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अलकतरा घोटाले में पूर्व मंत्री इलियास हुसैन बरी

Updated at : 25 May 2017 8:51 AM (IST)
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अलकतरा घोटाले में पूर्व मंत्री इलियास हुसैन बरी

पटना : अलकतरा घोटाले के एक मामले में बुधवार को सीबीआइ दो के विशेष जज सर्वजीत के कोर्ट ने पूर्व पथ निर्माण मंत्री इलियास हुसैन समेत पांच लोगों को बरी कर दिया. वहीं, अदालत ने इस मामले में कास्मो ट्रांसपोर्ट कोलकाता के मालिक केके केडिया को दोषी पाते हुए तीन वर्ष की कैद और 4.5 […]

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पटना : अलकतरा घोटाले के एक मामले में बुधवार को सीबीआइ दो के विशेष जज सर्वजीत के कोर्ट ने पूर्व पथ निर्माण मंत्री इलियास हुसैन समेत पांच लोगों को बरी कर दिया. वहीं, अदालत ने इस मामले में कास्मो ट्रांसपोर्ट कोलकाता के मालिक केके केडिया को दोषी पाते हुए तीन वर्ष की कैद और 4.5 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. फैसला सुनाये जाने के समय इलियास हुसैन समेत सभी आरोपित कोर्ट में मौजूद थे. इलियास हुसैन सभी अभियुक्तों के खिलाफ जांच के बाद सीबीआइ ने दो फरवरी, 2005 को आरोपपत्र दाखिल किया था.
ये लोग बनाये गये थे अभियुक्त
मामले में पथ निर्माण विभाग के तत्कालीन मंत्री इलियास हुसैन के अलावा निदेशक जनार्दन शर्मा, सहायक निदेशक मुस्तफा अहमद , सेक्शन ऑफिसर शोभा सिन्हा, रामाधार ठाकुर , कास्मो ट्रांसपोर्ट के प्रोपराइटर केके केडिया, ट्रांसपोर्टर प्रवीण कुमार झारिया व कास्मो ट्रांसपोर्ट के कर्मचारी महेश्वरी प्रसाद को अभियुक्त बनाया गया था. मामले की सुनवाई के दौरान निदेशक जनार्दन शर्मा की मृत्यु हो गयी और महेश्वरी प्रसाद सीबीआइ के गवाह बन गये.
मामले के विचारण के दौरान सीबीअाइ अभियुक्तों के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा. इसके कारण इलियास हुसैन, शोभा सिन्हा, मुस्तफा अहमद , रामाधार ठाकुर व प्रवीण झारिया को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया . वहीं, ट्रांसपोर्टर केके केडिया को विशेष अदालत ने भादवी की धारा 465 , 407, 471 व 420 का दोषी पाते हुए सश्रम कारावास व चार लाख 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी.
चार अन्य भी बरी, कास्मो ट्रांसपोर्ट, कोलकाता के मालिक केके केडिया को तीन साल की कैद व 4.5 लाख जुर्माना
1997 में आठ आरोिपतों पर मामला दर्ज
दो फरवरी, 2005 को आरोपपत्र दाखिल
यह था मामला
अलकतरा घोटाले का यह मामला वर्ष 1997 में हाइकोर्ट में एक जनहित याचिका के सुनवाई के बाद दर्ज किया गया था. सुनवाई के बाद इलियास हुसैन के साथ आठ लोगों को अभियुक्त बनाया गया. अभियुक्तों पर वर्ष 1992 से 1996 के बीच आपसी षड‍्यंत्र कर लगभग 44 लाख रुपये के अलकतरा का गबन करने का अारोप लगाया था. अभियुक्तों ने दो सप्लाइ ऑर्डर के माध्यम से लगभग 900 मीटरिक टन अलकतरा का गबन किया था, जो
यह था मामला…
अलकतरा ट्रांसपोर्टर के माध्यम से आइओसी, हल्दिया पश्चिम बंगाल से सुपौल जिले के पथ निर्माण विभाग को आपूर्ति किया जाना था. लेकिन, अभियुक्तों ने इसे आपूर्ति न कर गबन कर दिया.
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