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नेपाल में प्रतिनिधि सभा को भंग करने के मामले में गुरुवार से सुनवाई करेगा SC, प्रतिनिधि सभा को भंग किए जाने के खिलाफ याचिका दायर

Updated at : 25 May 2021 9:56 PM (IST)
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नेपाल में प्रतिनिधि सभा को भंग करने के मामले में गुरुवार से सुनवाई करेगा SC, प्रतिनिधि सभा को भंग किए जाने के खिलाफ याचिका दायर

सुप्रीम कोर्ट के कम्युनिकेशन एक्सपर्ट किशोर पौडेल के अनुसार, 19 याचिकाओं पर सामान्य सत्र में गुरुवार को सुनवाई शुरू होगी. बाकी की 11 याचिकाओं पर संवैधानिक पीठ में सुनवाई शुक्रवार से शुरू की जाएगी. इन 30 याचिकाओं में से चार में सदन की बहाली की स्थिति में अब के कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री के रूप में जारी रखने की मांग की गई है.

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काठमांडू : नेपाल का सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिनिधि सभा को भंग किए जाने के खिलाफ याचिका पर आगामी गुरुवार से सुनवाई करने का फैसला किया है. प्रतिनिधि सभा को भंग किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कम से कम 30 याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें से 11 याचिकाओं में संविधान पीठ में सुनवाई करने की मांग की गई है.

सुप्रीम कोर्ट के कम्युनिकेशन एक्सपर्ट किशोर पौडेल के अनुसार, 19 याचिकाओं पर सामान्य सत्र में गुरुवार को सुनवाई शुरू होगी. बाकी की 11 याचिकाओं पर संवैधानिक पीठ में सुनवाई शुक्रवार से शुरू की जाएगी. इन 30 याचिकाओं में से चार में सदन की बहाली की स्थिति में अब के कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री के रूप में जारी रखने की मांग की गई है.

राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने अपने फैसले में कहा कि अनुच्छेद 76 (5) के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति के लिए कोई आधार नहीं था. बीते शुक्रवार की रात राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिपरिषद की सिफारिश और चुनाव की तारीख पर संसद भंग कर दी गई थी. मंत्रियों के चुनाव के लिए 12 और 19 नवंबर के लिए समय निर्धारित किया गया था.

नेपाली संसद को भंग करने के मामले को असंवैधानिक बताते हुए वहां के 146 सांसदों ने सोमवार को सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर प्रतिनिध सभा को बहाल करने और शेर बहादुर देउबा को नेपाल के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्त करने की मांग की थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को दायर याचिका में प्रधानमंत्री ओली और राष्ट्रपति भंडारी की ओर से सदन को भंग करने के मामले में चुनौती दी गई थी. सदन भंग करने से पहले राष्ट्रपति भंडारी ने शुक्रवार को देउबा के प्रधानमंत्री बनने के दावे को खारिज कर दिया था.

देउबा ने यह साबित करने के लिए 149 सांसदों के हस्ताक्षर पेश किए थे कि उनके पस नई सरकार का नेतृत्व करने के लिए बहुमत है. हालांकि, ओली ने भी प्रधानमंत्री पद के लिए दावा पेश किया था. यह बात दीगर है कि वे फिलहाल प्रधानमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्होंने भी अपने दावे में कहा कि उन्हें 153 सांसदों का समर्थन प्राप्त है.

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Posted by : Vishwat Sen

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