बीरभूम नरसंहार के पीछे बालू का अवैध कारोबार, भादू शेख के भाई समेत 4 लोगों की बागटुई में हुई हत्या
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Mar 2022 6:38 AM
बाबर, भादू शेख का चचेरा भाई था. पिछले साल 5 जनवरी की शाम घर जाते समय पूर्व पाड़ा के पास ही बदमाशों ने उनके सिर में गोली मार दी थी. इस हत्या कांड में सोना शेख और कुछ अन्य को गिरफ्तार किया गया था.
बीरभूम/पानागढ़: पश्चिम बंगाल का बीरभूम जिला इन दिनों सुर्खियों में है. वजह तृणमूल कांग्रेस के एक नेता की हत्या के बाद हुआ नरसंहार. बीरभूम जिला के रामपुरहाट एक नंबर ब्लॉक के बागटुई गांव में अवैध कारोबार में खूनी झड़प थमने का नाम नहीं ले रही है. दो साल में 4 हत्याएं बागटुई गांव में हो चुकी है. राजेल शेख, बापी मंडल, बाबर शेख और अब बाबर का भाई भादू शेख. ये सभी चार लोग पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे.
भादू शेख स्थानीय बरशाल पंचायत के उप प्रधान भी थे. राजनीति में आने से पहले से ही अंगूर शेख और भादू शेख एक-दूसरे के करीब थे. लेन-देन को लेकर आपसी रंजिश शुरू हो गयी. इस बीच, सोमवार को भादू शेख की हत्या के बाद भादू शेख के उपद्रवियों ने गांव में 8 लोगों को जिंदा दिया. पिछले साल दुमका के रास्ते में बोनहत कालीडांगा के पास राजेल शेख की हत्या कर दी गयी थी. बाइक पर सवार राजेल शेख को विपरीत दिशा से आ रही डंपर ने कुचल दिया था. बताते हैं कि यह दुर्घटना नहीं थी. हत्या थी.
इस घटना के बाद राजेल शेख के गुर्गों ने बाबर शेख की हत्या कर दी थी. बाबर, भादू शेख का चचेरा भाई था. पिछले साल 5 जनवरी की शाम घर जाते समय पूर्व पाड़ा के पास ही बदमाशों ने उनके सिर में गोली मार दी थी. इस हत्या कांड में सोना शेख और कुछ अन्य को गिरफ्तार किया गया था. बाद में सभी जमानत पर रिहा हो गये. बाबर की हत्या के तुरंत बाद बापी मंडल को पीट-पीटकर मार डाला गया. उसका शव एक खेत से बरामद हुआ था.
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भादू शेख की सोमवार को घर के पास एक चाय की दुकान में बम मारकर हत्या कर दी थी. क्षेत्र में भादू के मुख्य शत्रु के रूप में अंगूर शेख, पलाश शेख, सोना शेख की पहचान की गयी है. बताया जाता है कि एक ड्राइवर के रूप में अंगूर और भादू शेख की दोस्ती की शुरुआत हुई थी. बाद में, अंगूर, भादू और लालन ने संयुक्त रूप से मुर्गी पालन का कारोबार शुरू किया. राजनीति में आने के बाद भादू शेख की प्रसिद्धि धीरे-धीरे बढ़ती गयी.
आरोप है कि पत्थर की ढुलाई करने वाले वाहनों से टैक्स वसूलने और डीसीआर टैक्स वसूलने के नाम पर सभी पार्टनर में कई बार हाथापाई तक की नौबत आ गयी थी. बाद में राजेल और बापी भी उनके दोस्त बन गये. दो लोगों के जुड़ने के चलते अंगूर शेख और भादू शेख के बीच दूरियां बढ़ती गयी. अंगूर शेख की जमीन पर जबरन कब्जा करने और उसे फुटबॉल मैदान में तब्दील का आरोप भादू पर लगा. तभी से अंगुर शेख के परिवार के लोग गांव से बाहर हो गये थे.
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इस बीच, अंगूर शेख और भादू के बीच खटास लगातार बढ़ने लगी. किसी के मारे जाने पर अंगूर और भादू के समर्थकों के बीच तोड़-फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाएं होती रही हैं. पिछले साल बाबर शेख की मौत के बाद रामपुरहाट में ऐसी कई घटनाएं हुईं थीं. एक के बाद एक कुछ भागीदारों की मृत्यु के बाद, क्षेत्र में जितने भी वैध-अवैध कारोबार पार्टनरों की मदद से शुरू हुए थे, उस पर भादू शेख का एकाधिकार हो गया. हाल ही में भादू पंचायत का उप प्रधान बना, तो उसकी शक्ति और बढ़ गयी.
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कहते हैं कि भादू शेख को जान से मारने की धमकी भी मिली थी. भादू हत्याकांड ने सोमवार को साझेदारी के कारोबार के बारे में अफवाहों को हवा दे दी. लेकिन, भादू की हत्या का प्लान किसका था? फोन पर उसे जान से मारने की धमकी किसने दी? इन सवालों के जवाब अभी भी अधूरे हैं. क्या भादू की हत्या के बाद गांव में शांति लौटेगी?
रिपोर्ट- मुकेश तिवारी
Posted By: Mithilesh Jha
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