अमेरिका में 65 चीनी कंपनियों पर बैन लगाने की तैयारी, सांसदों ने सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा को बताया खतरा

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अमेरिका में चीनी कंपनियों पर बैन लगाने की मांग की तेज. (स्रोत- एएनआई )

अमेरिका में चीनी कंपनियों पर बैन लगाने की मांग की तेज. (स्रोत- एएनआई )

अमेरिका में चीनी कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग तेज हो गई है. दो वरिष्ठ रिपब्लिकन सांसदों ने अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) से चीनी कंपनियों को बाजार से हटाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिका की अर्थव्यवस्था, निवेशकों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी है.

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Ban on Chinese companies in the US: अमेरिका में चीनी कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग तेज हो गई है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, दो वरिष्ठ रिपब्लिकन सांसदों ने अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) से चीन की सेना से जुड़े 65 चीनी कंपनियों बैन लगाने की मांग की है. सांसदों का कहना कि यह कदम अमेरिका की अर्थव्यवस्था, निवेशकों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए बहुत जरूरी है.

SEC प्रमुख को भेजा गया पत्र

हाउस सिलेक्ट कमेटी ऑन चाइना के अध्यक्ष जॉन मूलेनार और सीनेटर रिक स्कॉट ने SEC के चेयरमैन पॉल एटकिंस को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि मौजूदा अमेरिकी कानूनों के तहत उपलब्ध अधिकारों का इस्तेमाल करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि चीन की सैन्य गतिविधियों से जुड़ी कंपनियों को अमेरिकी निवेश का फायदा नहीं मिलना चाहिए.

नई सूची के बाद बढ़ी चिंता

यह मांग अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से 8 जून को जारी सेक्शन 1260H की नई सूची के बाद सामने आई है. इस सूची में 65 नई चीनी कंपनियों को शामिल किया गया है, जिनके बारे में कहा गया है कि वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीन की सेना से जुड़ी हैं और अमेरिका में कारोबार कर रही हैं. समिति का दावा है कि यह अब तक का सबसे व्यापक आकलन है.

निवेश से चीन की सैन्य ताकत बढ़ने का आरोप

सांसदों का कहना है कि अगर ऐसी कंपनियां अमेरिकी शेयर बाजार में सूचीबद्ध रहती हैं, तो अमेरिकी निवेशकों का पैसा अप्रत्यक्ष रूप से चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के आधुनिकीकरण में इस्तेमाल हो सकता है. इसलिए SEC को तुरंत कानूनी विकल्पों पर विचार करना चाहिए.

पुराने कानूनों के तहत कार्रवाई संभव

इस पत्र में सांसदों ने 1934 के सिक्योरिटीज एक्सचेंज एक्ट और होल्डिंग फॉरेन कंपनीज अकाउंटेबल एक्ट का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि SEC के पास निवेशकों के हितों की रक्षा, सार्वजनिक हित में ट्रेडिंग रोकने और पारदर्शिता के नियमों का पालन न करने वाली विदेशी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार पहले से मौजूद है. यदि SEC कदम उठाता है, तो यह अमेरिका-चीन आर्थिक संबंधों में और दूरगामी बदलाव साबित हो सकता है.

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सत्येन्द्र गिरि

लेखक के बारे में

By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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