रूस से तेल-गैस खरीदा तो 100% तक टैरिफ, भारत समेत 5 देशों पर खतरा, अमेरिकी सीनेट से बिल पास

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की दिशा में अमेरिका ने कदम उठाया है. अमेरिकी सीनेट ने प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी, जिससे भारत, चीन समेत पांच देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है.

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अमेरिकी सीनेट ने रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने से जुड़े एक प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी है. प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत और चीन समेत रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है.

यह विधेयक सीनेट में 86 के मुकाबले 11 वोट से पारित हुआ है. अब इसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी लेनी होगी. इसके बाद ही यह राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा. यानी फिलहाल भारत या चीन पर नया 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है.

खास बातें

  • अमेरिकी सीनेट में विधेयक 86-11 वोट से पारित हुआ.
  • भारत और चीन समेत रूस से सबसे ज्यादा ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लग सकता है.
  • टैरिफ अपने आप लागू नहीं होगा, अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति और कानून में तय शर्तों पर निर्भर करेगा.
  • विधेयक का मकसद रूसी तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव डालना है.
  • बिल को अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पारित होना बाकी है.
  • नए प्रस्ताव का भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर क्या असर होगा, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है.

क्यों लाया गया यह विधेयक?

अमेरिकी सांसदों का कहना है कि रूस को तेल और गैस की बिक्री से मिलने वाली आमदनी यूक्रेन युद्ध में उसकी आर्थिक ताकत को बनाए रखने में मदद कर रही है. इसी राजस्व को कम करने के मकसद से उन देशों पर दबाव बनाने का प्रस्ताव है, जो बड़ी मात्रा में रूसी ऊर्जा खरीदते हैं.

रूस के पांच बड़े तेल खरीदारों पर अमेरिका की नजर

रिपोर्ट के अनुसार भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं. अमेरिकी विधेयक का निशाना इन्हीं बड़े खरीदारों पर है, ताकि रूस को ऊर्जा बेचने से हासिल आय को सीमित किया जा सके और यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाए.

पहले 500% अब 100% तक टैरिफ का प्रस्ताव

इस विधेयक के पुराने संस्करण में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों के खिलाफ 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. संशोधित मसौदे में इसे नरम करते हुए सबसे बड़े खरीदार देशों के लिए अधिकतम टैरिफ सीमा 100 प्रतिशत तक रखी गई है. इसका मतलब यह नहीं है कि विधेयक कानून बनते ही भारत या चीन पर सीधे 100 प्रतिशत शुल्क लग जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति को परिस्थितियों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर इस अधिकार का इस्तेमाल करना होगा.

रूस से सीधे आने वाले सामान पर भी सख्ती का प्रावधान

प्रस्तावित कानून में अमेरिका में आयात होने वाले कुछ रूसी उत्पादों पर बहुत अधिक शुल्क लगाने के लिए राष्ट्रपति को अतिरिक्त अधिकार देने का भी प्रावधान बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे अधिकार एक तय अवधि तक लागू रह सकते हैं. इसका उद्देश्य रूस के निर्यात राजस्व को और सीमित करना है.

ईरान से जुड़े प्रतिबंध भी विधेयक में शामिल

विधेयक का दायरा केवल रूस तक सीमित नहीं है. इसमें ईरान से जुड़े मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंध कानूनों को आगे बढ़ाने का प्रावधान भी शामिल है. इसके तहत ईरान के साथ कुछ प्रकार का कारोबार करने वाली गैर-अमेरिकी कंपनियों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर क्या होगा असर?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह विधेयक कानून बनता है तो इसका भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार बातचीत पर क्या असर पड़ेगा. व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ जवाब नहीं दिया.

यह वार्ताकारों पर निर्भर करता है- केविन हैसेट, निदेशक, व्हाइट हाउस राष्ट्रीय आर्थिक परिषद

हैसेट के बयान से संकेत मिलता है कि रूसी तेल से जुड़े संभावित प्रतिबंधों और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को दोनों देशों की बातचीत करने वाली टीमें ही आगे तय करेंगी.

भारत-अमेरिका के बीच पहले से चल रही टैरिफ पर बातचीत

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर पहले से बातचीत चल रही है. दोनों देश बाजार पहुंच बढ़ाने, व्यापार बाधाएं कम करने के साथ-साथ ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं. ऐसे में रूसी तेल खरीद पर नया अमेरिकी प्रतिबंध कानून इस बातचीत में एक नया और संवेदनशील मुद्दा जोड़ सकता है.

अभी भारत पर 100% टैरिफ नहीं

यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी सीनेट से विधेयक पारित होने का मतलब भारत पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लगना नहीं है. सबसे पहले इसे प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलनी होगी. इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर जरूरी होंगे. कानून बनने के बाद भी प्रस्तावित टैरिफ लागू करने के लिए अलग से कार्यकारी और कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है.

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा पर है. अगर वहां भी विधेयक पारित हो जाता है और राष्ट्रपति इसे मंजूरी देते हैं, तो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अमेरिकी आर्थिक दबाव काफी बढ़ सकता है. भारत के लिहाज से इसका असर केवल रूसी तेल आयात तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका के साथ चल रही ट्रेड डील वार्ता, भारतीय निर्यात और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर भी पड़ सकता है.

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प्रीतीश सहाय

लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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