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इस मुस्लिम देश में पुरुषों के लिए तड़प रहीं महिलाएं, संबंध बनाने के लिए होती है लड़ाई

Updated at : 18 Aug 2025 5:09 PM (IST)
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Syria Crisis

Syria Marriage Crisis

Syria Crisis: सीरिया में चल रहे लंबे गृह-युद्ध ने जनसंख्या संतुलन को बुरी तरह प्रभावित किया है. पुरुषों की कमी के कारण यहां 70% महिलाएं शादी के लिए लाइफ पार्टनर नहीं पा रही हैं. हालात ऐसे हैं कि एक-एक पुरुष से कई महिलाओं की शादी कराई जा रही है. युद्ध, पलायन और अस्थिरता ने सामाजिक ढांचे को तोड़ दिया है. वहीं, राष्ट्रपति बशर अल-असद का रूस शरण लेना सीरिया की सत्ता और हालात को और जटिल बना रहा है, जिससे भविष्य की चुनौतियां और गहरी हो गई हैं.

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Syria Crisis: बरसों से गृह-युद्ध की मार झेल रहे सीरिया में एक नया संकट पैदा हो गया है. गृह-युद्ध में लाखों लोगों की मौत और लाखों पुरुषों के पलायन से इस मुस्लिम देश में लिंग असमानता का संकट पैदा हो गया है. एक दशक से अधिक समय तक चले गृह-युद्ध ने सीरिया की सामाजिक और जनसंख्या संरचना को गहराई से प्रभावित किया है. इस देश में पुरुषों की संख्या इतनी कम हो चुकी है कि वहां की करीब 70% महिलाएं पुरुषों के संसर्ग के बिना रह जाती हैं और उन्हें लाइफ पार्टनर नहीं मिल पा रहा है. स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि पुरुषों की कमी की वजह से एक पुरुष के साथ कई महिलाएं ब्याह रचा रही हैं और संबंध बनाने के लिए उनमें आपस में ही लड़ाई तक हो जाती है. इस स्थिति ने सामाजिक संतुलन और पारिवारिक ढांचे पर गहरा असर डाला है.

गृह-युद्ध का दंश और पुरुषों की कमी

2011 से शुरू हुए गृह-युद्ध ने सीरिया को खंडहर बना दिया. लाखों लोग मारे गए और करोड़ों विस्थापित हुए. अनुमान है कि युद्ध में मारे गए लोगों में अधिकांश युवा पुरुष थे. इतना ही नहीं, इस गृह-युद्ध के कारण बड़ी संख्या में पुरुषों ने देश छोड़कर पलायन किया. हजारों युवा अब भी जेलों में कैद हैं. एक पूरी पीढ़ी, खासकर 1990 के दशक में जन्मे लोग, युद्ध में समाप्त हो गई. इसका सीधा असर विवाह योग्य पुरुषों की संख्या पर पड़ा, जिसके चलते महिलाएं पार्टनर खोजने में असमर्थ हो रही हैं.

महिलाओं की बेबसी और सामाजिक संघर्ष

सीरिया के कई हिस्सों से खबरें हैं कि महिलाएं शादी के लिए पुरुषों के पास गिड़गिड़ाने तक को मजबूर हो रही हैं. परिवार अपनी बेटियों की शादी कराने के लिए पुरुषों को महंगे उपहार तक देने लगे हैं. कई जगह एक पुरुष से चार-चार महिलाओं की शादी कराई जा रही है. महिलाओं के बीच विवाह योग्य पुरुषों को लेकर आपसी टकराव और तनाव की स्थिति बनी हुई है. यह सामाजिक ढांचा पारंपरिक मानकों से अलग और असंतुलित हो चुका है.

जनसंख्या असंतुलन की स्थिति

संयुक्त राष्ट्र की ओर से 2017 में जारी किए गए एक आंकड़े के मुताबिक, सीरिया की कुल आबादी लगभग 1.8 करोड़ थी. पुरुषों की औसत जीवन प्रत्याशा 65 वर्ष जबकि महिलाओं की 77 वर्ष थी. युद्ध और पलायन के कारण युवाओं की संख्या में भारी गिरावट आई. परिणामस्वरूप महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं अधिक हो गई. इस असंतुलन ने शादी और पारिवारिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है.

युद्ध और सामाजिक ताने-बाने पर असर

लगातार युद्ध ने सीरिया के सामाजिक संरचना को पूरी तरह तोड़ दिया. हजारों महिलाएं विधवा हो गई हैं. विस्थापन के चलते पारिवारिक और सामाजिक नेटवर्क टूट गए. विवाह की पारंपरिक व्यवस्थाएं बिखर गईं. इस वजह से महिलाएं अकेलेपन और असुरक्षा का सामना कर रही हैं.

अफवाहों के बीच क्या है वास्तविकता

सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि सीरिया में पुरुषों की भारी कमी के कारण महिलाएं विवाह के लिए संघर्ष कर रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि आतंकी संगठन आईएसआईएस ने महिलाओं को जबरन विवाह के लिए मजबूर किया. कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं बल्कि दुष्प्रचार का हिस्सा रहे. इसके बावजूद लिंग असंतुलन और विवाह संकट की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता.

असद परिवार और सत्ता का पतन

सीरिया का राजनीतिक संकट भी महिलाओं की इस स्थिति का हिस्सा है. हाल ही में खबरें आईं कि राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनका परिवार रूस शरण लेने चला गया. असद के रूस जाने की संभावना पहले से जताई जा रही थी, क्योंकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनके अच्छे संबंध हैं. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी बयान दिया कि असद को शरण देना रूस का निजी फैसला है. इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया कि सीरिया में असद परिवार का लगभग आधी सदी पुराना राज खत्म हो चुका है.

विद्रोहियों का कब्जा और बदलता भूगोल

वर्तमान में सीरिया का बड़ा हिस्सा विद्रोहियों के हाथ में जा चुका है. राजधानी दमिश्क सहित प्रमुख शहर अलेप्पो, हमा, दारा और होम्स विद्रोहियों के कब्जे में हैं. बाकी बचे शहरों पर भी जल्द ही विद्रोहियों के कब्जे की संभावना जताई जा रही है. केवल कुछ हिस्सों में ही सरकारी सेना का नियंत्रण बचा हुआ है. राजनीतिक अस्थिरता और लगातार युद्ध ने सामाजिक संकट को और गहरा बना दिया है.

महिलाओं की सामाजिक स्थिति

आज सीरिया की महिलाएं दोहरी मार झेल रही हैं. गृह-युद्ध के प्रभाव से परिवार टूट गए, रोजगार खत्म हो गया और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं है. पुरुषों की कमी के कारण महिलाएं अकेलेपन और सामाजिक उपेक्षा से जूझ रही हैं. कई महिलाएं अपने बच्चों की परवरिश अकेले कर रही हैं, जबकि युवतियां लाइफ पार्टनर नहीं मिलने से मानसिक तनाव झेल रही हैं.

सीरिया के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां

सीरिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक संतुलन को बहाल करना है. युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण जरूरी है. महिलाओं के लिए शिक्षा, रोज़गार और सुरक्षा की नीतियां बनानी होंगी. समाज में विवाह और पारिवारिक जीवन की व्यवस्था को फिर से स्थिर करना होगा. यदि ऐसा नहीं हुआ, तो लिंग असंतुलन और विवाह संकट देश के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को और कमजोर कर देगा.

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सीरिया में पुरुषों की कमी गहरा सामाजिक संकट

सीरिया में पुरुषों की कमी केवल जनसंख्या असंतुलन का मुद्दा नहीं बल्कि एक गहरा सामाजिक संकट है. युद्ध ने न सिर्फ बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था को नष्ट किया, बल्कि परिवार और विवाह जैसे सामाजिक संस्थानों को भी हिला दिया है. आज लाखों महिलाएं अकेलेपन और असुरक्षा के बीच जीवन जी रही हैं. जब तक देश में शांति, स्थिरता और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तेज़ नहीं होती, तब तक यह विवाह संकट और गहराता जाएगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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