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छत्तीसगढ़ में छात्रों और युवाओं की लाइफ स्टाइल को आध्यात्म से जोड़ने के लिए सैटेलाइट चैनल शुरू

Updated at : 15 Apr 2023 6:35 PM (IST)
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छत्तीसगढ़ में छात्रों और युवाओं की लाइफ स्टाइल को आध्यात्म से जोड़ने के लिए सैटेलाइट चैनल शुरू

पीएमसी के संस्थापक ब्रह्मर्षि पत्री ने इस बात पर बल दिया कि स्कूली छात्रों एवं युवाओं को भी इस माध्यम से अध्यात्म से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे कि वे न सिर्फ स्वयं के लिए, बल्कि समाज के लिए अच्छे कार्यों एवं सकारात्मकता से जुड़ सकेंगे.

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रायपुर : मोबाइल और टीवी के जरिये जन जन तक ध्यान और अध्यात्म को पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर रायपुर से पीएमसी (पिरामिड मेडिटेशन चैनल) का सैटेलाइट चैनल की शुरुआत छत्तीसगढ़ से की गई है. पीएमसी का यह आध्यात्मिक चैनल दुनिया का पहला आध्यात्मिक विज्ञान और जीवन शैली पर आधारित सैटेलाइट हिंदी चैनल है. आध्यात्मक चैनल की शुरुआत तीन मार्च, 2021 को अध्यात्मवेत्ता एवं परम साधक ब्रह्मर्षि पितामह पत्री द्वारा की गई थी.

देश के अध्यात्म विज्ञान के प्राचीन ज्ञान की शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए पिरामिड मेडिटेशन चैनल (पीएमसी) दुनिया का पहला आध्यात्मिक विज्ञान और जीवन शैली चैनल अपने सैटेलाइट में अब हिंदी में उपलब्ध है. पीएमसी हिंदी चैनल को जियो टीवी, सिटी केबल, डीईएन नेटवर्क, फास्टवे पर 24X7 प्रसारित किया जा रहा है. इस साल की शुरुआत में हिंदी में लॉन्च होने के बाद से अब यह 3 करोड़ से अधिक घरों में पहुंच रहा है. बड़ी संख्या में आनापानसती ध्यान के अनुयायियों और अभ्यासियों ने चैनलों की सदस्यता ली है. कई लोग अब पिरामिड ऊर्जा से लाभान्वित हो रहे हैं.

अंधविश्वास की जगह विज्ञान का प्रसार

राष्ट्रभाषा हिंदी में भारत का पहला न्यू-एज स्पिरिचुअल साइंस चैनल पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट का आधिकारिक हिंदी मीडिया विंग है. पीएमसी एक परिवर्तनकारी मीडिया है, जिसका उद्देश्य मानव जाति को हिंसा से अहिंसा, अंध धार्मिक विश्वासों से वैज्ञानिक और आध्यात्मिक-वैज्ञानिक प्रयोग और तर्क और दिवालिया भौतिकवाद से शानदार मध्य मार्ग तक और शाकाहार अपनाने के लिए खाने के पशु स्तर से विकसित होने में सक्षम बनाना है. इसका उद्देश्य सत्य जैसा प्रस्तुत करना है.

छात्रों और युवाओं को आध्यात्म से जोड़ना जरूरी

पीएमसी के संस्थापक ब्रह्मर्षि पत्री ने इस बात पर बल दिया कि स्कूली छात्रों एवं युवाओं को भी इस माध्यम से अध्यात्म से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे कि वे न सिर्फ स्वयं के लिए, बल्कि समाज के लिए अच्छे कार्यों एवं सकारात्मकता से जुड़ सकेंगे. उन्होंने कहा कि इससे समाज में सकारात्मकता का संचार होगा. साथ ही, जीवनशैली जनित विकारों से मुक्त होकर सभी आनंदित एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकेंगे.

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