एसकेएमसीएच के 12 विभाग के अध्यक्ष काम करने लायक नहीं

सुजीत कुमार मुजफ्फरपुर : श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज के 12 विभाग के प्राध्यापक काम करने लायक नहीं है. एसकेएमसीएच के प्राचार्य डॉ डीके सिन्हा ने एमसीआई को पत्र लिख हटाने की अनुशंसा की है. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भी पत्र लिखा है. इसमें कई प्राध्यापक शहर के जाने-माने डॉक्टर हैं. प्राचार्य के इस […]
सुजीत कुमार
मुजफ्फरपुर : श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज के 12 विभाग के प्राध्यापक काम करने लायक नहीं है. एसकेएमसीएच के प्राचार्य डॉ डीके सिन्हा ने एमसीआई को पत्र लिख हटाने की अनुशंसा की है. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भी पत्र लिखा है. इसमें कई प्राध्यापक शहर के जाने-माने डॉक्टर हैं. प्राचार्य के इस कदम से मेडिकल कॉलेज में खलबली मची है.
बताया जाता है कि एमसीआइ की टीम मेडिकल कॉलेज में जल्द ही निरीक्षण करने वाली है. इस वजह से प्राचार्य कॉलेज की समीक्षा कर रहे हैं. सभी विभागों के शिक्षकों के कार्यकलापों पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
आठ संविदा पर हैं बहाल. कॉलेज में प्राध्यापक के 20 पदों की जगह 15 कार्य कर रहे हैं. पांच पद रिक्त हैं. 15 में आठ प्राध्यापक संविदा पर बहाल हैं. पीएसएम विभाग में इपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ शोभा रानी और स्टैटिशियन डॉ वीरेश्वर प्रसाद के बारे में उन्होंने लिखा है कि पिछले वर्ष एमसीआइ की टीम ने उन्हें विभाग के योग्य नहीं माना है. उन्हें स्थानांतरित कर योग्य शिक्षक को पदस्थापित किया जाये. टीबी एवं चेस्ट विभाग में पदस्थापित प्राध्यापक डॉ रामजी प्रसाद के योगदान ही नहीं देने का उल्लेख किया है. सजर्री विभाग में संविदा पर कार्यरत प्राध्यापक डॉ उमेश्वर प्रसाद और नेत्र रोग विभाग में कार्यरत डॉ हिमांशु कुमार सिन्हा, स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग की प्राध्यापिका डॉ मंजू जायसवाल, एनेस्थेसिया विभाग के प्राध्यापक डॉ यूएस राय व डॉ गांधी झा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके कार्य को संतोषजनक नहीं होने की रिपोर्ट की है. साथ ही इएनटी विभाग के प्राध्यापक डॉ राजेंद्र मिश्र के बारे में तो यहां तक कह दिया गया है कि इनका कार्य प्राध्यापक के लायक ही नहीं है.
हटाये गये डॉ रामानंद मेहता
प्राचार्य डॉ डीके सिन्हा ने फिजियोलॉजी विभाग में संविदा पर कार्यरत प्राध्यापक डॉ रामानंद मेहता के कार्य को संतोषजनक नहीं पाते हुए उन्हें मुक्त कर दिया है. यह रिपोर्ट भी प्रधान सचिव को भेजी गयी है. प्राचार्य ने लिखा है कि डॉ मेहता समस्तीपुर रहते हैं. वहां से प्रतिदिन आकर क्लास नहीं ले पाते थे. एकबार उन्होंने अस्वस्थता का हवाला देते हुए जिम्मेदारी से मुक्त करने का अनुरोध भी किया था. फिजियोलॉजी में पीजी की भी पढ़ाई होती है. इसमें दस फीसदी अतिरिक्त शिक्षक के पदस्थापन का अनुरोध भी किया गया है.
इन दोनों की नहीं है जरूरत
एमसीआइ के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत महिला चिकित्सा पदाधिकारी (आरएचसी व यूएचसी) डॉ सुनीति सिन्हा और चिकित्सा पदाधिकारी (आरएचसी व यूएचसी) डॉ नरेश कुमार की कोई आवश्यकता नहीं जतायी गयी है. प्रधान सचिव को लिखे पत्र में प्राचार्य ने दोनों पदाधिकारियों के बारे में लिखा है इनकी कोई आवश्यता नहीं है. इनको यहां से स्थानांतरित किया जाये.
अच्छे शिक्षक सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं. सरकार को उम्र सीमा 65 से बढ़ा कर 70 कर देनी चाहिए. जो भाड़े के शिक्षक आ रहे हैं, वे सक्षम नहीं हैं. उनका रहना, नहीं रहने के बराबर है. ऐसे में एमसीआइ के संभावित निरीक्षण को देखते सरकार को स्पष्ट रिपोर्ट भेज दी है.
डॉ डीके सिन्हा, प्राचार्य, एसके मेडिकल कॉलेज
यह हैं अयोग्य
पीएसएम विभाग में डॉ शोभा रानी और स्टैटिशियन डॉ वीरेश्वर प्रसाद , टीबी एवं चेस्ट विभाग के प्राध्यापक डॉ रामजी प्रसाद, सजर्री विभाग में संविदा पर कार्यरत प्राध्यापक डॉ उमेश्वर प्रसाद और नेत्र रोग विभाग में कार्यरत डॉ हिमांशु कुमार सिन्हा, स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग की प्राध्यापिका डॉ मंजू जायसवाल, एनेस्थेसिया विभाग के प्राध्यापक डॉ यूएस राय व डॉ गांधी झा, इएनटी विभाग के प्राध्यापक डॉ राजेंद्र मिश्र, फिजियोलॉजी विभाग में संविदा पर कार्यरत प्राध्यापक डॉ रामानंद मेहता, मेडिकल कॉलेज में कार्यरत महिला चिकित्सा पदाधिकारी (आरएचसी व यूएचसी) डॉ सुनीति सिन्हा और चिकित्सा पदाधिकारी (आरएचसी व यूएचसी) डॉ नरेश कुमार.
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