गड़बड़ी: राज्य औषधि निरीक्षकों की टीम ने की जांच, प्रतिबंधित विज्ञापनों से रोगों के इलाज का दावा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 May 2017 6:57 AM (IST)
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रांची: राजधानी में प्रतिबंधित विज्ञापनों के जरिये जटिल बीमारी काे ठीक करने का दावा किया जा रहा है. बीमारी को शत-प्रतिशत ठीक करने से संबंधित जानकारी बाकायदा पंपलेट्स छपवा कर दी जा रही है. राजधानी में सड़कों के किनारे ज्यादातर दीवारों में ऐसे विज्ञापन चस्पा मिल जायेंगे. औषधि निरीक्षकों की टीम ने भी जांच में […]
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रांची: राजधानी में प्रतिबंधित विज्ञापनों के जरिये जटिल बीमारी काे ठीक करने का दावा किया जा रहा है. बीमारी को शत-प्रतिशत ठीक करने से संबंधित जानकारी बाकायदा पंपलेट्स छपवा कर दी जा रही है. राजधानी में सड़कों के किनारे ज्यादातर दीवारों में ऐसे विज्ञापन चस्पा मिल जायेंगे. औषधि निरीक्षकों की टीम ने भी जांच में यह बात सही पायी है. टीम ने देखा कि पंपलेट्स में बांझपन, महिलाओं की बीमारी, दंपतियों की समस्या के इलाज का दावा किया गया है. पंपलेट्स में मोबाइल नंबर भी है.
जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित : राज्य औषधि निदेशालय काे लगातार सूचना मिलने के बाद जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया. राजधानी में ऐसे विज्ञापनों के माध्यम से बीमारी को ठीक करने का दावा करते पाया गया है. टीम ने विष्णु गली स्थित एक क्लिनिक में जांच की. जांच टीम ने वहां से प्रतिबंधित विज्ञापन के पंपलेट्स प्राप्त किये. टीम ड्रग एंड मैजिक रेमेडीज (प्रतिबंधित विज्ञापन) एक्ट 1954 के ऐसे प्रतिबंधित विज्ञापनों से लोगाें को भ्रमित करनेवाले कानून पर मंथन कर रही है. उम्मीद है कि शीघ्र ही इस पर रिपोर्ट तैयार कर राज्य औषधि निदेशालय को सौंप दी जायेगी. टीम में आैषधि निरीक्षक प्रणव प्रभात, मुंजापारा घनश्याम, सौरभ कुमार शामिल हैं.
अपर बाजार से दवा खरीदी
टीम ने अपर बाजार की दुकान से एक दवा (सिरप) खरीदी है. इसमें कंपनी ने यह दावा किया है कि सिरप के उपयोग से बांझपन की समस्या दूर होगी. मर्दाना शक्ति में बढ़ोतरी होगी. औषधि निरीक्षकों ने बताया है कि ऐसा दवा कंपनी नहीं कर सकती है. दवा कंपनी पर प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है. लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है.
प्रतिबंधित विज्ञापनों के माध्यम से राजधानी में लोगों को ठगने की शिकायत मिल रही थी. टीम गठित की गयी है, जाे जांच कर रही है. जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जायेगी.
डॉ सुजीत कुमार, संयुक्त निदेशक औषधि
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