पानागढ : ढलती जा रही राधा गोविंद मंदिर की खूबसूरती
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Dec 2018 12:21 AM (IST)
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देखरेख के अभाव में दम तोड़ रही दीवारें वाहनों के गुजरने से धूल धूसरित हो रही नक्काशियां पानागढ : वीरभूम जिले के इलमबाजार ग्राम पंचायत समिति के तहत अजय नदी के किनारे केंदुली के पास मौजूद जयदेव मंदिर के पास से हैवी वाहनों का आवागमन शुरू होने से एक फीट की दूरी पर ही सड़क […]
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- देखरेख के अभाव में दम तोड़ रही दीवारें
- वाहनों के गुजरने से धूल धूसरित हो रही नक्काशियां
पानागढ : वीरभूम जिले के इलमबाजार ग्राम पंचायत समिति के तहत अजय नदी के किनारे केंदुली के पास मौजूद जयदेव मंदिर के पास से हैवी वाहनों का आवागमन शुरू होने से एक फीट की दूरी पर ही सड़क के किनारे मौजूद कवि जयदेव की स्मृति में बने राधा गोविंद मंदिर पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
इसका मुख्य कारण है कि मंदिर के पास से गुजर रहे हैवी वाहनों के कंपन से तथा वाहनों के काले धुंआ से मंदिर की टूट-फूट जहां शुरू हो गई है, वहीं मंदिर की दीवारों पर तथा टेराकोटा की नक्काशियों पर धुओं की गहरी छाप साफ तौर पर देखी जा रही है.
मंदिर की इस अवस्था को देखकर जहां स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है, वहीं इस प्राचीन मंदिर की बिगड़ती अवस्था को देख कर बुद्धिजीवी वर्ग भी काफी चिंतित है.
बताया जाता है कि 1863 में जयदेव प्राचीन मंदिर का निर्माण तत्कालीन बर्दवान के महाराजा कीर्ति चांद बहादुर ने कवि जयदेव की स्मृति में कराया था. रामायण, महाभारत की झांकियों को मंदिर में टेराकोटा की कार्य पद्धति से प्रस्तुत किया गया था. हैवी वाहनों के चलने से मंदिर के ध्वंस होने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है.
मंदिर के पुरोहित बेनी माधव का कहना है कि मंदिर से सटी सड़क से हैवी तथा पत्थर लदे वाहनों के आवागमन के कारण मंदिर की अवस्था चिंताजनक होती जा रही है. उन्होंने बताया कि कई बार प्रशासन तथा संबंधित विभाग को मामले से अवगत कराया गया. लेकिन इसके बावजूद इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई.
मंदिर की अवस्था को देखते हुए विश्व भारती शांति निकेतन कला भवन के अध्यापक शुथायु चट्टोपाध्याय ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि प्राचीन मंदिर की रखरखाव तो दूर की बात उल्टे प्रशासन द्वारा मंदिर के पास से ही सड़क का निर्माण कर हैवी वाहनों के गुजरने से मंदिर के ध्वंस होने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है. महत्वपूर्ण टेराकोटा शिल्प दम तोडता नजर आ रहा है. वाहनों के काले धुओं से मंदिर की दीवारें भी नष्ट होतीे जा रही हैं.
ऐसे में रखरखाव की कमी साफ तौर पर देखी जा रही है.विश्व भारती के ही कला भवन के एक अध्यापक शिशिर सहाना ने कहा कि यदि इस धरोहर को सुरक्षित रखना है तो अविलंब प्रशासन को मंदिर के पास से मौजूद सड़क हटानी होगी. भारी वाहनों का आवागमन बंद होने के बाद ऐतिहासिक मंदिर को बचाया जा सकता है.
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