Petrol-Diesel Crisis : अब इस देश में ऊर्जा संकट का असर, पेट्रोल पंप पर नहीं मिल रहा पेट्रोल-डीजल!
पेट्रोल पंप पर लगी गाड़ियों की लंबी कतारें
Petrol-Diesel Crisis : फ्रांस में करीब 11 फीसदी पेट्रोल पंप कम-से-कम एक तरह के ईंधन की कमी से जूझ रहे हैं. मध्य-पूर्व के तनाव और वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव का असर अब फ्रांस में भी साफ दिख रहा है.
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं. देश में पेट्रोल 390.79 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल 424.92 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. हैरानी की बात ये है कि इतनी महंगी कीमत चुकाने के बाद भी लोगों को कई जगह ईंधन आसानी से नहीं मिल रहा. अब कुछ ऐसी ही परेशानी फ्रांस में भी बढ़ती नजर आ रही है. यहां डीजल की औसत कीमत 2.39 यूरो प्रति लीटर के पार पहुंच गई है और करीब 11 फीसदी पेट्रोल पंप ईंधन की कमी से जूझ रहे हैं.
फ्रांस में डीजल की कीमत ने बनाया नया रिकॉर्ड
- फ्रांस में डीजल की कीमत ने अप्रैल 2026 के पिछले उच्च स्तर को पीछे छोड़ दिया है. 18 सितंबर को देश में डीजल की औसत कीमत 2.39 यूरो प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गई.
- यह आंकड़ा फ्रांस के सरकारी ईंधन मूल्य पोर्टल पर 9,000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों के दाम के आधार पर तैयार किया गया है. महंगे ईंधन का असर सिर्फ औसत कीमत तक सीमित नहीं है.
- 700 से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर डीजल 2.50 यूरो प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा था. करीब 70 स्टेशनों पर इसकी कीमत 2.70 यूरो प्रति लीटर से भी ज्यादा दर्ज की गई.
- वहीं, फ्रांस में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एसपी 95-ई10 (फ्रांस में इस्तेमाल होने वाला मानक पेट्रोल) की औसत कीमत भी करीब 2.17 यूरो प्रति लीटर पहुंच गई है.
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11 फीसदी पेट्रोल पंप पर सप्लाई की परेशानी
- फ्रांस सरकार के 18 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 89 फीसदी पेट्रोल पंप बिना किसी दिक्कत के काम कर रहे थे. इसका मतलब है कि करीब 11 फीसदी स्टेशन कम-से-कम एक पेट्रोल या डीजल उत्पाद की कमी से प्रभावित थे.
- ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी स्टेशनों पर पूरी तरह ईंधन खत्म हो गया है. हालांकि हर जगह तस्वीर भी एक जैसी नहीं है.
- फ्रांस के शहर ग्रां एस्त में 16 फीसदी स्टेशन परेशानी में थे. सेंटर-वाल द लोआर और ऑक्सितानी में यह आंकड़ा 14 फीसदी, जबकि पेई द ला लोआर में 13 फीसदी था.
मध्य-पूर्व के संकट से बढ़ रही दुनिया की मुश्किलें
- फ्रांस की समस्या को वैश्विक तेल बाजार से अलग करके नहीं देखा जा सकता. होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन पर संकट और क्षेत्र में जारी हमलों ने पहले ही वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया हुआ है.
- इसके अलावा, सऊदी अरब की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए हमले के बाद वहां से तेल की आपूर्ति क्षमता पर भी असर पड़ा है.
- रॉयटर्स के मुताबिक, इस पाइपलाइन के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 4 फीसदी हिस्सा प्रभावित होने का खतरा पैदा हुआ.
- यानी मामला सिर्फ कच्चे तेल की कीमत बढ़ने तक सीमित नहीं है. जब कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो रिफाइनिंग, समुद्री परिवहन और तैयार ईंधन की उपलब्धता पर भी दबाव बढ़ सकता है.
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मैक्रों ने बुलाई जी 7 की बैठक
- बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आने वाले हफ्तों में जी 7 देशों की बैठक बुलाने की बात कही है. फ्रांसी के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, बैठक में ऊर्जा भंडार के स्तर और आपूर्ति सुरक्षा पर सहयोग मजबूत करने पर चर्चा होगी.
- फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर वैश्विक तेल आपूर्ति में रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो महंगे ईंधन का असर सिर्फ पेट्रोल पंपों तक नहीं रहेगा. परिवहन लागत बढ़ने से माल ढुलाई, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की दूसरी चीजों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है.
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