश में पर्सनल मोबिलिटी का नया दौर शुरू हुआ. इसके बाद 1991 के उदारीकरण ने विदेशी निवेश के रास्ते खोले, जिससे चेन्नई, पुणे, गुरुग्राम और सानंद जैसे शहर वैश्विक ऑटो निर्माण के बड़े केंद्र बनकर उभरे.

इन आइकॉनिक गाड़ियों ने लिखी सड़कों की तकदीर

भारत के हर दौर में कुछ ऐसी गाड़ियां रहीं, जिन्होंने लोगों की जीवनशैली और देश की संस्कृति को आकार दिया. दशकों तक सड़कों पर राज करने वाली 'हिंदुस्तान एंबेसडर' जहां नेताओं और अफसरों की पहचान बनी, वहीं 'बजाज चेतक' स्कूटर ने हर आम परिवार के सफर को आसान बनाया. मारुति 800 के बाद 'रॉयल एनफील्ड बुलेट' और 'टाटा इंडिका' जैसी गाड़ियों ने भारतीय इंजीनियरिंग का लोहा मनवाया. टाटा इंडिका देश की पहली पूरी तरह स्वदेशी कार बनी, जबकि महिंद्रा स्कॉर्पियो और थार जैसी गाड़ियों ने साबित कर दिया कि भारत विश्वस्तरीय रफ-एंड-टफ एसयूवी बनाने में किसी से पीछे नहीं है.

ट्रैक्टर और दोपहिया निर्माण में भारत बना ग्लोबल लीडर

'मेक इन इंडिया' की बदौलत भारत आज न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि दुनिया भर के लिए व्हीकल एक्सपोर्ट का केंद्र भी बन चुका है. भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा ट्रैक्टर निर्माता, दोपहिया और तिपहिया वाहनों का सबसे बड़ा उत्पादक और पैसेंजर कारों का तीसरा सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर है. इसके अलावा, भारत के ऑटो कंपोनेंट सप्लायर्स हर साल $20 बिलियन से अधिक के पार्ट्स यूरोप और अमेरिका को एक्सपोर्ट करते हैं. सरकार की पीएलआई (PLI) योजनाओं ने घरेलू स्तर पर एडवांस बैटरी और ऑटोमोबाइल रिसर्च को पंख दिए हैं.

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्मार्ट फ्यूचर की ओर मजबूत कदम

आजादी के 79वें साल में भारत अपनी सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति 'इलेक्ट्रिफिकेशन' से गुजर रहा है. देश में बिकने वाले कुल वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत के पार पहुंच चुकी है. ओला, एथर, टीवीएस और बजाज जैसे ब्रांड्स के साथ दोपहिया और तिपहिया सेगमेंट ईवी क्रांति का नेतृत्व कर रहे हैं. वहीं टाटा मोटर्स, महिंद्रा और एमजी जैसी कंपनियां पैसेंजर ईवी सेगमेंट को लगातार नई ऊंचाई पर ले जा रही हैं. भविष्य की बात करें तो भारत अब फ्लेक्स-फ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और सॉफ्टवेयर आधारित स्मार्ट कनेक्टेड गाड़ियों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है.


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राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

राजीव की एक्सपर्टीज स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग के साथ-साथ डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, ऑफिशियल डेटा, कंपनी अपडेट्स और एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी यूजर्स तक पहुंचाते हैं.

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राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन, पॉजिटिव जर्नलिज्म और फीचर राइटिंग जैसे अलग-अलग बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई.

जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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