ट्रंप का ‘ईरान मिशन’: समंदर में उतारा सबसे बड़ा जंगी जहाज, बोले- सत्ता बदलना ही बेस्ट

Author Govind jee
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

Trump Iran Mission: ईरान और अमेरिका के बीच जंग की नौबत आ रही है। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े वॉरशिप, USS गेराल्ड आर. फोर्ड को समुद्र में उतार दिया है. ट्रंप ने साफ-साफ कहा है कि ईरान में सरकार बदलना ही एकमात्र ऑप्शन है.

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Trump Iran Mission: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान उनकी शर्तों पर डील नहीं करता, तो सैन्य कार्रवाई के लिए रास्ता खुला है. उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में सैनिकों से मिलते हुए कहा कि ईरान में लीडरशिप का बदलना ही सबसे अच्छी बात होगी.

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दो-दो एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात

ट्रंप ने पुष्टि की है कि दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत (वॉरशिप) USS जेराल्ड आर. फोर्ड अब कैरेबियन से मिडिल ईस्ट (खाड़ी क्षेत्र) की ओर रवाना हो रहा है. वहां पहले से ही USS अब्राहम लिंकन मौजूद है. ट्रंप के अनुसार, अगर ईरान से डील नहीं होती, तो हमें इसकी जरूरत पड़ेगी. इस कदम से मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 5,000 से ज्यादा बढ़ जाएगी, जिससे युद्ध की स्थिति में अमेरिका की ताकत दोगुनी हो जाएगी.

47 साल की बातचीत से ऊब चुके हैं ट्रंप

ईरान में धार्मिक लीडरशीप को हटाने के सवाल पर ट्रंप ने रिपोर्टर्स से कहा कि वे पिछले 47 सालों से सिर्फ बातें ही कर रहे हैं. ट्रंप का मुख्य फोकस ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है. उन्होंने संकेत दिया कि अगर सैन्य कार्रवाई हुई, तो परमाणु ठिकानों को तबाह करना तो मिशन का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा होगा. यानी अमेरिका इससे कहीं बड़ी प्लानिंग कर रहा है.

मार्को रूबियो की चेतावनी- वेनेजुएला जैसा आसान नहीं है ईरान

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पिछले महीने सावधानी बरतने की बात कही थी. उनके अनुसार, ईरान में सत्ता बदलना वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने से कहीं ज्यादा जटिल काम है. रूबियो ने सांसदों से कहा कि ईरान में सत्ता बहुत लंबे समय से जमी हुई है, इसलिए यहां किसी भी बड़े कदम से पहले बहुत गहराई से सोचने की जरूरत है.

क्या है ट्रंप का असली प्लान?

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली के अनुसार, ट्रंप के पास ईरान को लेकर ‘सारे विकल्प’ खुले हैं. ‘एक्सियोस’ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि उन्हें लगता है ईरान डील के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन बाद में उन्होंने सैनिकों से कहा कि कभी-कभी ‘डर’ होना जरूरी है क्योंकि उसी से समस्या का समाधान निकलता है. फिलहाल ओमान में पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.

ईरान का पलटवार और अंदरूनी कलह

एक तरफ जहां अमेरिका दबाव बना रहा है, वहीं ईरान ने भी धमकी दी है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि अगर उनकी जमीन पर हमला हुआ, तो वे अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नहीं छोड़ेंगे. दूसरी ओर, ईरान खुद भी अंदरूनी संकट से जूझ रहा है. पिछले महीने हुए प्रदर्शनों के बाद वहां हजारों लोगों की जान गई थी, और अब पूरे देश में उनके शोक कार्यक्रम चल रहे हैं.

खाड़ी देशों में डर का माहौल

मिडिल ईस्ट के अरब देशों ने चेतावनी दी है कि ईरान पर किसी भी हमले से पूरा इलाका आग की लपेट में आ जाएगा. गाजा में चल रहे इजरायल-हमास युद्ध की वजह से हालात पहले ही खराब हैं. वहीं अमेरिकी नौसेना के एडमिरल डेरिल कॉडल का मानना है कि लंबे समय तक मिशन पर रहने से सैनिकों और मशीनों पर बहुत दबाव पड़ता है, जिससे मेंटेनेंस में दिक्कत आ सकती है.

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