Lizard Family: छिपकली जैसे चेहरे वाला परिवार! डर और रहस्य से घिरी जिंदगी, वीडियो देख कांप जाएगा रूह
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 23 Dec 2025 9:36 PM
इंडोनेशिया की अनोखा परिवार, फोटो इंस्टाग्राम
Lizard Family: अगर आपके सामने अचानक छिपकली या भालू का चेहरा लेकर आ जाएगा, तब आपकी हालत क्या होगी? जाहिर सी बात है कि आप डर जाएंगे. इन दिनों सोशल मीडिया पर छिपकली के चेहरे वाला पूरा परिवार सनसनी बना हुआ है.
Lizard Family: इंडोनेशिया में एक अनोखा परिवार इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. इस परिवार के सदस्य देखने में छिपकली जैसे लगते हैं. पहली नजर में यह बात किसी काल्पनिक कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन यह पूरी तरह सच है. परिवार के लोगों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. बताया जाता है कि उन्हें देखकर कई लोग डर रहे हैं और उनके पास जाने से कतराते हैं. हालांकि, परिवार के सदस्यों ने इसे बीमारी नहीं, बल्कि अपनी आमदनी के लिए एक वरदान मान लिया है. छिपकली जैसी शक्ल-ओ-सूरत की वजह से उन्हें अलग पहचान मिली है और सोशल मीडिया के जरिए वे अच्छी कमाई भी कर रहे हैं.
छिपकली की तरह दिखने वाला परिवार इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा इलाके का है रहने वाला
आपको बताते चलें कि यह परिवार इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा इलाके का रहने वाला मानुरुंग परिवार है, जो एक चेहरे से जुड़ी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है. परिवार में कुल छह भाई-बहन हैं. इनमें से चार इस बीमारी से ग्रस्त हैं. शुरुआत में परिवार और आसपास के लोग इसे किसी अभिशाप या बुरी आत्माओं का असर मानते थे, लेकिन बाद में इसे एक आनुवंशिक रोग के रूप में स्वीकार किया गया. बताया जा रहा है कि यह बीमारी उन्हें उनके पिता से अनुवांशिक तौर पर मिली है.
ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम से हैं पीड़ित
छिपकली जैसी शक्ल-ओ-सूरत की वजह बनी बीमारी का नाम ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम है. यह एक दुर्लभ आनुवंशिक रोग है, जो चेहरे की संरचना में विकृति पैदा करता है. इस बीमारी से पीड़ित लोगों का चेहरा असामान्य हो सकता है, जिससे वे देखने में छिपकली जैसे लगते हैं. हालांकि, यह बीमारी केवल बाहरी रूप-रंग को प्रभावित करती है, व्यक्ति के आंतरिक अंगों या बौद्धिक क्षमताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ता.
बुरी आत्माओं से जुड़ी थी भ्रांति
मानुरुंग परिवार इंडोनेशिया के केदुंगकांग गांव का रहने वाला है. गांव में लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि परिवार पर किसी बुरी आत्मा का साया है, जिसकी वजह से उनका चेहरा छिपकली जैसा हो गया है. इसी डर के कारण लोग उनसे दूरी बनाए रखते थे. लेकिन समय के साथ हालात बदले और परिवार ने अपनी बीमारी को अभिशाप मानने के बजाय अपनी पहचान बना लिया.
बीमारी को बनाया कमाई का जरिया
आज यह परिवार सोशल मीडिया के जरिए अपनी जिंदगी को नई दिशा दे चुका है. यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर इनके वीडियो काफी लोकप्रिय हैं. यूट्यूब पर इनके तीन लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं और सोशल मीडिया से परिवार लाखों रुपये की कमाई कर रहा है. उनसे मिलने और बातचीत करने के लिए अब लोगों की भीड़ लगने लगी है.
क्या है ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम?
ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जो जन्म से ही होती है. इसमें चेहरे की हड्डियों और संरचना का विकास सामान्य रूप से नहीं हो पाता.
क्यों होती है यह बीमारी?
यह बीमारी जीन में बदलाव के कारण होती है. कई मामलों में यह माता-पिता से बच्चों में विरासत में मिलती है, जबकि कुछ मामलों में यह अचानक भी सामने आ सकती है.
बीमारी के लक्षण
इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का चेहरा सामान्य से चपटा हो सकता है. आंखें नीचे की ओर झुकी होती हैं, कान छोटे, टेढ़े या कभी-कभी पूरी तरह विकसित नहीं होते. जबड़ा और ठुड्डी छोटी होती है. कई मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है और सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.
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By ArbindKumar Mishra
अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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