खाड़ी देशों के गैस ठिकानों पर हमले, मिडिल ईस्ट संघर्ष ने बढ़ाई पूरी दुनिया की चिंता

Updated at : 20 Mar 2026 4:43 PM (IST)
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Middle East War

गैस ठिकानों पर हमले, फोटो- पीटीआई

Middle East Tension: खाड़ी देशों के गैस ठिकानों पर हमलों ने मिडिल ईस्ट में छिड़े संघर्ष को और खतरनाक बना दिया है. ऊर्जा ठिकानों पर बढ़ते हमलों से तेल-गैस आपूर्ति, वैश्विक बाजार और विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है. क्षेत्रीय तनाव अब पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है.

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Middle East Tension: 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में शुरू हुआ संघर्ष अब पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुका है. युद्ध शुरू होने के बाद हमले अक्सर एक देश तक सीमित नहीं रहते और उनका असर सीमाओं को पार कर कई देशों तक पहुंच जाता है. मिडिल ईस्ट में भी कुछ ऐसा ही हाल देखने को मिल रहा है. इज़राइल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है. इसके तहत ईरान कतर, सऊदी अरब और यूएई के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रहा है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है.

कुवैत के तेल और गैस ठिकानों पर ईरान का हमला

इसी बीच कुवैत ने शुक्रवार को दावा किया कि उसकी मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी पर ईरान ने फिर से ड्रोन हमला किया, जिससे रिफाइनरी की कई इकाइयों में आग लग गई. इससे एक दिन पहले गुरुवार को भी इसी रिफाइनरी पर हमला हुआ था, जिसमें आग लगने की घटना सामने आई थी. कुवैत के मुताबिक दमकलकर्मी आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं और फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

युद्ध से ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल

इस युद्ध का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है. इज़राइल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है. युद्ध शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि तेल के वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साफ है कि अगर हालात ऐसे ही बिगड़ते रहे तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ हार्मुज बंद

युद्ध के कारण ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलमार्ग को भी बंद कर दिया है. इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक ईंधन आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से दुनिया में होने वाले कुल तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है.

यूरोपीय संघ ने की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की मांग

बढ़ते ऊर्जा संकट को देखते हुए ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के नेताओं की एक आपात बैठक भी हुई. इस बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और पश्चिम एशिया में ऊर्जा अवसंरचना पर हो रहे हवाई हमलों को रोकने की मांग की गई. यूरोपीय परिषद के नाम से जाने जाने वाले 27 सदस्य देशों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और युद्ध में शामिल सभी पक्षों से तनाव कम करने तथा अधिकतम संयम बरतने की अपील की. शिखर सम्मेलन से पहले बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डे वेवर ने कहा कि ऊर्जा संकट को लेकर सभी देश बेहद चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि युद्ध से पहले ही ऊर्जा की कीमतें ऊंची थीं, लेकिन इस संघर्ष ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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