इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट औद्योगिक सुरक्षा में कैरियर

Published at :16 Jan 2014 10:35 AM (IST)
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इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट औद्योगिक सुरक्षा में कैरियर

प्राकृतिक आपदा के खतरे को देखते हुए पूरे विश्व में मानव पूंजी की रक्षा, पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित रखने के लिए इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है, इसलिए इसमें कैरियर की काफी संभावनाएं हैं. कर्मचारियों, संपत्ति और पर्यावरण की सुरक्षा किसी भी इंडस्ट्री के लिए प्राथमिक चीज […]

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प्राकृतिक आपदा के खतरे को देखते हुए पूरे विश्व में मानव पूंजी की रक्षा, पर्यावरण की सुरक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित रखने के लिए इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है, इसलिए इसमें कैरियर की काफी संभावनाएं हैं.

कर्मचारियों, संपत्ति और पर्यावरण की सुरक्षा किसी भी इंडस्ट्री के लिए प्राथमिक चीज होती है. इससे संबंधित इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट क्षेत्र है. सेफ्टी मैनेजेमेंट का काम मुख्य रूप से किसी भी प्रकार का खतरा, चोट, दुर्घटना आदि को रिस्क मैनेजमेंट तकनीकों और सेफ्टी मैनेजमेंट ऑपरेशन लागू कर कर्मचारियों के स्वास्थ्य को सुधारना, ऑपरेटिंग सिस्टम को मॉनीटर करना, सामान्य रूप से इंडस्ट्री को सेफ्टी मेजर्स का सहारा देना आदि है.

क्यों पड़ी इसकी जरूरत
किसी भी देश में अपने निवासियों की जान-माल की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाता है. इस सुरक्षा व्यवस्था को नये तरीकों से बनाये रखने के लिए विशेषज्ञों द्वारा जी-तोड़ मेहनत की जाती है, जिन्हें सामान्य रूप से सेफ्टी मैनेजर, फायर प्रोटेक्शन इंजीनियर, रिस्क मैनेजमेंट कंसल्टेंट आदि नामों से संबोधित किया जाता है. इन सभी पदों पर कार्य करने के लिए एक विशेष कोर्स की दरकार होती है, जिसे इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट कहा जाता है.

इस क्षेत्र के कोर्स के पाठ्यक्रम के दौरान छात्रों को उन सभी बारीकियों से अवगत कराया जाता है, जिससे वे हर खतरे का दृढ़तापूर्वक सामना कर सकें. पाठ्यक्रम का उद्देश्य सुरक्षा के हर संभावित उपाय को बनाये रखने और उनकी मॉनीटरिंग से लेकर उपकरणों की जांच, लोगों की रक्षा आदि है. सेफ्टी मैनेजर को मुख्य रूप से कई बिंदुओं पर गौर करना होता है. हालांकि उन्हें पाठ्यक्रम के दौरान ही सभी संभावित जानकारी दे दी जाती है, जिनमें मुख्य रूप से फायर फाइटिंग, फायर प्रिवेंशियल, लेबर एवं फैक्टरी एक्ट के कोड की जानकारी, दुर्घटना के बाद प्राथमिक मदद उपलब्ध कराना आदि शामिल है. हालांकि इस कार्य में खतरे भी बहुत हैं, इसलिए कार्य के दौरान पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. बिल्डिंग के अंदर लगे फायर उपकरणों की जांच करके सभी जरूरी जानकारी को मैनेजमेंट तक पहुंचाना भी इसी के अंतर्गत आता है. आजकल कंस्ट्रक्शन में सेफ्टी इंजीनियरों की भारी मांग है, जिसे देखते हुए उन्हें अपने कार्य में निखार लाना होगा.

कौन-कौन से हैं कोर्स
इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट में कई तरह के डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और शॉर्ट टर्म पाठ्यक्रम मौजूद हैं. इनकी अवधि तीन, छह और 12 महीने तक है. आजकल पत्रचार और पार्टटाइम कोर्सेज की भी भरमार है. इन कोर्सो को करने के बाद छात्रों को व्यक्तिगत रूप से अपनी जानकारी इन क्षेत्रों में बढ़ाने में मदद मिलती है- इंजीनियरिंग कंट्रोल एवं एप्लीकेशन, इंडस्ट्रियल उपकरणों की सुरक्षा मॉनीटरिंग, पेट्रोलियम इंडस्ट्री, न्यूक्लियर पावर प्लांट में आपातकालीन नियंत्रण, मेडिकल विजिलेंस, खराब उपकरणों का मरम्मत कार्य, खतरनाक एवं जख्मी स्थितियों से बचाव, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग आदि.

क्या है योग्यता
सुरक्षा के लिहाज से तैयार किये गये इस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए इच्छुक छात्र को कम से कम 12वीं पास होना जरूरी है. हालांकि इन कोर्सेज के लिए ग्रेजुएट एवं इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले छात्रों को वरीयता दी जाती है. अधिकतर ऐसे छात्र भी हैं, जो पहले से ही फायर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कार्यरत होते हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं.

संभावनाओं के द्वार
जिस तेजी से हर जगह सुरक्षा के संभावित उपाय किये जा रहे हैं, उसी तेजी से लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं. भारत और विदेश, दोनों जगह अवसर आते रहते हैं. भारतीय दृष्टिकोण से इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद भारत में फायर प्रोटेक्शन इंजीनियर, एन्वायरन्मेंट सेफ्टी मैनेजर, इंजीनियर हाइजीन मैनेजर, सिस्टम सेफ्टी इंजीनियर, रिस्क मैनजमेंट कंसल्टेंट, कंस्ट्रक्शन सेफ्टी इंजीनियर, ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी सुपरवाइजर के रूप में अवसर मिलते हैं. इसके अलावा सेल, टिस्को, कोल इंडिया लिमिटेड, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, एनटीपीसी एवं इंडियन ऑयल जैसी कंपनियां डिप्लोमा अथवा डिग्रीधारक को अपने यहां नियुक्त करती हैं.

कितनी है कमाई
एक सेफ्टी मैनेजर को शुरू में 20-25 हजार रुपये प्रतिमाह और कंस्ट्रक्शन सेफ्टी इंजीनियर को 20 हजार रुपये मिलते हैं. लगभग यही राशि सभी पदों पर आसीन लोगों को शुरू में मिलती है.

मुख्य संस्थान

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च

वेबसाइट : www.iitrindia.org

नेशनल सेफ्टी काउंसिल ऑफ इंडिया, बेलापुर, नवी मुंबई. वेबसाइट : www.nsc.org.in

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, नयी दिल्ली. वेबसाइट : www.aiims.edu

दिल्ली कॉलेज ऑफ फायर सेफ्टी इंजीनियरिंग एंड ट्रेनिंग. वेबसाइट : www.dcfse.com

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