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लंदन में खुला फिलिस्तीन का दूतावास, राजदूत ने शेयर कीं फोटोज और कहा; इससे ये 5 चीजें हुईं हासिल

Updated at : 06 Jan 2026 2:26 PM (IST)
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Embassy Of Palestine Inaugurated In London

लंदन में फिलिस्तीन दूतावास का उद्घाटन हुआ. फोटो- एक्स (@hzomlot)

Embassy Of Palestine In London: सोमवार को लंदन में फिलिस्तीन के दूतावास का उद्घाटन हुआ. सितंबर 2025 में ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत कई देशों ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देने की घोषणा की थी. ब्रिटेन में दूतावास के उद्घाटन में राजदूत हुसाम जोमलोत काफी प्रसन्न नजर आए. उन्होंने इसे फिलिस्तीनी लोगों के लिए लंबे संघर्ष का प्रतिबिंब बताया.

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Embassy Of Palestine In London: लंदन में सोमवार को फिलिस्तीन राज्य के दूतावास का औपचारिक उद्घाटन किया गया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है. यह पहल गाजा में बीते दो वर्षों से चले आ रहे तनावपूर्ण हालात के बाद ब्रिटेन और फिलिस्तीन के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है. इस मौके पर लंदन में रह रहे फिलिस्तीनी समुदाय ने उत्सव और भावनात्मक एकजुटता के साथ इस उपलब्धि का स्वागत किया. ब्रिटेन में फिलिस्तीन के राजदूत हुसाम जोमलोत ने दूतावास भवन के बाहर लगी आधिकारिक पट्टिका का अनावरण किया और इसे फिलिस्तीनी जनता के लिए एक यादगार और ऐतिहासिक पल बताया.

राजदूत जोमलोत ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर उद्घाटन समारोह की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि यह दूतावास ब्रिटिश धरती पर फिलिस्तीन की मौजूदगी का प्रतीक है. उन्होंने इसे शांति, दृढ़ता (सुमूद), सम्मान और न्याय व स्वतंत्रता के लिए फिलिस्तीनी लोगों के लंबे संघर्ष का प्रतिबिंब बताया. उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि फिलिस्तीन न केवल मौजूद है, बल्कि हर चुनौती के बावजूद कायम रहेगा.

पश्चिमी लंदन स्थित इस मिशन के बाहर एकत्र लोगों को संबोधित करते हुए जोमलोत ने कहा कि नए साल की शुरुआत इस तरह के ऐतिहासिक क्षण के साथ होना गर्व की बात है. उनके अनुसार, यह कदम न सिर्फ ब्रिटेन-फिलिस्तीन संबंधों को मजबूती देता है, बल्कि फिलिस्तीनी जनता की आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता की दशकों पुरानी आकांक्षा को भी नया बल प्रदान करता है.

गौरतलब है कि यह घटनाक्रम सितंबर 2025 में ब्रिटेन द्वारा फिलिस्तीन राज्य को औपचारिक मान्यता दिए जाने के बाद सामने आया है. उस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित कई अन्य देशों के साथ मिलकर फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देने की घोषणा की थी, जिसे पश्चिमी देशों की नीति में एक अहम बदलाव के तौर पर देखा गया था. हालांकि इजरायल इस कदम का पूरी तरह विरोध करता रहा है. वह गाजा में हमास को सबसे बड़ा दुश्मन मानता है और 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमले के बाद से उसके समूल विनाश पर जुटा हुआ है. 

लंबे समय से संघर्ष में है फिलिस्तीन

फिलिस्तीन पश्चिम एशिया का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है, जिसकी पहचान हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और धार्मिक महत्व से जुड़ी हुई है. यरुशलम, गाजा और वेस्ट बैंक जैसे इलाके यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों, तीनों के लिए पवित्र माने जाते हैं. 1949 में इजरायल की स्थापना के बाद से फिलिस्तीन का सवाल अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बन गया. फिलिस्तीनी जनता लंबे समय से एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र की मांग करती आ रही है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन भी मिला है.

हाल के दशकों में फिलिस्तीन संघर्ष, कब्जे, हिंसा और मानवीय संकट का पर्याय बन गया है, खासकर गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक में. इसके बावजूद फिलिस्तीनी समाज ने अपनी पहचान, संस्कृति और आत्मनिर्णय की आकांक्षा को बनाए रखा है, जिसे वे “सुमूद” यानी दृढ़ता के रूप में परिभाषित करते हैं. कई देशों द्वारा फिलिस्तीन राज्य को मान्यता दिया जाना इस संघर्ष में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जाता है और अब ब्रिटेन में दूतावास खुलना फिलिस्तीनी जनता की स्वतंत्रता व न्याय की उम्मीदों से जोड़कर देखा जा रहा है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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