Lizard Family: छिपकली जैसे चेहरे वाला परिवार! डर और रहस्य से घिरी जिंदगी, वीडियो देख कांप जाएगा रूह

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Indonesia lizard like family

इंडोनेशिया की अनोखा परिवार, फोटो इंस्टाग्राम

Lizard Family: अगर आपके सामने अचानक छिपकली या भालू का चेहरा लेकर आ जाएगा, तब आपकी हालत क्या होगी? जाहिर सी बात है कि आप डर जाएंगे. इन दिनों सोशल मीडिया पर छिपकली के चेहरे वाला पूरा परिवार सनसनी बना हुआ है.

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Lizard Family: इंडोनेशिया में एक अनोखा परिवार इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. इस परिवार के सदस्य देखने में छिपकली जैसे लगते हैं. पहली नजर में यह बात किसी काल्पनिक कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन यह पूरी तरह सच है. परिवार के लोगों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. बताया जाता है कि उन्हें देखकर कई लोग डर रहे हैं और उनके पास जाने से कतराते हैं. हालांकि, परिवार के सदस्यों ने इसे बीमारी नहीं, बल्कि अपनी आमदनी के लिए एक वरदान मान लिया है. छिपकली जैसी शक्ल-ओ-सूरत की वजह से उन्हें अलग पहचान मिली है और सोशल मीडिया के जरिए वे अच्छी कमाई भी कर रहे हैं.

छिपकली की तरह दिखने वाला परिवार इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा इलाके का है रहने वाला

आपको बताते चलें कि यह परिवार इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा इलाके का रहने वाला मानुरुंग परिवार है, जो एक चेहरे से जुड़ी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है. परिवार में कुल छह भाई-बहन हैं. इनमें से चार इस बीमारी से ग्रस्त हैं. शुरुआत में परिवार और आसपास के लोग इसे किसी अभिशाप या बुरी आत्माओं का असर मानते थे, लेकिन बाद में इसे एक आनुवंशिक रोग के रूप में स्वीकार किया गया. बताया जा रहा है कि यह बीमारी उन्हें उनके पिता से अनुवांशिक तौर पर मिली है.

ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम से हैं पीड़ित

छिपकली जैसी शक्ल-ओ-सूरत की वजह बनी बीमारी का नाम ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम है. यह एक दुर्लभ आनुवंशिक रोग है, जो चेहरे की संरचना में विकृति पैदा करता है. इस बीमारी से पीड़ित लोगों का चेहरा असामान्य हो सकता है, जिससे वे देखने में छिपकली जैसे लगते हैं. हालांकि, यह बीमारी केवल बाहरी रूप-रंग को प्रभावित करती है, व्यक्ति के आंतरिक अंगों या बौद्धिक क्षमताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ता.

बुरी आत्माओं से जुड़ी थी भ्रांति

मानुरुंग परिवार इंडोनेशिया के केदुंगकांग गांव का रहने ��ाला है. गांव में लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि परिवार पर किसी बुरी आत्मा का साया है, जिसकी वजह से उनका चेहरा छिपकली जैसा हो गया है. इसी डर के कारण लोग उनसे दूरी बनाए रखते थे. लेकिन समय के साथ हालात बदले और परिवार ने अपनी बीमारी को अभिशाप मानने के बजाय अपनी पहचान बना लिया.

बीमारी को बनाया कमाई का जरिया

आज यह परिवार सोशल मीडिया के जरिए अपनी जिंदगी को नई दिशा दे चुका है. यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर इनके वीडियो काफी लोकप्रिय हैं. यूट्यूब पर इनके तीन लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं और सोशल मीडिया से परिवार लाखों रुपये की कमाई कर रहा है. उनसे मिलने और बातचीत करने के लिए अब लोगों की भीड़ लगने लगी है.

क्या है ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम?

ट्रेचर कॉलिन्स सिंड्रोम एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जो जन्म से ही होती है. इसमें चेहरे की हड्डियों और संरचना का विकास सामान्य रूप से नहीं हो पाता.

क्यों होती है यह बीमारी?

यह बीमारी जीन में बदलाव के कारण होती है. कई मामलों में यह माता-पिता से बच्चों में विरासत में मिलती है, जबकि कुछ मामलों में यह अचानक भी सामने आ सकती है.

बीमारी के लक्षण

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का चेहरा सामान्य से चपटा हो सकता है. आंखें नीचे की ओर झुकी होती हैं, कान छोटे, टेढ़े या कभी-कभी पूरी तरह विकसित नहीं होते. जबड़ा और ठुड्डी छोटी होती है. कई मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है और सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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