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राहुल ने तमिल फिल्म मर्सल का समर्थन किया, प्रोडक्शन हाउस विवादित अंश को हटाने को तैयार

Updated at : 21 Oct 2017 7:42 PM (IST)
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राहुल ने तमिल फिल्म मर्सल का समर्थन किया, प्रोडक्शन हाउस विवादित अंश को हटाने को तैयार

नयी दिल्ली/चेन्नई: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने अभिनेता विजय की नयी तमिल फिल्म मर्सल में कुछ संवाद हटाये जाने की मांग करने के लिए तमिलनाडु भाजपा पर आज हमला बोला. इस फिल्म में जीएसटी का कथित तौर पर उपहास उड़ाया गया है. इससे पहले केंद्रीय मंत्री पी राधाकृष्णन […]

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नयी दिल्ली/चेन्नई: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने अभिनेता विजय की नयी तमिल फिल्म मर्सल में कुछ संवाद हटाये जाने की मांग करने के लिए तमिलनाडु भाजपा पर आज हमला बोला. इस फिल्म में जीएसटी का कथित तौर पर उपहास उड़ाया गया है. इससे पहले केंद्रीय मंत्री पी राधाकृष्णन ने मांग की कि उन संवादों को फिल्म से निकाला जाना चाहिए जो उनके अनुसार जीएसटी के बारे में असत्य हैं. भाजपा नीत राजग सरकार ने एक जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया है. उधर, शाम में फिल्म के प्रोडक्शन हाउस का बयान आया है कि अगर जरूरत होगा तो वह फिल्म में उक्त अंश को हटा सकता है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज ट्वीट कर कहा, श्रीमान् (नरेन्द्र) मोदी सिनेमा तमिल संस्कृति एवं भाषा की सशक्त अभिव्यक्ति है. मर्सल में हस्तक्षेप कर तमिल गौरव का विमुद्रीकरण मत करिये. उनके इस ट्वीट को चिदंबरम ने फिर से ट्वीट किया.

भाजपा की तमिलनाडु इकाई की प्रमुख टी सुंदरराजन एवं राष्ट्रीय सचिव एच राजा सहित राज्य के भाजपा नेताओं ने हाल में रिलीज इस फिल्म में जीएसटी के उल्लेख पर कड़ी आपत्ति की है और दावा किया है कि इसके संवाद बेहद अनुचित हैं.

चिदंबरम ने इसी पृष्ठभूमि में ट्वीट किया, कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने भी इस फिल्म को लेकर सरकार पर तंज किया. उन्होंने ट्वीट कर कहा, फिल्म निर्माताओं को नोटिस : कानून आने ही वाला है, आप केवल सरकार की नीतियों की सराहाना करने वाले वृत्त चित्र बना सकते हैं. उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, भाजपा मर्सल में संवाद निकालने को कह रही है. कल्पना करिए कि आज पराशक्ति रिलीज हुई होती.

पराशक्ति 1952 में आयी तत्कालीन शीर्ष स्टार शिवाजी गणेशन की पहली फिल्म थी जिसके संवाद द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि ने लिखे थे. उस समय करुणानिधि भी उभरते हुए पार्टी नेता एवं पटकथा लेखक थे.

इस सुपर हिट फिल्म के संवाद बहुत ही प्रभावशाली थे जिसमें सुधार और समतामूलक आदर्शों को महत्व दिया गया है. ट्वीट का जवाब देते हुए तमिलनाडु के भाजपा नेता एवं पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एच राजा ने कहा कि यदि ऐसा हुआ हो तो लोग इस फिल्म के एक प्रसिद्ध संवाद का उल्लेख करते हुए सरकार को मंदिर चलाने की इजाजत नहीं देते.

राजा का संकेत भाजपा एवं दक्षिणपंथी संगठनों के उस रुख की ओर था जिनका मानना है कि सरकार को मंदिरों का प्रशासन नहीं करना चाहिए और इसे श्रद्धालुओं को सौंप देना चाहिए. राजा ने यह भी दावा किया कि फिल्म ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति विजय की घृणा को उजागर कर दिया है. अभिनेता शरत कुमार ने ट्वीट किया, सेंसर बोर्ड द्वारा प्रमाणित फिल्म पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.

यदि यह प्रश्न योग्य होती तो फिर सेंसर बोर्ड की क्या जरूरत है..मर्सल. तमिल फिल्म अभिनेता कमल हसन ने ट्वीट कर कहा, मर्सल प्रमाणित है. इसका फिर से सेंसर मत करिए. आलोचना का जवाब तार्किक प्रतिक्रियाओं से दीजिए. आलोचकों को चुप मत कराइये. भारत जब बोलता है तो यह उज्ज्वल हो जाता है. पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरुर ने कहा कि कांग्रेस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है. उन्होंने राहुल गांधी को टैग करते हुए ट्वीट किया, याद रखिए : कांग्रेस, सत्ता में हो या बाहर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है. रचनात्मक स्वतंत्रता उन्हीं लोगों के हाथ में सुरक्षित रह सकती है जो इसकी कद्र करते हैं.

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