केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान से खफा अधिवक्ता न्यायिक कार्य से रहे विरत, आंदोलन की दी धमकी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 06 Apr 2022 5:19 PM
केंद्रीय विधि मंत्री किरेन रिजिजू के लोकसभा में दिये बयान से गुस्साए अधिवक्ता बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहे. इससे वादकारियों को काफी निराशा हुई. उन्हें मायूस होकर वापस घर लौटना पड़ा.
Agra News: जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट के संबंध में केंद्रीय विधि मंत्री किरेन रिजिजू के लोकसभा में दिये बयान पर हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति ने आक्रोश जताया है. बयान के विरोध में दीवानी के अधिवक्ता बुधवार सुबह से कार्य से विरत रहे, जिसकी वजह से न्यायालय में आने वाले तमाम वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और अपने केस की सुनवाई के लिए अगली तारीख लेकर जाना पड़ा.
दरअसल, केंद्रीय विधि मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में किसी भी उच्च न्यायालय में नई बेंच की स्थापना का कोई प्रस्ताव लंबित ना होने की बात कही. केंद्रीय विधि मंत्री के इस बयान से आगरा और अलीगढ़ मंडल के अधिवक्ताओं ने आक्रोश जताते हुए बुधवार को कार्य से विरत रहने की घोषणा की थी. बुधवार को सुबह तारीख पर आए तमाम वादकारियों को अधिवक्ताओं के कार्य से विरत रहने की जानकारी हुई. इससे न्याय लेने वाले वादकारियों को मायूसी झेलनी पड़ी.
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दूसरे जिलों से आये वादकारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. वहीं वादकारियों को अपने केस के लिए दूसरी तारीख लेकर वापस जाना पड़ा. इस दौरान हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति के पदाधिकारी और अधिवक्ताओं ने दीवानी परिसर में प्रभातफेरी भी निकाली.
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हाईकोर्ट खंडपीठ स्थापना संघर्ष समिति ने मंगलवार को आगरा के दीवानी बार कक्ष में बैठक की थी. बैठक में अधिवक्ताओं ने केंद्रीय विधि मंत्री के बयान की निंदा की. साथ ही समिति के संयोजक प्रवीण श्रीवास्तव, अशोक भारद्वाज, दुर्ग विजय सिंह ने कहा था कि लोकसभा में दिया गया बयान राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त है. जब किरेन रिजिजू ने आगरा में अधिवक्ताओं से मुलाकात की थी जिसमें जस्टिस जसवंत आयोग की रिपोर्ट का समर्थन किया था.
बैठक में मौजूद हेमंत भारद्वाज और वीरेंद्र फौजदार ने कहा कि आगरा में राजनीतिक शक्ति के अभाव में खंडपीठ बेंच की स्थापना का मामला अधर में लटका है. वर्तमान सत्र में हाईकोर्ट की बेंच स्थापना की पहल नहीं की गई तो अधिवक्ता उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे.
रिपोर्ट- राघवेंद्र सिंह गहलोत, आगरा
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