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दुश्मन की मिसाइलें लॉन्च होते ही पहुंचेगीं यमराज के द्वार! अमेरिका ने किया Golden Dome सिस्टम का टेस्ट तय; ड्रैगन पर क्या पड़ेगा भारी?

Updated at : 10 Nov 2025 1:39 PM (IST)
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US Golden Dome Missile System / Ai Image

गोल्डन डोम मिसाइल सिस्टम का एआई से इमेज बनाया गया है.

US Golden Dome Missile System: अमेरिका का गोल्डन डोम प्रोजेक्ट दुश्मन की मिसाइलों को लॉन्च होते ही अंतरिक्ष से नष्ट करने की क्षमता रखता है. लॉकहीड मार्टिन के सीईओ ने कहा कि 2028 तक असली ऑन-ऑर्बिट टेस्ट करने जा रहा है. यह प्रणाली बूस्ट फेज और मिड-कोर्स फेज में भी मिसाइलों को ट्रैक और नष्ट कर सकेगी, जिससे अमेरिका की सुरक्षा अजेय बन जाएगी.

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US Golden Dome Missile System: अमेरिका ने अपनी नई मिसाइल रक्षा प्रणाली गोल्डन डोम के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने घोषणा की है कि वह 2028 तक अपने ‘स्पेस-बेस्ड मिसाइल इंटरसेप्टर’ का वास्तविक परीक्षण करेगी. इस हथियार को गोल्डन डोम प्रोजेक्ट का सबसे खतरनाक और निर्णायक हिस्सा माना जा रहा है. यह प्रणाली दुश्मन की मिसाइलों को लॉन्च होते ही अंतरिक्ष से नष्ट कर सकती है. इसे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान शुरू किया गया था, और इसका उद्देश्य अमेरिका को जमीन से अंतरिक्ष तक एक अजेय मिसाइल रक्षा कवच देना है.

हाल ही में, चीन ने भी दुनिया की पहली ऑपरेशनल डिफेंस प्रणाली तैनात की है, जो अमेरिका द्वारा प्रस्तावित “गोल्डन डोम” सिस्टम जैसी है. चीन ने इस प्रणाली को डेटा प्रोसेसिंग तकनीक में एक बड़ी सफलता भी बताया है, जिससे दुनिया भर में खतरों की पहचान करने में मदद मिलेगी. हालांकि यह “डिस्ट्रिब्यूटेड अर्ली वार्निंग डिटेक्शन बिग डेटा प्लेटफॉर्म” अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इसके डेवलपर्स और वैज्ञानिकों का कहना है कि यह दुनिया में कहीं से भी चीन की ओर दागी जाने वाली हजारों मिसाइलों पर एक साथ नजर रख सकता है.

US Golden Dome Missile System: वास्तविक अंतरिक्ष परीक्षण की तैयारी

लॉकहीड मार्टिन के सीईओ जिम टैइकलेट ने कहा, “हम 2028 तक वास्तविक ऑन-ऑर्बिट इंटरसेप्टर टेस्ट करेंगे. यह कोई लैब प्रयोग नहीं होगा, बल्कि असली युद्ध-तैयार प्रणाली होगी.” उन्होंने बताया कि कंपनी अब पूरी तरह ऑपरेशनल प्रोटोटाइप तैयार कर रही है, जो अंतरिक्ष में उड़ेंगी, मिसाइलों को मारेंगी और उत्पादन के लिए तैयार होंगी. अगर यह योजना सफल होती है, तो भविष्य में S-400 या आयरन डोम जैसी एयर डिफेंस प्रणालियों की जरूरत कम हो सकती है.

गोल्डन डोम का कमांड और कंट्रोल सिस्टम

‘द वॉर जोन’ की रिपोर्ट के अनुसार, लॉकहीड मार्टिन ने वर्जीनिया के अपने Center for Innovation में गोल्डन डोम के C2 (कमांड और कंट्रोल) सिस्टम का प्रोटोटाइप तैयार किया है. यह खुली आर्किटेक्चर वाला सिस्टम है जो समुद्र से अंतरिक्ष तक की रक्षा क्षमताओं को जोड़ता है. कंपनी ने कहा कि कई उद्योग साझेदार इस मिशन में शामिल हुए हैं ताकि अमेरिका को हर मोर्चे पर ‘सर्वोत्तम तकनीकी बढ़त’ मिल सके. हालांकि पेंटागन ने इस पूरे प्रोजेक्ट पर चुप्पी साधी है, रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि गोल्डन डोम आने वाले दशकों में अमेरिका की स्पेस मिलिट्री पावर का केंद्र बनेगा. इसका मतलब है कि अब अंतरिक्ष ही नया युद्धक्षेत्र बन गया है.

मिसाइलों का बूस्ट फेज में हमला

जाहिर तौर पर, पेंटागन और व्हाइट हाउस दोनों ने गोल्डन डोम में स्पेस-बेस्ड मिसाइल इंटरसेप्टर पर जोर दिया है. इसका मुख्य लक्ष्य दुश्मन की मिसाइलों को अमेरिकी सीमा तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करना है. अमेरिकी रक्षा रणनीतिकार बताते हैं कि बैलिस्टिक मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियार रॉकेट बूस्टर का इस्तेमाल करते हैं और लॉन्च के तुरंत बाद उनकी ‘बूस्ट फेज’ सबसे कमजोर होती है.

इस विषय पर मार्च में डिफेंस वन को इंटरव्यू देते हुए अमेरिकी अंतरिक्ष बल के चीफ जनरल चांस सॉल्ट्जमैन ने कहा कि हम सिर्फ स्पेस-बेस्ड इंटरसेप्टर नहीं चाहते. हम चाहते हैं कि वे मिसाइलों को उसी बूस्ट फेज में मारें. हमला हमारे देश से जितना दूर हो सके, उतना होना चाहिए, इसलिए उन्हें बेहद तेज और सटीक होना जरूरी है.

मिड-कोर्स फेज में भी ट्रैक और नष्ट

गोल्डन डोम योजना केवल बूस्ट फेज तक सीमित नहीं है. यह प्रणाली लॉन्ग-रेंज मिसाइल, जैसे कि इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM), को मिड-कोर्स फेज में भी ट्रैक और नष्ट कर सकती है. यह फेज तब होती है जब मिसाइल पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर अंतरिक्ष में होती है. अमेरिका अब एक ऐसा स्पेस डिफेंस नेटवर्क तैयार कर रहा है जो दुश्मन की मिसाइलों को लॉन्च होते ही नष्ट कर सके. इसका उद्देश्य साफ है कि युद्ध को अमेरिकी धरती तक पहुंचने से रोकना और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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