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Coronavirus Outbreak: 'भारत हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा भेजेगा तो अच्छा, वरना...', डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक

By amitabh.kumar@prabhatkhabar.in
Updated Date
Coronavirus Outbreak:थोड़े सख्‍त दिखे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
Coronavirus Outbreak:थोड़े सख्‍त दिखे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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donald trump, hydroxychloroquine, narendra modi: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा की आपूर्ति पर मदद की उम्मीद जतायी है. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रविवार सुबह मेरी इस मुद्दे पर बात हुई थी. यदि वे दवा की आपूर्ति की अनुमति देंगे तो हम उनके इस कदम का स्वागत करेंगे. लेकिन यदि वे सहयोग नहीं भी करते हैं तो कोई बात नहीं, लेकिन वे हमसे भी इसी तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद भविष्‍य में करें.

आपको बता दें कि इस साल जनवरी के आखिर में कोरोना वायरस की शुरूआत होने के बाद से अमेरिका में 10,000 से अधिक लोग इस बीमारी की वजह से मौत का शिकार बन चुके हैं. इस संबंध में जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय ने जानकारी दी है. बाल्टीमोर में स्थित यह संस्थान दुनिया भर में कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों और इसकी वजह से होने वाली मौत के आंकड़े एकत्र कर रहा है. संस्थान का कहना है कि अमेरिका में अब तक कोविड-19 के संक्रमण के कम से कम 3,47,003 मामले हैं जबकि इससे 10,335 लोगों की जान जा चुकी है.

ट्रंप ने मांगी थी मोदी से मदद

पिछले रविवार को फोन पर बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) टैबलेट की खेप भेजने का आग्रह किया. आपको बता दें कि हाइड्रोक्लोक्वीन टैबलेट का इस्तेमाल कोरोना के मरीजों के इलाज में होता है. कोरोना वायरस टास्क फोर्स से जुड़ी प्रेस ब्रीफिंग में ट्रंप ने मोदी के साथ हुई बातचीत साझा करते हुए कहा था कि मैंने पीएम मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत में रोके गए Hydroxychloroquine टैबलेट की खेप को जारी करने का आग्रह किया है. बातचीत के दौरान ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि वह भी इस टैबलेट का सेवन करेंगे.

जानें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन का सबसे बड़ा उत्पादक क्यों है भारत

मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन (Hydroxychloroquine) बेहद मददगार साबित हुआ है. भारत में हर साल बड़ी संख्या में लोग मलेरिया की चपेट में आते हैं. यही वजह है कि भारतीय दवा कंपनियां बड़े स्तर पर इसका उत्पादन करने का काम करतीं हैं. अब यह दवा कोरोना वायरस से लड़ने में कारगर सिद्ध हो रहा है. कोरोना के खिलाफ जंग में कारगर इस दवा की मांग और बढ़ गयी है. लेकिन कच्चे माल की कमी के कारण दवा के उत्पादन में बढ़ोतरी नहीं हो सकी है. लॉकडाउन के कारण भारतीय दवा निर्माता कंपनियों ने सरकार से इस दवा के लिए कच्चे माल को एयरलिफ्ट कर मंगाने का आग्रह किया है.

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