अब खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज! अमेरिका ने ईरान पर गिराया 2267 किलो का प्रलयकारी बम

Updated at : 18 Mar 2026 8:35 AM (IST)
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US Bombs Iran missile sites near Strait of Hormuz using 5000 pound deep penetrator

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास मिसाइल ठिकाने पर गिराया 2263 किलो का बम.

US 5000 Pound Bomb Iran Strait of Hormuz: अमेरिका ने ईरान के ऊपर 5000 पाउंड यानी 2267 किलोग्राम का बम गिराया है. यह ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित मिसाइल ठिकाने पर गिराया गया है. अमेरिका का कहना है कि इसकी वजह से इंटरनेशनल वाटर में जहाजों के लिए खतरा पैदा हो रहा था.

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US 5000 Pound Bomb Iran Strait of Hormuz: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 4 मार्च से प्रभावी रूप से बंद कर रखा है, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो गया है. ट्रंप ने इसे खोलने में चीन, रूस, साउथ कोरिया समेत नाटो से भी अपील की, लेकिन किसी ने कोई पहल नहीं की. ऐसे में अब लगता है कि अमेरिका ने अब ईरान की दक्षिणी सीमा पर स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अकेले दम पर खोलने का फैसला कर लिया है. बुधवार रात यूएस आर्मी ने ईरान पर ‘कई 5,000 पाउंड (2267 किलोग्राम) वजनी डीप पेनेट्रेटर म्यूनिशन’ का इस्तेमाल करते हुए हमला किया. ये हमले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरान के तटीय इलाके में मौजूद ‘मजबूत (हार्डन) मिसाइल ठिकानों’ को निशाना बनाकर किए गए. 

सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए यूएस सेंट्रल कमांड ने कहा, ‘कुछ घंटे पहले, अमेरिकी बलों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरान के तट पर स्थित मजबूत मिसाइल साइट्स पर कई 5,000 पाउंड के डीप पेनेट्रेटर म्यूनिशन का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया. इन ठिकानों पर मौजूद ईरानी एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा थीं.’ पोस्ट के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का एक नक्शा भी साझा किया गया.

5,000 पाउंड डीप पेनेट्रेटर म्यूनिशन क्या हैं?

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ‘बंकर बस्टर’ बम गिराए. एक अमेरिकी अधिकारी ने सीएनएन को बताया कि इस्तेमाल किए गए ये म्यूनिशन GBU-72 एडवांस्ड 5K पेनेट्रेटर थे, जिन्हें पहली बार 2021 में अमेरिकी विमानों से इस्तेमाल किया गया था. 2021 में अमेरिकी वायुसेना की प्रेस रिलीज के अनुसार, इस शक्तिशाली बम को ‘गहरे और मजबूत संरक्षित लक्ष्यों को नष्ट करने की चुनौती को पार करने’ के लिए विकसित किया गया है. 

यानी, इनका इस्तेमाल ऐसे लक्ष्यों पर हमला करने के लिए किया जाता है जो बेहद मजबूत हों या जमीन के अंदर गहराई में छिपे हों. इसे लड़ाकू विमानों के साथ-साथ बॉम्बर विमानों से भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ईरान के खिलाफ इन बंकर बस्टर का इस्तेमाल करने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास मौजूद उसके रक्षा ठिकानों को निशाना बनाने में मदद मिल सकती है.

ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ से पहले भी, जून 2025 में ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के दौरान अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ बंकर बस्टर का इस्तेमाल किया था. उस समय फोर्दो यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट, नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी और इस्फहान न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सेंटर को निशाना बनाया गया था. 

एयर फोर्स टाइम्स की 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन बमों की कीमत करीब 2,88,000 डॉलर प्रति बम बताई गई है. हालांकि, ये बम पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका द्वारा गिराए गए 30,000 पाउंड (13,600 किलोग्राम) वजनी बमों की तुलना में कम शक्तिशाली हैं.

ईरान की बंदी से तेल बाजार पर पड़ रहा था असर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने बारूदी सुरंगों, ड्रोन और जहाजों की मदद से प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक समुद्री ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 27% प्रभावित हुआ है और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से और सोशल मीडिया पर यूरोपीय सहयोगियों फ्रांस और ब्रिटेन शामिल की आलोचना की है, क्योंकि उन्होंने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को दोबारा खोलने में मदद करने से इनकार कर दिया. 

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ट्रंप को नहीं मिल रहा समर्थन

उन्होंने नाटो से भी मदद मांगी थी, लेकिन उसने भी सामूहिक रूप से इससे इनकार कर दिया. उन्होंने कहा था, ‘आप सोचते कि वे कहते- हम कुछ माइनस्वीपर भेजना चाहेंगे. यह कोई बड़ी बात नहीं है, ज्यादा खर्च भी नहीं है. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.’ सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, ‘अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और उसके आसपास नौवहन की स्वतंत्रता को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता को तेजी से कमजोर करता रहेगा.’ सोमवार को जारी एक वीडियो बयान में कूपर ने दोहराया, ‘हम लगातार प्रगति कर रहे हैं और दुश्मन के खिलाफ सतर्क बने हुए हैं.’

वहीं कई देशों ने यह भी कहा कि यह उनकी लड़ाई नहीं है, इसलिए वे इसमें भाग नहीं लेंगे, इसमें स्पेन सबसे आगे रहा है. वहीं यूरोपीय यूनियन की उपाध्यक्ष और विदेश और सुरक्षा मामलों की शीर्ष नियंता काजा कलास ने कहा कि यह यूरोप का युद्ध नहीं है, इसलिए वह इसमें भाग नहीं लेगा. ट्रंप इस तरह के बयानों के बाद काफी नाराज नजर आए, उन्होंने कहा कि अमेरिका को किसी की जरूरत नहीं है, वह अकेले लड़ेगा. 

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अमेरिका में भी हो रहा है विरोध

हालांकि, अमेरिका में भी इस युद्ध के प्रति ट्रंप का समर्थन घटता जा रहा है. नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की. उन्होंने ईरान पर सैन्य कार्रवाई के औचित्य को लेकर चिंता जताई और कहा कि वे ‘ईमानदारी से’ ट्रंप प्रशासन के युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते. हालांकि, ट्रंप को इससे फर्क नहीं पड़ा, उन्होंने कहा कि अच्छा हुआ इस्तीफा दे दिया. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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